अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान में चल रहा अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन जल्द ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में अपनी सेना वापस बुला लेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ईरान में चल रहा अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन बहुत जल्द खत्म कर दिया
जाएगा। अपने बयान में ट्रंप ने आगे कहा कि अगले दो से तीन हफ्तों के अंदर अमेरिकी सेना वहां से निकल सकती है। ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस लेने वाले अन्य देशों जैसे फ्रांस या चीन को अब खुद संभालना होगा। अमेरिका वहां किसी और चीज में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कट्टर और खतरनाक लोगों को नष्ट कर दिया और क्षेत्र अब अपेक्षाकृत सुरक्षित है। तेल की बढ़ती कीमतों पर अपनी बात रखते हुए ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी सरकार ईरान के साथ बातचीत भी कर रही है, लेकिन साथ ही सैन्य कार्रवाई भी जारी है। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि जैसे ही अमेरिका ईरान से बाहर निकलेगा, हालात सुधर जाएंगे और तेल की कीमतें भी गिर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपना काम लगभग पूरा कर चुका है और अगले करीब दो हफ्तों में ऑपरेशन खत्म कर सेना वापस बुला ली जाएगी। इसके अतिरिक्त, ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया कानून पर अमेरिकी कंपनियों के रुख पर भी चर्चा हुई, जिसमें मेटा, स्नैपचैट, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।\अमेरिकी सेना के बाद ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को ईरान से होने वाले खतरे को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को ईरान से कोई बड़ा खतरा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ईरान ने सच में हमला करने या कंपनियों को उड़ाने की धमकी दी है? ट्रंप ने कहा कि ईरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा और वह अमेरिकी कंपनियों पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं कर सकता, क्योंकि उसके पास ऐसे हथियार नहीं हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के ज्यादातर पुराने नेता अब नहीं रहे, जिससे खतरा पहले की तुलना में कम हो गया है। उनके अनुसार हालात अब पहले से ज्यादा नियंत्रण में हैं और चिंता की जरूरत कम है। पोप लियो ने भी पश्चिम एशिया संकट पर शांति की अपील की, जिसमें कहा गया कि यह युद्ध ईस्टर से पहले समाप्त हो सकता है। ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान के साथ समझौता करना जरूरी नहीं है। उनका कहना है कि अब ईरान में नया शासन है, जो पहले से ज्यादा बातचीत के लिए तैयार और आसान है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मकसद सिर्फ इतना है कि ईरान लंबे समय तक परमाणु हथियार न बना सके। अगर यह लक्ष्य पूरा हो जाता है, तो अमेरिका वहां से हट जाएगा, चाहे कोई समझौता हो या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान खुद समझौता करना चाहता है और शायद डील हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले कई वर्षों तक ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा।\ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ईरान फिर से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका दोबारा सख्त कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने ईरान के पुराने नेताओं को कट्टर और खतरनाक बताया, लेकिन कहा कि मौजूदा नया नेतृत्व पहले से बेहतर और कम कट्टर है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ बातचीत जारी रखी है, लेकिन सैन्य कार्रवाई भी जारी है। उनका मानना है कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखते हुए सैन्य कार्रवाई जारी रखना एक महत्वपूर्ण रणनीति है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का ध्यान ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, और अगर यह लक्ष्य प्राप्त हो जाता है तो अमेरिका वहां से हट जाएगा, चाहे कोई समझौता हो या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और यह क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा। ट्रंप का मानना है कि वर्तमान नेतृत्व के साथ बातचीत करना आसान है और यह एक समझौता करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए प्रतिबद्ध है और वह सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह करता है। ट्रंप का यह बयान पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों का हिस्सा है। उनका मानना है कि अमेरिकी सेना की वापसी से क्षेत्र में स्थिरता आएगी और अन्य देश इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी लेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाने पर विचार कर रहा है, लेकिन यह ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने की अपनी महत्वाकांक्षा को छोड़ने पर निर्भर करेगा
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