दो राजवंशों के बीच की रंजिश, 33 सालों की दोस्ती के बाद गुत्थमगुत्था... थाईलैंड और कंबोडिया के बीच की लड़ाई की असल कहानी

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दो राजवंशों के बीच की रंजिश, 33 सालों की दोस्ती के बाद गुत्थमगुत्था... थाईलैंड और कंबोडिया के बीच की लड़ाई की असल कहानी
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एक वक्त था जब थाईलैंड के थाकसिन और कंबोडिया के हुन सेन की दोस्ती काफी मशहूर थी। माना जाता था कि दोनों देशों के बीच विवाद के बावजूद दोनों की दोस्ती की वजह से लड़ाई नहीं होगी और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनी रहेगी। लेकिन थाकसिन की बेटी के फोन कॉल ने सबकुछ बदल कर रख...

बैंकॉक/नोम पेन्ह: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पिछले चार दिनों से लड़ाई जारी है। दोनों देशों के बीच का दशकों पुराना विवाद अब गोलीबारी में बदल चुकी है। दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और दोनों देश एक दूसरे की जान के दुश्मन बन चुके हैं। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लड़ाई की ये कहानी भले ही सीमा विवाद को लेकर हो, लेकिन असल में ये लड़ाई दो राजवंशों के बीच की रंजिश की है। इस महीने की पहली तारीख को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन को टेलीफोन किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न ने कंबोडियाई नेता को 'अंकल' कहकर संबोधित किया था। इसके बाद थाईलैंड में बवाल मचा और देश की संवैधानिक अदालत ने उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दिया।इस घटना के बाद थाईलंड के दिग्गज नेता थाकसिन शिनावात्रा ने राजनेताओं और पत्रकारों से भरे कमरे में चौंकाने वाला संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि 'कंबोडियाई तानाशाह हुन सेन के साथ उनका दशकों पुराना रिश्ता खत्म हो गया है।' थाकसिन शिनावात्रा, प्रधानमंत्री पद से हटाई गईं पैतोंगतार्न शिनावात्रा के पिता हैं। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि 'मैं उनके बहुत करीब था, भाइयों की तरह। लेकिन उन्होंने मेरी बेटी के साथ जो किया, उसके बाद मैं स्तब्ध रह गया। ऐसा कैसे हो सकता है?' यानि ये झगड़ा सिर्फ सीमा को लेकर नहीं है, बल्कि थाईलैंड के अरबपति नेता और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा और कंबोडियाई पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन के बीच की रंजिश की है।टूट गई 33 सालों की दोस्ती, सरहद पर बरस रहे बमएक वक्त था जब थाईलैंड के थाकसिन और कंबोडिया के हुन सेन की दोस्ती काफी मशहूर थी। माना जाता था कि दोनों देशों के बीच विवाद के बावजूद दोनों की दोस्ती की वजह से लड़ाई नहीं होगी और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनी रहेगी। लेकिन थाकसिन की बेटी के फोन कॉल ने सबकुछ बदल कर रख दिया। दरअसल, उस टेलीफोन कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग को हुन सेन ने फेसबुक पर पोस्ट कर दिया, जिसमें पैतोंगतार्न उन्हें 'अंकल' कहकर संबोधित कर रहीं थी और उनके बातचीत के अंदाज से ऐसा लग रहा था कि वो बातचीत को भावनात्मक बनाकर विवाद सुलझाना चाहती थीं। इस दौरान उन्होंने थाईलैंड सेना को भी नजरअंदाज किया। लेकिन ऑडियो फेसबुक पर आते ही बवाल मच गया। प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न को इस्तीफा देना पड़ा और उनके पिता ने सार्वजनिक तौर पर कंबोडियाई नेता से संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया। थाकसिन और हुन सेन, अपने अपने देश के दिग्गज नेता रहे हैं और उनके बच्चे भी एक ही साल के अंतराल में देश की सत्ता में पहुंच गये।