रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड शादी के बाद अलग रहना चाहती है: लेकिन मेरे पेरेंट्स अकेले पड़ जाएंगे, मैं बेटे क...

Living With Parents After Marriage News

रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड शादी के बाद अलग रहना चाहती है: लेकिन मेरे पेरेंट्स अकेले पड़ जाएंगे, मैं बेटे क...
Son Duty Vs Husband ResponsibilitySeparatelyLiving Without Parents
  • 📰 Dainik Bhaskar
  • ⏱ Reading Time:
  • 335 sec. here
  • 12 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 154%
  • Publisher: 51%

Relationship Advice; Living With Vs Without Parents After Marriage Advantages And Disadvantages.

मैं पिछले 3 साल से एक रिलेशनशिप में हूं और अब हम शादी करने वाले हैं। शादी के बाद साथ रहने को लेकर हमारे बीच मतभेद हो रहा है। मैं अपने पेरेंट्स के साथ रहना चाहता हूं, क्योंकि वे बूढ़े हो रहे हैं। दूसरी तरफ मेरी पार्टनर कहती है कि वह शादी के बाद अलग रहना चाहती है। उसका तर्क है कि शादी के बाद वह भी अपने पेरेंट्स से दूर होगी तो सिर्फ उससे ही यह उम्मीद क्यों की जा रही है कि वह अपने पेरेंट्स का घर छोड़े? मैं मानता हूं कि उसकी बात गलत नहीं है, लेकिन मुझे गिल्ट हो रहा है कि अपने पेरेंट्स को अकेला छोड़ रहा हूं। इस कॉन्फ्लिक्ट में मैं खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा हूं। इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करूं कि न तो ये रिश्ता टूटे और न पेरेंट्स को अकेला छोड़ना पड़े?सबसे पहले तो आपको बधाई कि आप इतने प्यारे रिश्ते में हैं और शादी का फैसला कर चुके हैं। ये खुशी की बात है। आप जो उलझन बता रहे हैं, वो भी बहुत सामान्य है। आपने इतनी ईमानदारी से अपना गिल्ट और पार्टनर की बात, दोनों को स्वीकार किया। ये आपकी मैच्योरिटी दिखाता है। आप खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। लेकिन यकीन मानिए, ये फंसा हुआ महसूस करना ही समाधान की पहली सीढ़ी है, क्योंकि आपने इसे स्वीकार किया है और अब इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।आप जिस उलझन में हैं, वह सिर्फ दो लोगों के बीच का मतभेद नहीं है। यह दो पीढ़ी, दो तरह की सोच और दो अलग-अलग जरूरतों का टकराव है। इसलिए अगर आप खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। सबसे पहले एक बात बिल्कुल साफ कर लेते हैं कि आपकी पार्टनर जो कह रही हैं, वह गलत नहीं है। उतनी ही सच्चाई यह भी है कि आप भी गलत नहीं हैं। आप दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं। बस आप दोनों जिस समाज से आए हैं, उसकी कंडीशनिंग अलग-अलग सवाल खड़े कर रही है।आपकी पार्टनर एक बहुत बुनियादी सवाल पूछ रही हैं। शादी के बाद अगर अपने पेरेंट्स का घर छोड़ना ही है तो सिर्फ उनसे ही यह उम्मीद क्यों की जा रही है? यह सवाल न तो रिश्ते को तोड़ने की नीयत से है, न जिम्मेदारियों से भागने की नीयत से। यह सवाल बराबरी, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा से जुड़ा है।