माल्या के मुकाबले नीरव को जल्द भारत लाने की उम्मीद via NavbharatTimes NeeravModi neeravmodiarrested
नीरज चौहान/प्रदीप ठाकुर, नई दिल्ली सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को उम्मीद है कि नीरव मोदी के इंग्लैंड से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज होगी। इसमें उतना समय नहीं लगेगा जितना विजय माल्या के मामले में लगा। माल्या पर 9 हजार करोड़ रुपये की अदायगी नहीं करने का मामला है जबकि नीरव पर 13 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला है। विजय माल्या के मुकाबले उसका केस ज्यादा मजबूत है। जांच एजेंसियों का कहना है कि माल्या पर सिर्फ बैंकों का पैसा न चुकाने का मामला था जबकि नीरव पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग दोनों का मामला है। इसके अलावा वह अपने मामले को राजनीति से प्रेरित और भारतीय जेल में अमानवीय स्थिति होने का बहाना भी नहीं बना सकता है। माल्या के मामले में कोर्ट इन दोनों आरोपों को पहले ही खारिज कर चुका है। आइए जानते हैं माल्या के मुकाबले नीरव का केस कैसे मजबूत है और उसका जल्द प्रत्यर्पण कैसे मुमकिन हो सकता है। नीरव मोदी के खिलाफ सीबीआई और ईडी पहले ही विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर चुके हैं। उसमें फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स जारी करने का दस्तावेजी साक्ष्य है। इसके अलावा उसके ईमेल संवाद का भी ब्यौरा है। किस तरह उसने यूके समेत कम से कम 15 देशों में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया और बैंक ट्रांसफर से संबंधित साक्ष्य भी मुहैया कराए गए हैं। यूके की अथॉरिटीज को भी ये दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। पंजाब नैशनल बैंक को उसने कथित तौर पर जो 7,000 करोड़ का चूना लगाया है, उसमें से 6,400 करोड़ रुपये का घपला साबित हो चुका है। भारत में उसकी 1,873 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है। विदेश में जब्त होने वाली संपत्ति की अनुमानित कीमत 970 करोड़ रुपये है। माल्या की तरह राजनीति से प्रेरित होने का बहाना नहीं बना सकता18 अप्रैल, 2017 को माल्या की गिरफ्तारी हुई थी। उसने बहाना बनाया था कि उसका मामला राजनीति से प्रेरित है और भारतीय जेलों की स्थिति अच्छी नहीं है। इन दोनों तर्कों को यूके की अदालत ने खारिज कर दिया था। अब ऐसे में नीरव अगर ऐसा बहाना बनाता है तो उसकी बात नहीं मानी जाएगी। वैसे उसके वकील ने बुधवार को कोर्ट में संकेत दिया था कि नीरव इन तर्कों के साथ अपने मामले की सुनवाई को लंबा खिंचवाने की कोशिश करेगा। उसने कहा कि नीरव तर्क देगा कि उसका मामला राजनीति से प्रेरित है और भारत में जेलों की स्थिति उसके मानवाधिकार का उल्लंघन करेगी और उसे भारत में उचित ट्रायल का मौका नहीं मिलेगा। इसको भी पढ़ें: PNB केस: नीरव मोदी लंदन में अरेस्ट, बेल नहीं नीरव के प्रत्यर्पण के लिए यूके को पिछले साल 31 जुलाई को आग्रह भेजा गया था। उस आग्रह के साथ अलग-अलग देशों में फैली उसकी अवैध गतिविधियों के साक्ष्य भी थे। आर्मेनिया, बेल्जियम, चीन, फ्रांस, जापान, मलयेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, यूएस, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर और स्विटरजलैंड में उसके काले कारनामों का सबूत दिया जा चुका है। इससे तेज ट्रायल संभव हो पाएगा। माल्या के मामले में ट्रायल लंबा खिंच गया। 4 दिसंबर, 2017 को उसके मामले में ट्रायल शुरू हुआ। इससे पहले कई अन्य अदालती प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। 12 सितंबर, 2018 को उसका ट्रायल पूरा हुआ। ट्रायल के बाद 10 दिसंबर, 2018 को फैसला आया। इस साल 3 फरवरी को यूके के गृह सचिव साजिद जाविद ने माल्या के प्रत्यर्पण पर हस्ताक्षर कर दिया। 