लेकिन ऑडियो लीक होने के बाद सबकुछ बदल गया। दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे के खिलाफ जहर उगले। थाकसिन ने कहा कि वो थाईलैंड सेना को हुन सेन को सबक सिखाने का मौका देना चाहते हैं। जिसपर हुन सेन ने उनके बयान को 'युद्ध की आग भड़काने' वाला बताया। थाईलैंड और कंबोडिया की राजनीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि हुन सेन, थाईलैंड की राजनीति में चल रही अस्थिरता का लाभ उठाकर अपने बेटे और वर्तमान प्रधानमंत्री हुन मानेट की राष्ट्रवादी छवि को मजबूत करना चाहते हैं। वहीं थाकसिन के खिलाफ राजद्रोह का मामला चल रहा है, जिसने उनकी राजनीतिक पकड़ को कमजोर कर दिया है। उनका 2023 में स्वदेश लौटना और मिलिटरी-रॉयल गठजोड़ से समझौता करना भी उनके पारंपरिक समर्थकों में नाराजगी की वजह बना है।राजवंशों की रंजिश का नतीजा है युद्ध?थाईलैंड के पूर्व विदेश मंत्री कासित पिरोम्या ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा कि 'दोनों परिवारों की आकांक्षाएं और धन-संपत्ति का सपना साकार नहीं हुआ है।' उन्होंने कहा की हुन सेन शायद इसे थाकसिन की नाकामी मानते थे। हुन सेन अपने देश पर पूर्ण नियंत्रण रखते थे और वे अपने वादे को पूरा कर सकते थे। लेकिन थाकसिन पिछले 20 वर्षों से थाई समाज पर अपनी चमक और नियंत्रण खोते जा रहे हैं।' इसके अलावा थाकसिन ने हाल ही में कंबोडिया की सीमा से सटे इलाकों में कैसीनो और ऑनलाइन स्कैम हब्स के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी और खुद एक ऐसे इंटरटेनमेंट कॉम्प्लेक्स की योजना की बात की, जो कंबोडियाई कैसीनो उद्योग को चुनौती दे सकता था। यह कदम हुन सेन के लिए सीधा आर्थिक और रणनीतिक खतरा बन गया, जिससे तनाव और गहरा गया।विवाद की एक और वजह 11वीं सदी में बना प्रीह विहार मंदिर और उसके आस-पास की जमीन है, जिसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने 1962 में कंबोडिया को सौंप दिया था। लेकिन थाईलैंड अब भी इसके आसपास के क्षेत्रों पर दावा करता है। 2008 और 2011 में भी इसी विवाद को लेकर दोनों देशों में झड़पें हो चुकी हैं। अब, जब व्यक्तिगत कटुता, राजनीतिक अस्थिरता और ऐतिहासिक विवाद आपस में गुत्थमगुत्था हो चुके हैं, दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है।.

बैंकॉक/नोम पेन्ह: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पिछले चार दिनों से लड़ाई जारी है। दोनों देशों के बीच का दशकों पुराना विवाद अब गोलीबारी में बदल चुकी है। दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और दोनों देश एक दूसरे की जान के दुश्मन बन चुके हैं। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लड़ाई की ये कहानी भले ही सीमा विवाद को लेकर हो, लेकिन असल में ये लड़ाई दो राजवंशों के बीच की रंजिश की है। इस महीने की पहली तारीख को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन को टेलीफोन किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न ने कंबोडियाई नेता को 'अंकल' कहकर संबोधित किया था। इसके बाद थाईलैंड में बवाल मचा और देश की संवैधानिक अदालत ने उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दिया।इस घटना के बाद थाईलंड के दिग्गज नेता थाकसिन शिनावात्रा ने राजनेताओं और पत्रकारों से भरे कमरे में चौंकाने वाला संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि 'कंबोडियाई तानाशाह हुन सेन के साथ उनका दशकों पुराना रिश्ता खत्म हो गया है।' थाकसिन शिनावात्रा, प्रधानमंत्री पद से हटाई गईं पैतोंगतार्न शिनावात्रा के पिता हैं। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि 'मैं उनके बहुत करीब था, भाइयों की तरह। लेकिन उन्होंने मेरी बेटी के साथ जो किया, उसके बाद मैं स्तब्ध रह गया। ऐसा कैसे हो सकता है?' यानि ये झगड़ा सिर्फ सीमा को लेकर नहीं है, बल्कि थाईलैंड के अरबपति नेता और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा और कंबोडियाई पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन के बीच की रंजिश की है।