अगर हम भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे कुछ देशों को छोड़ दें तो दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में शादी का मतलब यह नहीं होता कि लड़की अपने घर से विदा लेकर लड़के के माता-पिता के घर में शिफ्ट हो जाए। वहां शादी को दो लोगों की साझेदारी माना जाता है, जहां दोनों मिलकर अपना नया घर बनाते हैं, एक नई जिंदगी शुरू करते हैं।दरअसल, भारत में कल्चरली प्राइवेसी का कॉन्सेप्ट बहुत कमजोर रहा है। यहां परिवार का मतलब हमेशा सब कुछ साझा रहा है- कमरा, समय, फैसले, भावनाएं, यहां तक कि बहसें भी। बच्चों की अपनी प्राइवेसी नहीं होती, माता-पिता की अपनी प्राइवेसी पर भी कभी बात नहीं होती है। यही वजह है कि शादी के बाद सबसे ज्यादा टकराव वहीं होता है, जहां बराबरी और प्राइवेसी का कोई आइडिया नहीं होता। एक नए अनजान परिवार में आई लड़की पर सारी उम्मीदों का बोझ डाल दिया जाता है। उसे जबरन एक सिस्टम में फिट करने की कोशिश होती है।जबकि सच यह है कि पेरेंट्स की भी अपनी प्राइवेसी होनी चाहिए, बच्चों की अपनी प्राइवेसी होनी चाहिए। शादी के बाद कपल की प्राइवेसी तो और भी जरूरी हो जाती है। इस प्राइवेसी का मतलब पेरेंट्स से दूरी नहीं है, उनका अपमान नहीं है। यह मानसिक सेहत और रिश्तों की मजबूती की बुनियादी जरूरत है।अब आपके गिल्ट की बात करते हैं। आपको यह अपराधबोध इसलिए हो रहा है क्योंकि आप जिस समाज में पले-बढ़े हैं, वहां बेटे को यह सिखाया गया है कि ‘अच्छा बेटा वही है, जो पेरेंट्स के साथ रहे।’ अलग रहने का मतलब मान लिया जाता है कि बच्चा जिम्मेदारी से भाग रहा है। इस कंडीशनिंग में प्राइवेसी या स्पेस को कभी वैल्यू ही नहीं दी गई। इसलिए जब आपकी पार्टनर अलग रहने की बात करती है तो आपके दिमाग में तुरंत यह अलार्म बजता है- ‘क्या मैं अपने मां-बाप को छोड़ रहा हूं?’यहां एक बहुत महत्वपूर्ण फर्क को समझना जरूरी है। पेरेंट्स का ख्याल रखना और उनके साथ रहना, दोनों एक ही बात नहीं है। आप उनसे दूर रहते हुए भी उनकी हर जरूरत का ध्यान रख सकते हैं। उनकी सेहत की, दवाइयों की, डॉक्टर के अपॉइंटमेंट्स की जिम्मेदारी ले सकते हैं। जरूरत पड़ने पर तुरंत उनके पास पहुंच सकते हैं, वीकेंड पर उनके साथ समय बिता सकते हैं, पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खा सकते हैं। पेरेंट्स को बच्चों की 24×7 मौजूदगी नहीं चाहिए होती। उन्हें यह भरोसा चाहिए होता है कि जरूरत के वक्त उनका बच्चा उनके साथ खड़ा है।अब यहां एक और महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। आपकी पार्टनर यह नहीं कह रही कि आपके पेरेंट्स महत्वहीन हैं। वह यह भी नहीं कह रही कि आप अपनी जिम्मेदारियां छोड़ दें। सवाल सिर्फ ये है कि ये उम्मीद सिर्फ लड़की से क्यों है कि शादी के बाद वही अपने माता-पिता को छोड़कर दूसरे घर में जाए, आपके माता-पिता के साथ एडजस्ट करे। लड़की की अलग रहने की इच्छा को हमेशा नेगेटिव रोशनी में ही देखा जाता है। इसे स्वार्थ समझ लिया जाता है। जबकि यह बहुत मानवीय इच्छा और जरूरत हो सकती है। इच्छा आजादी की, जरूरत स्पेस और बराबरी की। पार्टनर की यह मांग जिद नहीं है। यह उसकी इमोशनल जरूरत है और सच यह है कि हमारे समाज में इस जरूरत की कोई रिस्पेक्ट नहीं है।