नीति आयोग की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, 'ऋण स्थिरता' ने मप्र की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है, जिससे राज्य 18 बड़े राज्यों में सबसे निचले 2.
राज्य ब्यूरो भोपाल। 'ऋण स्थिरता' ने मध्य प्रदेश की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है। नीति आयोग द्वारा गुरुवार को जारी वित्तीय वर्ष 2023-24 की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार यह स्कोर 2.2 है जो देश के 18 बड़े राज्यों में सबसे कम है। इसका मतलब यह है कि राज्य की अर्थव्यवस्था की वृद्धि और ब्याज भुगतान के बीच अंतर बहुत कम है। इससे कर्ज को संभालना मुश्किल हो सकता है। ऋण स्थिरता सूचकांक में अंक जितने अच्छे रहते हैं, उसमें यह माना जाता है कि कर्ज चुकाना राज्य के लिए उतना ही आसान है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश की औसत रैंकिंग एक अंक गिरकर नौवें से 10वें क्रम पर आ गई है। राज्य का स्कोर 37.
8 है। सबसे अच्छी स्थिति में 73.1 अंक के साथ ओडिशा है। इसके बाद क्रमश: गोवा और झारखंड हैं, जबकि सबसे खराब स्थिति में पंजाब 18वें पायदान पर है। बता दें कि प्रदेश सरकार पर पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि राज्य का वर्ष 2026-27 का कुल बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये है। खर्च गुणवत्ता में बेहतर दूसरी ओर खर्च की गुणवत्ता के मामले में मध्य प्रदेश अच्छी स्थिति में है। इसमें प्रदेश सबसे अच्छी स्थिति वाले राज्यों में 60.8 अंक के साथ तीसरे नंबर पर है। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार पैसा पूंजीगत क्षेत्र और विकासात्मक गतिविधियों में खर्च कर रही है। इस मोर्चे पर है चुनौती रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है की विकासात्मक कार्यों पर खर्च तो अधिक हो रहा है, लेकिन प्रतिबद्ध खर्च जैसे वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान आदि राजस्व आय की तुलना में अधिक होने के कारण वित्तीय स्थिति को अच्छा नहीं माना जा रहा है। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश को परफॉर्मर की श्रेणी में रखा गया है। बता दें कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब नीति आयोग ने एफएचआई जारी किया है। साल 2025 में जारी वित्तीय वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश 42 अंकों के साथ नौवें पायदान पर था, इस बार रैंकिंग में एक अंक गिरकर दसवें नंबर पर आ गया है। पिछले सूचकांक के मुकाबले स्थिति कहां बिगड़ी, कहां सुधरी सूचकांक -- वर्ष 2023-24 -- 2022--23खर्च की गुणवत्ता -- 60.8 -- 59.7रेवेन्यू मोबिलाइजेशन -- 32.0 -- 27.6राजकोषीय अनुशासन -- 35.1 -- 35.6डेब्ट इंडेक्स -- 58.9 -- 59.7 इन आधारों पर तैयार होती है रिपोर्ट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स एक समग्र सूचकांक है जो राज्यों की वित्तीय स्थिति और प्रदर्शन का पांच प्रमुख संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन करता है। पहला है व्यय की गुणवत्ता। दूसरा, राजस्व संकलन यानी राज्य अपनी आय कर और गैर-कर स्रोतों से कितनी अच्छी तरह जुटा पा रहा है और केंद्र पर उसकी निर्भरता कितनी है। राजकोषीय अनुशासन बताता है कि वित्त का प्रबंधन कैसा है, जैसे राजकोषीय और राजस्व घाटा। ऋण सूचकांक यह राज्य के कुल कर्ज के स्तर और उसकी अर्थव्यवस्था के मुकाबले उसकी स्थिति का आकलन करता है। ऋण स्थिरता यानी राज्य लंबे समय तक अपने कर्ज का भुगतान और सेवा बिना वित्तीय संकट के कर सकता है या नहीं। यह भी पढ़ें- MP में साढ़े सात लाख कर्मचारियों की बनेगी 'डिजिटल कुंडली', ज्वाइनिंग से रिटायरमेंट तक पूरा रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन विकास के लिए पूंजीगत व्यय सर्वोच्च प्राथमिकता : देवड़ा रिपोर्ट को लेकर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। प्रदेश की राजकोषीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश ने वर्ष 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जो मजबूत कर-संग्रह और राज्य के अपने राजस्व स्रोतों में वृद्धि का परिणाम है। इसके अनुसार राज्य की राजस्व प्राप्तियां सकल राज्य घरेलू उत्पाद की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की प्रभावी वसूली के कारण संभव हुई है। सरकार विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कीर्तिमान होगा।
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