राजस्थान की भाजपा सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए 3 नए संभागों और 9 नए जिलों को एक साल के कार्यकाल के बाद निरस्त कर दिया है। कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी है, हालांकि कांग्रेस ने इसका विरोध किया है और नए साल में आंदोलन का ऐलान किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पूर्व सरकार ने राजनैतिक स्वार्थ के लिए निर्धारित मापदंडों का ध्यान नहीं रखा था।
जयपुर: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने एक साल के कार्यकाल के बाद ऐतिहासिक फैसला लिया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान बनाए गए 3 नए संभागों और 9 नए जिलों को आज भजनलाल सरकार ने निरस्त कर दिया। शनिवार 28 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में इस अहम फैसले पर मुहर लगाई गई। हालांकि सरकार के इस फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। नए साल में 1 जनवरी से ही आंदोलन करने का ऐलान किया गया है। उधर भाजपा के नेताओं का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने राजनैतिक स्वार्थ के लिए निर्धारित मापदंडों का ध्यान नहीं रखते हुए जिलों का गठन कर दिया था। ऐसे में पूर्ववर्ती सरकार के इस फैसले में बदलाव किया गया है।व्यवहारिक नहीं था कांग्रेस का फैसला: जोगाराम पटेलकैबिनेट की बैठक संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और मंत्री सुमित गोदारा मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कैबिनेट में हुए फैसलों की जानकारी दी। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए जोगाराम पटेल ने कहा कि 3 नये संभाग और 9 नवगठित जिलों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। पटेल ने कहा कि प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद पूर्ववर्ती सरकार के इस फैसले पर विचार करने के लिए पूर्व आईएएस ललित के.
पंवार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने जो रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की, उसमें बताया गया कि कई जिलों के गठन में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया। ऐसे में उन्हें जिले का दर्ज दिया जाना व्यवहारिक नहीं था। ऐसे में सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार के इस फैसले में बदलाव करना पड़ा।प्रशासनिक तंत्र को विधिवत करना जरूरी थामंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि तय मापदंडों की अनदेखी करते हुए राजनैतिक फायदे के लिए छोटे-छोटे शहरों को भी जिले का दर्जा दे दिया था। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से तीन दिन पहले पूर्ववर्ती सरकार ने नए जिलों का फैसला लिया था। यह फैसला किसी भी दृष्टि से व्यवहारिक नहीं था। ना जिलों का और ना ही संभागों का। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लागू करना भी एक बड़ी चुनौती थी। नवगठित जिलों में भवन तक नहीं थे। नए पद सृजित किए बिना ही जिलों का ऐलान कर दिया गया। प्रशासनिक तंत्र को विधिवत रूप से प्रभावी बनाने और राजस्थान को समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सभी पहलुओं पर ध्यान रखकर भजनलाल सरकार ने 3 संभागों और 9 जिलों को निरस्त करने का निर्णय लिया।'कांग्रेस सरकार बनने पर पुनः बनाएंगे जिले'भाजपा सरकार की ओर से 3 नए संभागों और 9 जिलों के निरस्त करने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी। नए साल में 1 जनवरी से ही पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू किए जाने का ऐलान किया गया है। डोटासरा ने कहा कि आने वाले दिनों में जब कांग्रेस फिर से सत्ता में आएगी तब निरस्त किए गए जिलों को फिर से अस्तित्व में लाया जाएगा।पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने कौन-कौन से जिले बनाए थे? पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने सीकर, पाली और बांसवाड़ा को नया संभाग बनाया था। साथ ही 19 नए जिलों का गठन किया जिसमें अनूपगढ़ ,गंगापुर सिटी, कोटपूतली, बालोतरा,जयपुर शहर , खैरथल, ब्यावर ,जयपुर ग्रामीण, नीमकाथाना, डीग, जोधपुर शहर , फलौदी, डीडवाना, जोधपुर ग्रामीण, सलूंबर , दूदू, केकड़ी ,सांचौर और शाहपुरा शामिल थे। चूंकि जयपुर और जोधपुर को शहरी और ग्रामीण जिलों में बदल दिया गया। ऐसे में जिलों की संख्या 33 से बढ़कर 50 हो गई थी। संभाग की संख्या भी 7 से बढ़कर 10 हो गई थी।
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