आपके लिए इस कॉन्फ्लिक्ट को सुलझाने का रास्ता या तो माता-पिता या पत्नी का विकल्प चुनना नहीं है। यह रास्ता दोनों के लिए सही संतुलन ढूंढने का है। आप ऐसा मॉडल चुन सकते हैं, जहां आप और आपकी पत्नी एक अलग घर में रहें। यह घर आपके पेरेंट्स के घर के बहुत पास हो। रोजाना मिलना-जुलना बना रहे, इमरजेंसी में आप तुरंत उपलब्ध हों, त्योहार, वीकेंड और खास मौके साथ बिताए जाएं। इस तरह आप दोनों को अपनी प्राइवेसी और स्पेस भी मिलेगा। आपके पेरेंट्स को यह भरोसा मिलेगा कि उनका बेटा उनके साथ है और आप खुद को अपराधबोध में घुटने से बचा पाएंगे।अब सवाल है कि इसे कैसे अमल में लाएं। सबसे पहले शांति से बैठकर अपनी पार्टनर से बात करें। उन्हें बताएं कि आप उनके दिल की बात समझ रहे हैं, लेकिन पेरेंट्स का ख्याल रखना भी जरूरी है। इसलिए आप बीच का रास्ता चुनना चाहते हैं। इसके बाद अपने पेरेंट्स से बात करें। उन्हें बताएं कि अलग रहने का मतलब उन्हें छोड़ना नहीं है, बल्कि रिश्ते को ज्यादा मजबूत बनाना है। अगर सही तरीके से बात कही जाए तो ज्यादातर पेरेंट्स इसे समझते हैं। अगर बात नहीं बन रही है तो कपल काउंसलिंग लें। एक प्रोफेशनल आपको दोनों साइड्स दिखा सकता है। ये ध्यान रखिए कि ये कोई बड़ी समस्या नहीं है, बस एक ट्रांजिशन भर है।आप एक समझदार और केयरिंग इंसान हैं। ये उलझन गुजर जाएगी और आपका रिश्ता अधिक मजबूत होगा। हिम्मत रखिए, बात करके देखिए, सब ठीक हो जाएगा। आप अकेले नहीं हैं। लाखों कपल्स ऐसी मुश्किलों से गुजरते हैं और साथ मिलकर सामना करते हैं। फिर खुशी से जीवन बिताते हैं।रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टी–मूवी में गर्लफ्रेंड हमेशा साथ: लेकिन जरूरत या क्राइसिस में कभी नहीं, बिना ब्लेम किए ये बात कैसे कहूं आप जो महसूस कर रहे हैं, वो बिल्कुल गलत नहीं है। अच्छे वक्त में साथ निभाना आसान है, हंसी-मजाक, पार्टी, घूमना-फिरना होता है। असली रिश्ते की परीक्षा तब होती है जब जिंदगी मुश्किल हो जाए, जब अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हों, जब नौकरी की टेंशन हो, जब घर में कोई दुख हो, जब रात को नींद न आए। उस वक्त अगर पार्टनर साथ नहीं होता, तो दिल में एक खालीपन सा हो जाता है। आपका ये खालीपन जायज है।नाराज हो तो बात नहीं करता, मैसेज का जवाब नहीं देता, क्या ये रेड फ्लैग हैन कोई शाहरुख खान आया, न पेट में तितलियां उड़ीं, क्या मैं कुछ ज्यादा ही फिल्मी हूंपूछने पर नाराज होता है, मैं ब्रेकअप चाहती हूं लेकिन ड्रामा नहीं, क्या करूंराजस्थान में सर्दी के चलते 25 जिलों में स्कूल बंदउदयपुर में कड़ाके की सर्दी, स्कूलों का समय बदलामुजफ्फरपुर में घना कोहरा, 10 डिग्री पहुंचा न्यूनतम तापमान.