टूट गई 33 सालों की दोस्ती, सरहद पर बरस रहे बमएक वक्त था जब थाईलैंड के थाकसिन और कंबोडिया के हुन सेन की दोस्ती काफी मशहूर थी। माना जाता था कि दोनों देशों के बीच विवाद के बावजूद दोनों की दोस्ती की वजह से लड़ाई नहीं होगी और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनी रहेगी। लेकिन थाकसिन की बेटी के फोन कॉल ने सबकुछ बदल कर रख दिया। दरअसल, उस टेलीफोन कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग को हुन सेन ने फेसबुक पर पोस्ट कर दिया, जिसमें पैतोंगतार्न उन्हें 'अंकल' कहकर संबोधित कर रहीं थी और उनके बातचीत के अंदाज से ऐसा लग रहा था कि वो बातचीत को भावनात्मक बनाकर विवाद सुलझाना चाहती थीं। इस दौरान उन्होंने थाईलैंड सेना को भी नजरअंदाज किया। लेकिन ऑडियो फेसबुक पर आते ही बवाल मच गया। प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न को इस्तीफा देना पड़ा और उनके पिता ने सार्वजनिक तौर पर कंबोडियाई नेता से संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया। थाकसिन और हुन सेन, अपने अपने देश के दिग्गज नेता रहे हैं और उनके बच्चे भी एक ही साल के अंतराल में देश की सत्ता में पहुंच गये।लेकिन ऑडियो लीक होने के बाद सबकुछ बदल गया। दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे के खिलाफ जहर उगले। थाकसिन ने कहा कि वो थाईलैंड सेना को हुन सेन को सबक सिखाने का मौका देना चाहते हैं। जिसपर हुन सेन ने उनके बयान को 'युद्ध की आग भड़काने' वाला बताया। थाईलैंड और कंबोडिया की राजनीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि हुन सेन, थाईलैंड की राजनीति में चल रही अस्थिरता का लाभ उठाकर अपने बेटे और वर्तमान प्रधानमंत्री हुन मानेट की राष्ट्रवादी छवि को मजबूत करना चाहते हैं। वहीं थाकसिन के खिलाफ राजद्रोह का मामला चल रहा है, जिसने उनकी राजनीतिक पकड़ को कमजोर कर दिया है। उनका 2023 में स्वदेश लौटना और मिलिटरी-रॉयल गठजोड़ से समझौता करना भी उनके पारंपरिक समर्थकों में नाराजगी की वजह बना है।राजवंशों की रंजिश का नतीजा है युद्ध?थाईलैंड के पूर्व विदेश मंत्री कासित पिरोम्या ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा कि 'दोनों परिवारों की आकांक्षाएं और धन-संपत्ति का सपना साकार नहीं हुआ है।' उन्होंने कहा की हुन सेन शायद इसे थाकसिन की नाकामी मानते थे। हुन सेन अपने देश पर पूर्ण नियंत्रण रखते थे और वे अपने वादे को पूरा कर सकते थे। लेकिन थाकसिन पिछले 20 वर्षों से थाई समाज पर अपनी चमक और नियंत्रण खोते जा रहे हैं।' इसके अलावा थाकसिन ने हाल ही में कंबोडिया की सीमा से सटे इलाकों में कैसीनो और ऑनलाइन स्कैम हब्स के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी और खुद एक ऐसे इंटरटेनमेंट कॉम्प्लेक्स की योजना की बात की, जो कंबोडियाई कैसीनो उद्योग को चुनौती दे सकता था। यह कदम हुन सेन के लिए सीधा आर्थिक और रणनीतिक खतरा बन गया, जिससे तनाव और गहरा गया।विवाद की एक और वजह 11वीं सदी में बना प्रीह विहार मंदिर और उसके आस-पास की जमीन है, जिसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने 1962 में कंबोडिया को सौंप दिया था। लेकिन थाईलैंड अब भी इसके आसपास के क्षेत्रों पर दावा करता है। 2008 और 2011 में भी इसी विवाद को लेकर दोनों देशों में झड़पें हो चुकी हैं। अब, जब व्यक्तिगत कटुता, राजनीतिक अस्थिरता और ऐतिहासिक विवाद आपस में गुत्थमगुत्था हो चुके हैं, दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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