दाना-पानी: घरेलू जलपान

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होली बीत चुकी है, पर होली के बाद भी कई दिनों तक लोगों का मिलने-जुलने आना लगा रहता है। इसलिए घर में पकवान का सिलसिला बना रहता है। यों भी मेहमानों के आने पर उनके जलपान वगैरह के लिए कुछ चीजें बना कर रखनी ही पड़ती हैं। बहुत सारे लोग बाजार से मिठाइयां, नमकीन वगैरह मंगा कर रखते हैं। पर जब वे चीजें घर में आसानी से बनाई जा सकती हैं, तो बाजार पर निर्भर क्यों रहना। इस बार घर में बनाते हैं बाजार से भी अच्छी मिठाई और नमकीन।

घर में मेहमान आते हैं तो चाय के साथ नमकीन, बिस्किट, मट्ठियां वगैरह अवश्य परोसी जाती हैं। मट्ठियां बनाना सबसे आसान है। इन्हें बना कर डिब्बे में बंद करके रख लें, हफ्ते-दस दिन तक खराब नहीं होतीं। मट्ठियां दो तरह की बनती हैं- मीठी और नमकीन। कुछ लोग फीकी मट्ठियां भी बनाते हैं, जिन्हें अचार के साथ खाया जाता है। इन्हें बनाने के अनेक तरीके हैं। बाजार में बनी मट्ठियां आमतौर पर मैदे से बनी होती हैं। पर आप सूजी और आटे की मट्ठियां बनाएं, ये बाजार की मट्ठियों से कहीं ज्यादा स्वादिष्ट होती हैं। ये खस्ता और लंबे समय तक कुरकुरी भी बनी रहती हैं। सूजी की मट्ठी बनाने के लिए अगर एक कप सूजी लेते हैं तो उसमें चौथाई कप सामान्य रोटी बनाने वाला आटा मिला सकते हैं। आटा न भी मिलाएं, तो कोई दिक्तत नहीं। मट्ठी बनाने के लिए सूजी महीन वाली लें। अगर सूजी मोटी है, तो आटा जरूर मिला लें, नहीं तो मट्ठी के फटने की आशंका रहेगी। नमकीन मट्ठी बनाने के लिए सूजी और आटे को मिला लें और इसमें स्वाद के अनुसार नमक डालें। एक बड़ा चम्मच अजवाइन और अगर आपको पसंद हो, तो इतनी ही मात्रा में कसूरी मेथी भी डालें। जितनी मात्रा सूजी की ली है, उसकी चौथाई मात्रा घी या तेल लें और सूजी में मिला कर दोनों हाथों से रगड़ते हुए सारी सामग्री को मिला लें। अब गुनगुने पानी से सूजी को गूथें। पानी थोड़ा-थोड़ा करके डालें और गूंथते जाएं। सूजी को बहुत पतला नहीं गूंथना है। रोटी के लिए जैसा आटा गूंथते हैं, उससे थोड़ा सख्त गूंथें। पर यह भी ध्यान रहे कि सूजी पानी सोखती है, इसलिए इतना भी सख्त न रहे कि बेलने में दिक्कत आए। गूंथने के बाद आटे को कम से कम बीस मिनट तक ढक कर रख दें, ताकि सूजी पूरी तरह पानी सोख कर फूल जाए। इसी तरह अगर आप मीठी मट्ठी बनाना चाहते हैं, तो सूजी में आटे का बिल्कुल इस्तेमाल न करें। इसमें अजवाइन और कसूरी मेथी के बजाय काजू और पिस्ता को बारीक काट कर डालें। गूंथने के लिए मोयन के तौर पर तेल के बजाय घी का इस्तेमाल करें, तो ज्यादा स्वादिष्ट मट्ठियां बनेंगी। इसे गूंथने के लिए जितनी सूजी ली है उसकी चौथाई मात्रा चीनी लें और एक कप गरम दूथ में डाल कर उसे गला लें। सूजी गूंथने की प्रक्रिया वही है, जो नमकीन मट्ठी में अपनाई थी। मोयन को रगड़ते हुए मिलाएं और फिर थोड़ा-थोड़ा करके चीनी घुला दूध डालते हुए गूंथें। आटे को हमें सख्त रखना है, ताकि मट्ठियां खस्ता बनें। इस आटे को भी कम से कम बीस मिनट तक ढंक कर रख दें। अब आटे को एक बार फिर हाथों से मसलते हुए एकसार कर लें। आटे की बड़ी लोइयां लेकर चकले पर मोटी परत में बेल लें। अब इसमें से मनचाहे आकार देते हुए मट्ठियां काट लें। गोल, तिकोनी, छोटी-बड़ी जैसी चाहें। इनमें फोर्क या टूथपिक से जगह-जगह छेद कर दें। हथेली पर रख कर इनके दोनों तरफ फोर्क से दबा कर निशान बना लें। अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो आंच मद्धिम कर दीजिए और मट्ठियां उनमें डाल कर सुनहरी होने तक पलट-पलट कर सेंकें। इन मट्ठियों को ठंडा होने के बाद डिब्बे में बंद करके रख दें, कई दिन तक खाई जा सकती हैं।