मैं पिछले 3 साल से एक रिलेशनशिप में हूं और अब हम शादी करने वाले हैं। शादी के बाद साथ रहने को लेकर हमारे बीच मतभेद हो रहा है। मैं अपने पेरेंट्स के साथ रहना चाहता हूं, क्योंकि वे बूढ़े हो रहे हैं। दूसरी तरफ मेरी पार्टनर कहती है कि वह शादी के बाद अलग रहना चाहती है। उसका तर्क है कि शादी के बाद वह भी अपने पेरेंट्स से दूर होगी तो सिर्फ उससे ही यह उम्मीद क्यों की जा रही है कि वह अपने पेरेंट्स का घर छोड़े? मैं मानता हूं कि उसकी बात गलत नहीं है, लेकिन मुझे गिल्ट हो रहा है कि अपने पेरेंट्स को अकेला छोड़ रहा हूं। इस कॉन्फ्लिक्ट में मैं खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा हूं। इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करूं कि न तो ये रिश्ता टूटे और न पेरेंट्स को अकेला छोड़ना पड़े?सबसे पहले तो आपको बधाई कि आप इतने प्यारे रिश्ते में हैं और शादी का फैसला कर चुके हैं। ये खुशी की बात है। आप जो उलझन बता रहे हैं, वो भी बहुत सामान्य है। आपने इतनी ईमानदारी से अपना गिल्ट और पार्टनर की बात, दोनों को स्वीकार किया। ये आपकी मैच्योरिटी दिखाता है। आप खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। लेकिन यकीन मानिए, ये फंसा हुआ महसूस करना ही समाधान की पहली सीढ़ी है, क्योंकि आपने इसे स्वीकार किया है और अब इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।आप जिस उलझन में हैं, वह सिर्फ दो लोगों के बीच का मतभेद नहीं है। यह दो पीढ़ी, दो तरह की सोच और दो अलग-अलग जरूरतों का टकराव है। इसलिए अगर आप खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। सबसे पहले एक बात बिल्कुल साफ कर लेते हैं कि आपकी पार्टनर जो कह रही हैं, वह गलत नहीं है। उतनी ही सच्चाई यह भी है कि आप भी गलत नहीं हैं। आप दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं। बस आप दोनों जिस समाज से आए हैं, उसकी कंडीशनिंग अलग-अलग सवाल खड़े कर रही है।आपकी पार्टनर एक बहुत बुनियादी सवाल पूछ रही हैं। शादी के बाद अगर अपने पेरेंट्स का घर छोड़ना ही है तो सिर्फ उनसे ही यह उम्मीद क्यों की जा रही है? यह सवाल न तो रिश्ते को तोड़ने की नीयत से है, न जिम्मेदारियों से भागने की नीयत से। यह सवाल बराबरी, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा से जुड़ा है।अगर हम भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे कुछ देशों को छोड़ दें तो दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में शादी का मतलब यह नहीं होता कि लड़की अपने घर से विदा लेकर लड़के के माता-पिता के घर में शिफ्ट हो जाए। वहां शादी को दो लोगों की साझेदारी माना जाता है, जहां दोनों मिलकर अपना नया घर बनाते हैं, एक नई जिंदगी शुरू करते हैं।दरअसल, भारत में कल्चरली प्राइवेसी का कॉन्सेप्ट बहुत कमजोर रहा है। यहां परिवार का मतलब हमेशा सब कुछ साझा रहा है- कमरा, समय, फैसले, भावनाएं, यहां तक कि बहसें भी। बच्चों की अपनी प्राइवेसी नहीं होती, माता-पिता की अपनी प्राइवेसी पर भी कभी बात नहीं होती है। यही वजह है कि शादी के बाद सबसे ज्यादा टकराव वहीं होता है, जहां बराबरी और प्राइवेसी का कोई आइडिया नहीं होता। एक नए अनजान परिवार में आई लड़की पर सारी उम्मीदों का बोझ डाल दिया जाता है। उसे जबरन एक सिस्टम में फिट करने की कोशिश होती है।जबकि सच यह है कि पेरेंट्स की भी अपनी प्राइवेसी होनी चाहिए, बच्चों की अपनी प्राइवेसी होनी चाहिए। शादी के बाद कपल की प्राइवेसी तो और भी जरूरी हो जाती है। इस प्राइवेसी का मतलब पेरेंट्स से दूरी नहीं है, उनका अपमान नहीं है। यह मानसिक सेहत और रिश्तों की मजबूती की बुनियादी जरूरत है।अब आपके गिल्ट की बात करते हैं। आपको यह अपराधबोध इसलिए हो रहा है क्योंकि आप जिस समाज में पले-बढ़े हैं, वहां बेटे को यह सिखाया गया है कि ‘अच्छा बेटा वही है, जो पेरेंट्स के साथ रहे।’ अलग रहने का मतलब मान लिया जाता है कि बच्चा जिम्मेदारी से भाग रहा है। इस कंडीशनिंग में प्राइवेसी या स्पेस को कभी वैल्यू ही नहीं दी गई। इसलिए जब आपकी पार्टनर अलग रहने की बात करती है तो आपके दिमाग में तुरंत यह अलार्म बजता है- ‘क्या मैं अपने मां-बाप को छोड़ रहा हूं?’