14 फरवरी को माल्या ने प्रत्यर्पण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। अभी तक उस पर फैसला नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने संकेत दिया है कि उसमें महीनों लग सकते हैं। वहीं नीरव के मामले में ऐसा नहीं है। प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रियाअधिकारियों ने प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले केस मैनेजमेंट हीयरिंग होगी। उसमें यूके की क्राउन प्रॉजिक्यूशन सर्विस प्रत्यर्पण के लिए जल्द सुनवाई की मांग करेगी। उसके बाद जज अलग-अलग सुनवाई के लिए तारीखे देगा। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जज को मामले से अवगत कराया जाएगा। फिर आरोपी की ओर से अपने बचाव में साक्ष्य पेश करना होगा जिसकी कोर्ट समीक्षा करेगा। बचाव के साक्ष्यों पर कोर्ट भारतीय अथॉरिटीज का रिस्पॉन्स जानेगा। फिर बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिए जाएंगे। इस सबके बाद प्रत्यर्पण के लिए आखिरी सुनवाई की तारीख कोर्ट की ओर से तय की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इन सारी प्रक्रियाओं में छह महीने से ज्यादा का समय नहीं लगेगा। इसको भी पढ़ें: बैंक में खाता खुलवाते समय धरा गया नीरव मोदी यूं तेज होगी सुनवाईअधिकारियों ने बताया कि ईडी की पूरक चार्जशीट समेत अतिरक्त साक्ष्य कोर्ट को सौंपे जाएंगे। नए कानून के मुताबिक उसे भगोड़ा आर्थिक अपराध घोषित करने का दस्तावेज भी यूके के साथ शेयर किया जाएगा। सीबीआई और ईडी की एक जॉइंट टीम जल्द लंदन का दौरा करेगी और क्राउन प्रॉजिक्यूशन सर्विस को मामले से अवगत कराएगी। सीपीएस यूके की अदालत में भारत की पैरवी करेगी। यूके के सीरियस फ्रॉड ऑफिस ने नीरव मोदी के मामले में पिछले साल स्वतंत्र जांच की थी। उसकी पूरी जानकारी भी प्रत्यर्पण की सुनवाई के दौरान साझा की जाएगी। इन सब साक्ष्यों के आधार पर उसके मामले में तेज सुनवाई होगी। नीरव मोदी की पत्नी अमी मोदी के खिलाफ भी एक नॉन बेलेबल वॉरंट जारी किया गया है। इससे अमी मोदी के यूएस से भारत प्रत्यर्पण का मामला मजबूत होगा। इसको भी पढ़ें: जारी है मेहुल चोकसी को भारत लाने की प्रक्रिया.
नीरज चौहान/प्रदीप ठाकुर, नई दिल्ली सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को उम्मीद है कि नीरव मोदी के इंग्लैंड से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज होगी। इसमें उतना समय नहीं लगेगा जितना विजय माल्या के मामले में लगा। माल्या पर 9 हजार करोड़ रुपये की अदायगी नहीं करने का मामला है जबकि नीरव पर 13 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला है। विजय माल्या के मुकाबले उसका केस ज्यादा मजबूत है। जांच एजेंसियों का कहना है कि माल्या पर सिर्फ बैंकों का पैसा न चुकाने का मामला था जबकि नीरव पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग दोनों का मामला है। इसके अलावा वह अपने मामले को राजनीति से प्रेरित और भारतीय जेल में अमानवीय स्थिति होने का बहाना भी नहीं बना सकता है। माल्या के मामले में कोर्ट इन दोनों आरोपों को पहले ही खारिज कर चुका है। आइए जानते हैं माल्या के मुकाबले नीरव का केस कैसे मजबूत है और उसका जल्द प्रत्यर्पण कैसे मुमकिन हो सकता है। नीरव मोदी के खिलाफ सीबीआई और ईडी पहले ही विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर चुके हैं। उसमें फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स जारी करने का दस्तावेजी साक्ष्य है। इसके अलावा उसके ईमेल संवाद का भी ब्यौरा है। किस तरह उसने यूके समेत कम से कम 15 देशों में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया और बैंक ट्रांसफर से संबंधित साक्ष्य भी मुहैया कराए गए हैं। यूके की अथॉरिटीज को भी ये दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। पंजाब नैशनल बैंक को उसने कथित तौर पर जो 7,000 करोड़ का चूना लगाया है, उसमें से 6,400 करोड़ रुपये का घपला साबित हो चुका है। भारत में उसकी 1,873 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है। विदेश में जब्त होने वाली संपत्ति की अनुमानित कीमत 970 करोड़ रुपये