Insider Trading Case: Rajat Gupta says felt like I was political prisoner | 19 महीने जेल काटने वाले गोल्डमैन साक्स के पूर्व डायरेक्टर ने किताब लिखी गुप्ता ने कहा- जिसे सूचनाएं देने का आरोप था, उससे पहली बार जेल में ही मिला
गुप्ता ने कहा- जिसे सूचनाएं देने का आरोप था, उससे पहली बार जेल में ही मिलाइनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में 19 महीने जेल की सजा काट चुके गोल्डमैन साक्स के पूर्व डायरेक्टर, भारतीय मूल के रजत गुप्ता ने कहा है कि जेल के दिनों में वे खुद को राजनीतिक बंदी की तरह महसूस करते थे। उन्होंने न्यूयॉर्क के पूर्व अटॉर्नी भारतीय मूल के ही प्रीत भरारा पर इस केस को गलत तरीके से चलाने का आरोप भी लगाया।70 वर्षीय गुप्ता ने यह भी बताया कि अमेरिकी फेडरल जेल में उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया गया। कई सप्ताह तक उन्हें अकेला रखा गया। गुप्ता 2012 में गोल्डमैन साक्स के बोर्डरूम से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं गैलियन नाम के हेज फंड के फाउंडर राज राजारत्नम को लीक करने के दोषी पाए गए थे। उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई गई थी। राजारत्नम इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में 11 साल जेल की सजा काट रहा है। गुप्ता ने 19 महीने जेल काटी और 2016 में उन्हें रिहा कर दिया गया। गुप्ता ने कहा, 'मैंने कुछ गलत नहीं किया था। जेल जाना मेरी नियति में था।' गुप्ता के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग का केस न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के तत्कालीन अटॉर्नी प्रीत भरारा ने लड़ा था। यह एक तरह से दो भारतीय अप्रवासियों के बीच मुकाबला बन गया था। गुप्ता ने भरारा पर झूठ बोलने, मामले को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने और जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद से गुजर जाने का आरोप लगाया। गुप्ता ने कहा कि भरारा ने केस को हैंडल करने में बहुत चतुराई दिखाई। राजारत्नम के ट्रायल से एक सप्ताह पहले मेरे ऊपर चार्ज लगाए गए। राजारत्नम के ट्रायल के दौरान मेरी अनुपस्थिति में मुझ पर मामला चलाया गया। मुझे अपने बचाव का कोई मौका नहीं दिया गया। यह तरीका उचित नहीं था। गुप्ता के मुताबिक आरोप लगाने वाला पक्ष लगातार झूठ बोलता रहा। यह कहा गया कि राजारत्नम के गैलियन इंटरनेशनल हेज फंड में मेरी 15% हिस्सेदारी है। इसलिए मैंने अपने फायदे के लिए उसे सूचना दी। सच्चाई यह है कि मेरे पास उस हेज फंड का एक भी शेयर नहीं था। मुझे कभी कोई फायदा नहीं मिला। विरोधियों ने लिखा कि मैं गैलियन के मालिकों में एक था। वे जानते थे कि यह सच नहीं है। रजत गुप्ता का कहना है कि विरोधियों ने मेरे सभी फाइनेंशियल स्टेटमेंट और बैंक अकाउंट की जांच की थी। उनमें उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली। उन्होंने गोल्डमैन साक्स के तत्कालीन सीईओ लॉयड ब्लैंकफीन और अन्य गवाहों को मेरे खिलाफ तैयार किया। उनसे वही कहलवाया जो वे सुनना चाहते थे। किसी ने ऐसे इनसाइड ट्रेडिंग मामले के बारे में नहीं सुना है जिसमें कोई फायदा न मिले। यह पहला मौका नहीं था जब मेरे पास अंदरूनी सूचना थी। मैं 40 सालों से बोर्ड को सलाह दे रहा था। रजत गुप्ता मैकिंजे के एमडी भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी कहानी पर 'माइंड विदाउट फियर' नाम की किताब लिखी है। इसमें उन्होंने अमेरिकी कॉर्पोरेट और फाइनेंशियल दुनिया में शीर्ष पर पहुंचने और फिर इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप के बाद पतन की दास्तान लिखी है। गुप्ता अपने अनुभवों और इस किताब के बारे में गुरुवार को न्यूयॉर्क में संबोधन भी देंगे। गुप्ता ने कहा, मैं राजारत्नम से पहली बार जेल में ही मिला। उससे कहा कि उसकी वजह से ही जेल में हूं। ट्रायल के दौरान राजारत्नम को ऑफर दिया गया था कि अगर वह मेरे खिलाफ गवाही दे तो उसकी सजा पांच साल कम की जा सकती है। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उसके पास मेरे खिलाफ कहने के लिए कुछ नहीं था।.