बाजार के शक्कर पारे तो आपने खाए होंगे। ये आमतौर पर चावल के आटे या फिर मैदे से बनते हैं। पर बेसन के शक्कर पारे का मजा ही अलग होता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में इन्हें लकठा या लकठो कहा जाता है। इन्हें गुड़ की चाशनी में बनाएं तो गुड़ और चने के बेसन का स्वाद लाजवाब होता है। इसे बनाना बहुत आसान है। एक कप बेसन लें। उसमें चौथाई हिस्सा मोयन के लिए रिफाइंड या तिल का तेल डालें। आधा चम्मच अजवाइन और एक चम्मच सौंफ डालें और सारी चीजों को दोनों हथेलियों से रगड़ते हुए एकसार कर लें। इसमें नमक वगैरह कुछ नहीं डालें। अब गुनगुने पानी का छींटा देते हुए बेसन को गूंथ लें। रोटी के आटे जैसा गूंथें। पंद्रह-बीस मिनट तक ढंक कर रख दें। अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो आंच मध्यम कर दें। लकठो बनाने के लिए अगर आपके पास नमकीन बनाने का सांचा है, तो उसमें गुंथा हुआ बेसन डालें और मोटे आकार के गोल सेव तेल में डालते जाएं। अगर सांचा नहीं है, तो मोटे छेद वाला छनौटा यानी पूड़ियां तलने के लिए जिस झरने का इस्तेमाल करते हैं, उसे लें और उस पर पानी लगा कर बेसन को हथेली से दबाते हुए मोटा सेव बना लें। हल्की आंच पर लकठो को सुनहरा होने तक सेंकें और फिर एक अलग थाली या परात में निकाल लें। ठंडा होने दें। अब एक कड़ाही में जितनी मात्रा में बेसन लिया है उतना ही गुड़ लें, उससे कम मात्रा में पानी लें और उबालते हुए गाढ़ा करें। अंगूठा और अंगुली के बीच में एक बूंद रस डाल कर देखें, अगर एक तार जैसा खिंचने लगा है, तो आंच बंद कर दें। गुड़ के घोल को चलाते हुए ठंडा करें। हल्का गरम रह जाए, तो तले हुए बेसन के लकड़ों के ऊपर इसे डालें और उलट-पलट कर गुड़ की चाशनी को पूरे लकठों में मिला लें। लकठा या लकठो तैयार है। इसे भी कई दिन तक खाया जा सकता है, खराब नहीं होता। Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.

घर में मेहमान आते हैं तो चाय के साथ नमकीन, बिस्किट, मट्ठियां वगैरह अवश्य परोसी जाती हैं। मट्ठियां बनाना सबसे आसान है। इन्हें बना कर डिब्बे में बंद करके रख लें, हफ्ते-दस दिन तक खराब नहीं होतीं। मट्ठियां दो तरह की बनती हैं- मीठी और नमकीन। कुछ लोग फीकी मट्ठियां भी बनाते हैं, जिन्हें अचार के साथ खाया जाता है। इन्हें बनाने के अनेक तरीके हैं। बाजार में बनी मट्ठियां आमतौर पर मैदे से बनी होती हैं। पर आप सूजी और आटे की मट्ठियां बनाएं, ये बाजार की मट्ठियों से कहीं ज्यादा स्वादिष्ट होती हैं। ये खस्ता और लंबे समय तक कुरकुरी भी बनी रहती हैं। सूजी की मट्ठी बनाने के लिए अगर एक कप सूजी लेते हैं तो उसमें चौथाई कप सामान्य रोटी बनाने वाला आटा मिला सकते हैं। आटा न भी मिलाएं, तो कोई दिक्तत नहीं। मट्ठी बनाने के लिए सूजी महीन वाली लें। अगर सूजी मोटी है, तो आटा जरूर मिला लें, नहीं तो मट्ठी के फटने की आशंका रहेगी। नमकीन मट्ठी बनाने के लिए सूजी और आटे को मिला लें और इसमें स्वाद के अनुसार नमक डालें। एक बड़ा चम्मच अजवाइन और अगर आपको पसंद हो, तो इतनी ही मात्रा में कसूरी मेथी भी डालें। जितनी मात्रा सूजी की ली है, उसकी चौथाई मात्रा घी या तेल लें और सूजी में मिला कर दोनों हाथों से रगड़ते हुए सारी सामग्री को मिला लें। अब गुनगुने पानी से सूजी को गूथें। पानी थोड़ा-थोड़ा करके डालें और गूंथते जाएं। सूजी को बहुत पतला नहीं गूंथना है। रोटी के लिए जैसा आटा गूंथते हैं, उससे थोड़ा सख्त गूंथें। पर