यहां एक बहुत महत्वपूर्ण फर्क को समझना जरूरी है। पेरेंट्स का ख्याल रखना और उनके साथ रहना, दोनों एक ही बात नहीं है। आप उनसे दूर रहते हुए भी उनकी हर जरूरत का ध्यान रख सकते हैं। उनकी सेहत की, दवाइयों की, डॉक्टर के अपॉइंटमेंट्स की जिम्मेदारी ले सकते हैं। जरूरत पड़ने पर तुरंत उनके पास पहुंच सकते हैं, वीकेंड पर उनके साथ समय बिता सकते हैं, पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खा सकते हैं। पेरेंट्स को बच्चों की 24×7 मौजूदगी नहीं चाहिए होती। उन्हें यह भरोसा चाहिए होता है कि जरूरत के वक्त उनका बच्चा उनके साथ खड़ा है।अब यहां एक और महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। आपकी पार्टनर यह नहीं कह रही कि आपके पेरेंट्स महत्वहीन हैं। वह यह भी नहीं कह रही कि आप अपनी जिम्मेदारियां छोड़ दें। सवाल सिर्फ ये है कि ये उम्मीद सिर्फ लड़की से क्यों है कि शादी के बाद वही अपने माता-पिता को छोड़कर दूसरे घर में जाए, आपके माता-पिता के साथ एडजस्ट करे। लड़की की अलग रहने की इच्छा को हमेशा नेगेटिव रोशनी में ही देखा जाता है। इसे स्वार्थ समझ लिया जाता है। जबकि यह बहुत मानवीय इच्छा और जरूरत हो सकती है। इच्छा आजादी की, जरूरत स्पेस और बराबरी की। पार्टनर की यह मांग जिद नहीं है। यह उसकी इमोशनल जरूरत है और सच यह है कि हमारे समाज में इस जरूरत की कोई रिस्पेक्ट नहीं है।आपके लिए इस कॉन्फ्लिक्ट को सुलझाने का रास्ता या तो माता-पिता या पत्नी का विकल्प चुनना नहीं है। यह रास्ता दोनों के लिए सही संतुलन ढूंढने का है। आप ऐसा मॉडल चुन सकते हैं, जहां आप और आपकी पत्नी एक अलग घर में रहें। यह घर आपके पेरेंट्स के घर के बहुत पास हो। रोजाना मिलना-जुलना बना रहे, इमरजेंसी में आप तुरंत उपलब्ध हों, त्योहार, वीकेंड और खास मौके साथ बिताए जाएं। इस तरह आप दोनों को अपनी प्राइवेसी और स्पेस भी मिलेगा। आपके पेरेंट्स को यह भरोसा मिलेगा कि उनका बेटा उनके साथ है और आप खुद को अपराधबोध में घुटने से बचा पाएंगे।अब सवाल है कि इसे कैसे अमल में लाएं। सबसे पहले शांति से बैठकर अपनी पार्टनर से बात करें। उन्हें बताएं कि आप उनके दिल की बात समझ रहे हैं, लेकिन पेरेंट्स का ख्याल रखना भी जरूरी है। इसलिए आप बीच का रास्ता चुनना चाहते हैं। इसके बाद अपने पेरेंट्स से बात करें। उन्हें बताएं कि अलग रहने का मतलब उन्हें छोड़ना नहीं है, बल्कि रिश्ते को ज्यादा मजबूत बनाना है। अगर सही तरीके से बात कही जाए तो ज्यादातर पेरेंट्स इसे समझते हैं। अगर बात नहीं बन रही है तो कपल काउंसलिंग लें। एक प्रोफेशनल आपको दोनों साइड्स दिखा सकता है। ये ध्यान रखिए कि ये कोई बड़ी समस्या नहीं है, बस एक ट्रांजिशन भर है।आप एक समझदार और केयरिंग इंसान हैं। ये उलझन गुजर जाएगी और आपका रिश्ता अधिक मजबूत होगा। हिम्मत रखिए, बात करके देखिए, सब ठीक हो जाएगा। आप अकेले नहीं हैं। लाखों कपल्स ऐसी मुश्किलों से गुजरते हैं और साथ मिलकर सामना करते हैं। फिर खुशी से जीवन बिताते हैं।रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टी–मूवी में गर्लफ्रेंड हमेशा साथ: लेकिन जरूरत या क्राइसिस में कभी नहीं, बिना ब्लेम किए ये बात कैसे कहूं आप जो महसूस कर रहे हैं, वो बिल्कुल गलत नहीं है। अच्छे वक्त में साथ निभाना आसान है, हंसी-मजाक, पार्टी, घूमना-फिरना होता है। असली रिश्ते की परीक्षा तब होती है जब जिंदगी मुश्किल हो जाए, जब अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हों, जब नौकरी की टेंशन हो, जब घर में कोई दुख हो, जब रात को नींद न आए। उस वक्त अगर पार्टनर साथ नहीं होता, तो दिल में एक खालीपन सा हो जाता है। आपका ये खालीपन जायज है।नाराज हो तो बात नहीं करता, मैसेज का जवाब नहीं देता, क्या ये रेड फ्लैग हैन कोई शाहरुख खान आया, न पेट में तितलियां उड़ीं, क्या मैं कुछ ज्यादा ही फिल्मी हूंपूछने पर नाराज होता है, मैं ब्रेकअप चाहती हूं लेकिन ड्रामा नहीं, क्या करूंराजस्थान में सर्दी के चलते 25 जिलों में स्कूल बंदउदयपुर में कड़ाके की सर्दी, स्कूलों का समय बदलामुजफ्फरपुर में घना कोहरा, 10 डिग्री पहुंचा न्यूनतम तापमान

