राजस्थान कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। अजमेर में पर्यवेक्षक अशोक तंवर के सामने कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया जहाँ धर्मेन्द्र राठौड़ को गहलोत का समर्थक और विजय जैन को पायलट का माना जाता है। राठौड़ के विरोधियों ने उन पर पोस्टर चस्पा कर आरोप लगाए जिसके बाद उनके समर्थकों ने पुलिस से शिकायत...
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान में जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष के चयन के लिए केंद्रीय जिलों में रायशुमारी कर रहे केंद्रीय पर्यवेक्षकों को कांग्रेस की गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की खींचतान से दो चार होना पड़ रहा है। अजमेर में 5 अक्टूबर को केंद्रीय पर्यवेक्षक अशोक तंवर के द्वारा रायशुमारी के दौरान फॉयसागर रोड स्थित एक समारोह स्थल शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन और आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं के जोरदार हंगामा की गूंज अभी अजमेर के राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे ही रही थी कि सोमवार को राठौड़ विरोधियों ने शहर के शौचालयों में पोस्टर चस्पा कर विवाद को और बड़ा दिया। कांग्रेस पर साधा निशाना विरोधियों ने पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ को गहलोत का दलाल बताते हुए अजमेर छोड़ के आरोपों से छवि बिगाड़ने का प्रयास किया। इस बात को लेकर कांग्रेस के राठौड़ समर्थक सेवादल के पदाधिकारी कैलाश झालीवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज करने की मांग की। झालीवाल ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस को लोग किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। एक और कांग्रेस में संगठन सृजन की कवायद हो रही है वहीं कुछ लोग माहौल को खराब कर रहे हैं ऐसे लोगों को पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध का यह तरीका खराब और गलत है। इससे व्यक्ति की छवि और पार्टी की प्रतिष्ठा पर विपरीत असर पड़ता है। पैनल बनाने का लिया फैसला गौरतलब है कि अजमेर में राठौड़ को गहलोत और विजय जैन को पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का समर्थक माना जाता है। इन दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने तंवर के समक्ष भरपूर प्रदर्शन किया। तंवर को राठौड़ के समर्थकों ने बताया कि अजमेर में संगठन का असली काम हम ही कर रहे हैं। वहीं पायलट गुट के विजय जैन ने धर्मेन्द्र राठौड़ के वजूद को ही नकार दिया। कांग्रेस के जो हाल अजमेर में देखने को मिले वो ही कमोवेश पूरे प्रदेश में भी देखने को मिल रहे हैं। कोटा में केंद्रीय पर्यवेक्षक के पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में कार्यकर्ता विभाजित रहे। धारीवाल को गहलोत का तथा गुंजल को पायलट का समर्थक माना जाता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने पर्यवेक्षकों से कहा है कि वे कार्यकर्ताओं से विमर्श कर जिलाध्यक्ष के लिए पांच नामों का पैनल बनाए। गहलोत और पायलट के गुटों में बंटे कार्यकर्ताओं यही वजह है कि केंद्रीय पर्यवेक्षक के सामने पांच नाम वाले पैनल में शामिल होने के लिए गहलोत और पायलट के समर्थक कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बड़े नेताओं की जोर आजमाइश में पर्यवेक्षक पैनल कैसे तैयार करेंगे, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ कार्यकर्ताओं की राय पर ही जिलाध्यक्ष का निर्णय होगा? मौजूदा समय में गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं तथा टीकाराम जूली प्रतिपक्ष के नेता की भूमिका में है, लेकिन राजस्थान में कांग्रेस के कार्यकर्ता अभी भी गहलोत और पायलट के गुटों में बंटे हैं। सोनम वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, पत्नी ने की रिहाई की मांग; अदालत में क्या हुआ?.
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