Supreme Court on Air Pollution: दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट अहम टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठ सकते। स्वतः संज्ञान लेते हुए सीजेआई ने कहा कि हम इसकी नियमित सुनवाई करेंगे। जानें पूरा...
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एयर पॉल्यूशन के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए दो टूक कहा कि परानी जलाने पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम पराली जलाने को लेकर टिप्पणी नहीं करना चाहते। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली में खराब एयर क्वालिटी और पॉल्यूशन के मुद्दे को हर साल आने वाली एक रस्म की तरह नहीं देखा जा सकता। दिल्ली में प्रदूषण के मामले को अक्टूबर में बस लिस्ट करके नहीं छोड़ा जा सकता, हम इसकी नियमित सुनवाई करेंगे। हमने यह भी देखा है कि जब इस मामले की सुनवाई हुई तो हवा की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है।सीजेआई की एयर पॉल्यूशन पर दो टूकसीजेआई सूर्यकांत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्र सरकार से कहा कि हम में से कोई भी खाली नहीं बैठ सकता। हम यह नहीं मान सकते कि इस समस्या का कोई हल नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने CAQM से अपनी छोटी और लंबी अवधि की योजनाओं को पेश करने के लिए कहा है। साथ ही, अब तक उठाए गए कदमों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने को भी कहा।CAQM से शीर्ष कोर्ट के सवालसीजेआई ने आयोग से पूछा कि खुद से एक सवाल पूछिए, क्या आपकी कार्य योजना ने स्थिति को सुधारा है? उन्होंने आयोग को यह सोचने के लिए कहा कि क्या एक्शन प्लान से उनकी उम्मीदें पूरी हुई हैं। अगर आपकी कार्य योजना अप्रभावी रही है, तो शायद आपको किसी वैकल्पिक उपाय के बारे में सोचना होगा।पराली जलाने का भी उठा मुद्दाअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि CAQM ने हर राज्य सरकार से सलाह ली है और पराली जलाने, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे मुख्य कारणों पर विस्तृत कार्य योजनाएं तैयार की हैं। उन्होंने माना कि कार्यान्वयन की आवश्यकता है।पराली जलाने पर ज्यादा ध्यान देना गलत: SCशीर्ष कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि पराली जलाने पर बहुत ज्यादा ध्यान देना गलत है। सीजेआई ने कहा कि हम पराली जलाने पर टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि उन लोगों पर बोझ डालना आसान है जिनका हमारे सामने कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। यह एक ऐसी चीज बन गई है जिस पर आप आसानी से दोष मढ़ सकते हैं। कोरोना काल के दौरान हुए बड़े बदलावों की ओर इशारा करते हुए बेंच ने पूछा कि कोविड के समय में भी पराली जल रही थी, फिर भी आसमान नीला क्यों था? किसी को इसका जवाब देना होगा।कोरोना काल का जिक्र कर सीजेआई की दो टूक सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अन्य गतिविधियां, खासकर गाड़ियों का चलना और निर्माण कार्य, रुक गए थे। इससे यह पता चलता है कि दिल्ली की जहरीली हवा का सबसे बड़ा कारण क्या है, इसकी पहचान करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पराली जलाने के मुद्दे को राजनीति का खेल या अहंकार का सवाल नहीं बनाना चाहिए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि किसानों को सिर्फ दोष देने के बजाय उन्हें समझाया-बुझाया जाना चाहिए और उन्हें जरूरी मशीनें भी दी जानी चाहिए।.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एयर पॉल्यूशन के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए दो टूक कहा कि परानी जलाने पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम पराली जलाने को लेकर टिप्पणी नहीं करना चाहते। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली में खराब एयर क्वालिटी और पॉल्यूशन के मुद्दे को हर साल आने वाली एक रस्म की तरह नहीं देखा जा सकता। दिल्ली में प्रदूषण के मामले को अक्टूबर में बस लिस्ट करके नहीं छोड़ा जा सकता, हम इसकी नियमित सुनवाई करेंगे। हमने यह भी देखा है कि जब इस मामले की सुनवाई हुई तो हवा की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है।सीजेआई की एयर पॉल्यूशन पर दो टूकसीजेआई सूर्यकांत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्र सरकार से कहा कि हम में से कोई भी खाली नहीं बैठ सकता। हम यह नहीं मान सकते कि इस समस्या का कोई हल नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने CAQM से अपनी छोटी और लंबी अवधि की योजनाओं को पेश करने के लिए कहा है। साथ ही, अब तक उठाए गए कदमों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने को भी कहा।CAQM से शीर्ष कोर्ट के सवालसीजेआई ने आयोग से पूछा कि खुद से एक सवाल पूछिए, क्या आपकी कार्य योजना ने स्थिति को सुधारा है? उन्होंने आयोग को यह सोचने के लिए कहा कि क्या एक्शन प्लान से उनकी उम्मीदें पूरी हुई हैं। अगर आपकी कार्य योजना अप्रभावी रही है, तो शायद आपको किसी वैकल्पिक उपाय के बारे में सोचना होगा।पराली जलाने का भी उठा मुद्दाअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि CAQM ने हर राज्य सरकार से सलाह ली है और पराली जलाने, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे मुख्य कारणों पर विस्तृत कार्य योजनाएं तैयार की हैं। उन्होंने माना कि कार्यान्वयन की आवश्यकता है।पराली जलाने पर ज्यादा ध्यान देना गलत: SCशीर्ष कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि पराली जलाने पर बहुत ज्यादा ध्यान देना गलत है। सीजेआई ने कहा कि हम पराली जलाने पर टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि उन लोगों पर बोझ डालना आसान है जिनका हमारे सामने कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। यह एक ऐसी चीज बन गई है जिस पर आप आसानी से दोष मढ़ सकते हैं। कोरोना काल के दौरान हुए बड़े बदलावों की ओर इशारा करते हुए बेंच ने पूछा कि कोविड के समय में भी पराली जल रही थी, फिर भी आसमान नीला क्यों था? किसी को इसका जवाब देना होगा।कोरोना काल का जिक्र कर सीजेआई की दो टूकसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अन्य गतिविधियां, खासकर गाड़ियों का चलना और निर्माण कार्य, रुक गए थे। इससे यह पता चलता है कि दिल्ली की जहरीली हवा का सबसे बड़ा कारण क्या है, इसकी पहचान करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पराली जलाने के मुद्दे को राजनीति का खेल या अहंकार का सवाल नहीं बनाना चाहिए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि किसानों को सिर्फ दोष देने के बजाय उन्हें समझाया-बुझाया जाना चाहिए और उन्हें जरूरी मशीनें भी दी जानी चाहिए।
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