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Dainik Bhaskar /  🏆 19. in İN

Son Duty Vs Husband Responsibility Separately Living Without Parents Separate Living Relationship Tips

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

रिलेशनशिप एडवाइज- ऑफिस कलीग से प्यार हो गया: ऑफिस में हो रहा गॉसिप, जॉब पर बुरा असर, प्यार-करियर, दोनों साथ...रिलेशनशिप एडवाइज- ऑफिस कलीग से प्यार हो गया: ऑफिस में हो रहा गॉसिप, जॉब पर बुरा असर, प्यार-करियर, दोनों साथ...Relationship Advice; How To Balance Office Romance, Career Goals & Workplace Politics.
Read more »

मेंटल हेल्थ– घरवाले शादी के पीछे पड़े हैं: पापा ने ताउम्र मां को सताया, भाई भी सख्त, शादी के ख्याल से ही डरत...मेंटल हेल्थ– घरवाले शादी के पीछे पड़े हैं: पापा ने ताउम्र मां को सताया, भाई भी सख्त, शादी के ख्याल से ही डरत...Marriage Phobia (Relationship Commitment) Signs, Reasons And Self Test.
Read more »

आपका पैसा- FD कराना क्यों है घाटे का सौदा: पूरी सेविंग नहीं, सिर्फ थोड़ा रखें FD में, सुरक्षित निवेश व बेहतर...आपका पैसा- FD कराना क्यों है घाटे का सौदा: पूरी सेविंग नहीं, सिर्फ थोड़ा रखें FD में, सुरक्षित निवेश व बेहतर...Fixed Deposit (FD) Alternative Investment Options; Follow FD Investment Advantages And Disadvantages, Interest Rate, Return Details On Dainik Bhaskar.
Read more »

Sunidhi Chauhan: বাবা-মায়ের অমতে ভিনধর্মে বিয়ে করেন সুনিধি! বছর ঘুরতে না ঘুরতেই গায়িকাকে পথে বসিয়ে...Sunidhi Chauhan: বাবা-মায়ের অমতে ভিনধর্মে বিয়ে করেন সুনিধি! বছর ঘুরতে না ঘুরতেই গায়িকাকে পথে বসিয়ে...Sunidhi Chauhan Parents Disowned Her Due To Her Interfaith Marriage To Bobby Khan At 18
Read more »

Ratna Shastra: स्फटिक धारण करते ही भूत-प्रेत की बाधा होती है दूर, पर ये भी जान लें इसे पहनने के क्या हैं भारी नुकसान!Ratna Shastra: स्फटिक धारण करते ही भूत-प्रेत की बाधा होती है दूर, पर ये भी जान लें इसे पहनने के क्या हैं भारी नुकसान!Sphatik Mala Advantages And Disadvantages: रत्न शास्त्र में एक से एक रत्न के बारे में बताया गया है
Read more »

रिलेशनशिप एडवाइज- सबके सामने तारीफ, अकेले में ताने: पति करता है दोहरा व्यवहार, पर लोगों की नजर में परफेक्ट ...रिलेशनशिप एडवाइज- सबके सामने तारीफ, अकेले में ताने: पति करता है दोहरा व्यवहार, पर लोगों की नजर में परफेक्ट ...Relationship Advice; Two-Faced Husband Double Standards Explained.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 08:26:07