गुप्ता ने कहा- जिसे सूचनाएं देने का आरोप था, उससे पहली बार जेल में ही मिलाइनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में 19 महीने जेल की सजा काट चुके गोल्डमैन साक्स के पूर्व डायरेक्टर, भारतीय मूल के रजत गुप्ता ने कहा है कि जेल के दिनों में वे खुद को राजनीतिक बंदी की तरह महसूस करते थे। उन्होंने न्यूयॉर्क के पूर्व अटॉर्नी भारतीय मूल के ही प्रीत भरारा पर इस केस को गलत तरीके से चलाने का आरोप भी लगाया।70 वर्षीय गुप्ता ने यह भी बताया कि अमेरिकी फेडरल जेल में उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया गया। कई सप्ताह तक उन्हें अकेला रखा गया। गुप्ता 2012 में गोल्डमैन साक्स के बोर्डरूम से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं गैलियन नाम के हेज फंड के फाउंडर राज राजारत्नम को लीक करने के दोषी पाए गए थे। उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई गई थी। राजारत्नम इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में 11 साल जेल की सजा काट रहा है। गुप्ता ने 19 महीने जेल काटी और 2016 में उन्हें रिहा कर दिया गया। गुप्ता ने कहा, 'मैंने कुछ गलत नहीं किया था। जेल जाना मेरी नियति में था।' गुप्ता के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग का केस न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के तत्कालीन अटॉर्नी प्रीत भरारा ने लड़ा था। यह एक तरह से दो भारतीय अप्रवासियों के बीच मुकाबला बन गया था। गुप्ता ने भरारा पर झूठ बोलने, मामले को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने और जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद से गुजर जाने का आरोप लगाया। गुप्ता ने कहा कि भरारा ने केस को हैंडल करने में बहुत चतुराई दिखाई। राजारत्नम के ट्रायल से एक सप्ताह पहले मेरे ऊपर चार्ज लगाए गए। राजारत्नम के ट्रायल के दौरान मेरी अनुपस्थिति में मुझ पर मामला चलाया गया। मुझे अपने बचाव का कोई मौका नहीं दिया गया। यह तरीका उचित नहीं था। गुप्ता के मुताबिक आरोप लगाने वाला पक्ष लगातार झूठ बोलता रहा। यह कहा गया कि राजारत्नम के गैलियन इंटरनेशनल हेज फंड में मेरी 15% हिस्सेदारी है। इसलिए मैंने अपने फायदे के लिए उसे सूचना दी। सच्चाई यह है कि मेरे पास उस हेज फंड का एक भी शेयर नहीं था। मुझे कभी कोई फायदा नहीं मिला। विरोधियों ने लिखा कि मैं गैलियन के मालिकों में एक था। वे जानते थे कि यह सच नहीं है। रजत गुप्ता का कहना है कि विरोधियों ने मेरे सभी फाइनेंशियल स्टेटमेंट और बैंक अकाउंट की जांच की थी। उनमें उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली। उन्होंने गोल्डमैन साक्स के तत्कालीन सीईओ लॉयड ब्लैंकफीन और अन्य गवाहों को मेरे खिलाफ तैयार किया। उनसे वही कहलवाया जो वे सुनना चाहते थे। किसी ने ऐसे इनसाइड ट्रेडिंग मामले के बारे में नहीं सुना है जिसमें कोई फायदा न मिले। यह पहला मौका नहीं था जब मेरे पास अंदरूनी सूचना थी। मैं 40 सालों से बोर्ड को सलाह दे रहा था। रजत गुप्ता मैकिंजे के एमडी भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी कहानी पर 'माइंड विदाउट फियर' नाम की किताब लिखी है। इसमें उन्होंने अमेरिकी कॉर्पोरेट और फाइनेंशियल दुनिया में शीर्ष पर पहुंचने और फिर इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप के बाद पतन की दास्तान लिखी है। गुप्ता अपने अनुभवों और इस किताब के बारे में गुरुवार को न्यूयॉर्क में संबोधन भी देंगे। गुप्ता ने कहा, मैं राजारत्नम से पहली बार जेल में ही मिला। उससे कहा कि उसकी वजह से ही जेल में हूं। ट्रायल के दौरान राजारत्नम को ऑफर दिया गया था कि अगर वह मेरे खिलाफ गवाही दे तो उसकी सजा पांच साल कम की जा सकती है। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उसके पास मेरे खिलाफ कहने के लिए कुछ नहीं था।
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