यह भी ध्यान रहे कि सूजी पानी सोखती है, इसलिए इतना भी सख्त न रहे कि बेलने में दिक्कत आए। गूंथने के बाद आटे को कम से कम बीस मिनट तक ढक कर रख दें, ताकि सूजी पूरी तरह पानी सोख कर फूल जाए। इसी तरह अगर आप मीठी मट्ठी बनाना चाहते हैं, तो सूजी में आटे का बिल्कुल इस्तेमाल न करें। इसमें अजवाइन और कसूरी मेथी के बजाय काजू और पिस्ता को बारीक काट कर डालें। गूंथने के लिए मोयन के तौर पर तेल के बजाय घी का इस्तेमाल करें, तो ज्यादा स्वादिष्ट मट्ठियां बनेंगी। इसे गूंथने के लिए जितनी सूजी ली है उसकी चौथाई मात्रा चीनी लें और एक कप गरम दूथ में डाल कर उसे गला लें। सूजी गूंथने की प्रक्रिया वही है, जो नमकीन मट्ठी में अपनाई थी। मोयन को रगड़ते हुए मिलाएं और फिर थोड़ा-थोड़ा करके चीनी घुला दूध डालते हुए गूंथें। आटे को हमें सख्त रखना है, ताकि मट्ठियां खस्ता बनें। इस आटे को भी कम से कम बीस मिनट तक ढंक कर रख दें। अब आटे को एक बार फिर हाथों से मसलते हुए एकसार कर लें। आटे की बड़ी लोइयां लेकर चकले पर मोटी परत में बेल लें। अब इसमें से मनचाहे आकार देते हुए मट्ठियां काट लें। गोल, तिकोनी, छोटी-बड़ी जैसी चाहें। इनमें फोर्क या टूथपिक से जगह-जगह छेद कर दें। हथेली पर रख कर इनके दोनों तरफ फोर्क से दबा कर निशान बना लें। अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो आंच मद्धिम कर दीजिए और मट्ठियां उनमें डाल कर सुनहरी होने तक पलट-पलट कर सेंकें। इन मट्ठियों को ठंडा होने के बाद डिब्बे में बंद करके रख दें, कई दिन तक खाई जा सकती हैं।बाजार के शक्कर पारे तो आपने खाए होंगे। ये आमतौर पर चावल के आटे या फिर मैदे से बनते हैं। पर बेसन के शक्कर पारे का मजा ही अलग होता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में इन्हें लकठा या लकठो कहा जाता है। इन्हें गुड़ की चाशनी में बनाएं तो गुड़ और चने के बेसन का स्वाद लाजवाब होता है। इसे बनाना बहुत आसान है। एक कप बेसन लें। उसमें चौथाई हिस्सा मोयन के लिए रिफाइंड या तिल का तेल डालें। आधा चम्मच अजवाइन और एक चम्मच सौंफ डालें और सारी चीजों को दोनों हथेलियों से रगड़ते हुए एकसार कर लें। इसमें नमक वगैरह कुछ नहीं डालें। अब गुनगुने पानी का छींटा देते हुए बेसन को गूंथ लें। रोटी के आटे जैसा गूंथें। पंद्रह-बीस मिनट तक ढंक कर रख दें। अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो आंच मध्यम कर दें। लकठो बनाने के लिए अगर आपके पास नमकीन बनाने का सांचा है, तो उसमें गुंथा हुआ बेसन डालें और मोटे आकार के गोल सेव तेल में डालते जाएं। अगर सांचा नहीं है, तो मोटे छेद वाला छनौटा यानी पूड़ियां तलने के लिए जिस झरने का इस्तेमाल करते हैं, उसे लें और उस पर पानी लगा कर बेसन को हथेली से दबाते हुए मोटा सेव बना लें। हल्की आंच पर लकठो को सुनहरा होने तक सेंकें और फिर एक अलग थाली या परात में निकाल लें। ठंडा होने दें। अब एक कड़ाही में जितनी मात्रा में बेसन लिया है उतना ही गुड़ लें, उससे कम मात्रा में पानी लें और उबालते हुए गाढ़ा करें। अंगूठा और अंगुली के बीच में एक बूंद रस डाल कर देखें, अगर एक तार जैसा खिंचने लगा है, तो आंच बंद कर दें। गुड़ के घोल को चलाते हुए ठंडा करें। हल्का गरम रह जाए, तो तले हुए बेसन के लकड़ों के ऊपर इसे डालें और उलट-पलट कर गुड़ की चाशनी को पूरे लकठों में मिला लें। लकठा या लकठो तैयार है। इसे भी कई दिन तक खाया जा सकता है, खराब नहीं होता। Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

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