है। माल्या की तरह राजनीति से प्रेरित होने का बहाना नहीं बना सकता18 अप्रैल, 2017 को माल्या की गिरफ्तारी हुई थी। उसने बहाना बनाया था कि उसका मामला राजनीति से प्रेरित है और भारतीय जेलों की स्थिति अच्छी नहीं है। इन दोनों तर्कों को यूके की अदालत ने खारिज कर दिया था। अब ऐसे में नीरव अगर ऐसा बहाना बनाता है तो उसकी बात नहीं मानी जाएगी। वैसे उसके वकील ने बुधवार को कोर्ट में संकेत दिया था कि नीरव इन तर्कों के साथ अपने मामले की सुनवाई को लंबा खिंचवाने की कोशिश करेगा। उसने कहा कि नीरव तर्क देगा कि उसका मामला राजनीति से प्रेरित है और भारत में जेलों की स्थिति उसके मानवाधिकार का उल्लंघन करेगी और उसे भारत में उचित ट्रायल का मौका नहीं मिलेगा। इसको भी पढ़ें: PNB केस: नीरव मोदी लंदन में अरेस्ट, बेल नहीं नीरव के प्रत्यर्पण के लिए यूके को पिछले साल 31 जुलाई को आग्रह भेजा गया था। उस आग्रह के साथ अलग-अलग देशों में फैली उसकी अवैध गतिविधियों के साक्ष्य भी थे। आर्मेनिया, बेल्जियम, चीन, फ्रांस, जापान, मलयेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, यूएस, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर और स्विटरजलैंड में उसके काले कारनामों का सबूत दिया जा चुका है। इससे तेज ट्रायल संभव हो पाएगा। माल्या के मामले में ट्रायल लंबा खिंच गया। 4 दिसंबर, 2017 को उसके मामले में ट्रायल शुरू हुआ। इससे पहले कई अन्य अदालती प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। 12 सितंबर, 2018 को उसका ट्रायल पूरा हुआ। ट्रायल के बाद 10 दिसंबर, 2018 को फैसला आया। इस साल 3 फरवरी को यूके के गृह सचिव साजिद जाविद ने माल्या के प्रत्यर्पण पर हस्ताक्षर कर दिया। 14 फरवरी को माल्या ने प्रत्यर्पण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। अभी तक उस पर फैसला नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने संकेत दिया है कि उसमें महीनों लग सकते हैं। वहीं नीरव के मामले में ऐसा नहीं है। प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रियाअधिकारियों ने प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले केस मैनेजमेंट हीयरिंग होगी। उसमें यूके की क्राउन प्रॉजिक्यूशन सर्विस प्रत्यर्पण के लिए जल्द सुनवाई की मांग करेगी। उसके बाद जज अलग-अलग सुनवाई के लिए तारीखे देगा। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जज को मामले से अवगत कराया जाएगा। फिर आरोपी की ओर से अपने बचाव में साक्ष्य पेश करना होगा जिसकी कोर्ट समीक्षा करेगा। बचाव के साक्ष्यों पर कोर्ट भारतीय अथॉरिटीज का रिस्पॉन्स जानेगा। फिर बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिए जाएंगे। इस सबके बाद प्रत्यर्पण के लिए आखिरी सुनवाई की तारीख कोर्ट की ओर से तय की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इन सारी प्रक्रियाओं में छह महीने से ज्यादा का समय नहीं लगेगा। इसको भी पढ़ें: बैंक में खाता खुलवाते समय धरा गया नीरव मोदी यूं तेज होगी सुनवाईअधिकारियों ने बताया कि ईडी की पूरक चार्जशीट समेत अतिरक्त साक्ष्य कोर्ट को सौंपे जाएंगे। नए कानून के मुताबिक उसे भगोड़ा आर्थिक अपराध घोषित करने का दस्तावेज भी यूके के साथ शेयर किया जाएगा। सीबीआई और ईडी की एक जॉइंट टीम जल्द लंदन का दौरा करेगी और क्राउन प्रॉजिक्यूशन सर्विस को मामले से अवगत कराएगी। सीपीएस यूके की अदालत में भारत की पैरवी करेगी। यूके के सीरियस फ्रॉड ऑफिस ने नीरव मोदी के मामले में पिछले साल स्वतंत्र जांच की थी। उसकी पूरी जानकारी भी प्रत्यर्पण की सुनवाई के दौरान साझा की जाएगी। इन सब साक्ष्यों के आधार पर उसके मामले में तेज सुनवाई होगी। नीरव मोदी की पत्नी अमी मोदी के खिलाफ भी एक नॉन बेलेबल वॉरंट जारी किया गया है। इससे अमी मोदी के यूएस से भारत प्रत्यर्पण का मामला मजबूत होगा। इसको भी पढ़ें: जारी है मेहुल चोकसी को भारत लाने की प्रक्रिया
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