ज्यूडिशियल एक्टिविज्म को ज्यूडिशियल टेररिज्म में नहीं बदलना चाहिए... जानें पूर्व CJI गवई ने क्यों कही ये बात

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ज्यूडिशियल एक्टिविज्म को ज्यूडिशियल टेररिज्म में नहीं बदलना चाहिए... जानें पूर्व CJI गवई ने क्यों कही ये बात
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Former Chief Justice BR Gavai: पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि न्यायिक सक्रियता आवश्यक है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं. उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई और कॉलेजियम प्रणाली पर भी बात की.

Former Chief Justice BR Gavai: पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने न्यायिक सक्रियता, बुलडोजर कार्रवाई, कॉलेजियम प्रणाली और अपने कार्यकाल से जुड़े कई पहलुओं से जुड़े सवालों का जवाब दिया. ANI को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व CJI गवई ने कहा कि न्यायिक सक्रियता आवश्यक है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं.

उन्होंने कहा कि जैसा कि हमने डेमोलिशन जजमेंट या बुलडोजर जस्टिस के मामलों में किया था, जब भी हमें लगता है कि कार्यपालिका हद से आगे बढ़ रही है या बिना उचित प्रक्रिया के किसी नागरिक का घर गिरा दिया गया है, वह न सिर्फ अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि कानून को हाथ में लेना भी है. ऐसे मामलों में न्यायिक सक्रियता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए. न्यायपालिका को संवैधानिक मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए: गवई पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि न्यायपालिका को अपनी संवैधानिक मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए. गवई ने कहा कि ज्यूडिशियल एक्टिविज़्म को ज्यूडिशियल टेररिज़्म में नहीं बदलना चाहिए. संविधान तीनों संस्थाओं-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच पावर के विभाजन पर आधारित है. आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों की न्याय तक पहुंच पर उन्होंने कहा कि कई लोग सीधे अदालत नहीं जा पाते. ऐसे में पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन जैसे विकल्प सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में मदद करते हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक सक्रियता हमेशा सीमित दायरे में रहकर ही होनी चाहिए. #WATCH | Delhi: In an interview to ANI, former CJI B.R. Gavai says, ...there are limits within which judicial activism should act. As I always say, judicial activism should not turn into judicial terrorism. Ultimately, our Constitution believes in the separation of power between… pic.twitter.comj5vCquY4cs — ANI November 26, 2025 ‘बुलडोजर एक्शन’ पर अपनी टिप्पणियों में गवई ने कहा कि अदालत ने नागरिकों को हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी है. उन्होंने बताया कि कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर अवमानना की कार्रवाई होगी और यदि किसी घर को गैर-कानूनी तरीके से गिराया गया है तो सरकार उसे दोबारा बनाए और जिम्मेदार अधिकारियों से लागत वसूले. कार्यपालिका या नेताओं से दबाव झेलने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि नहीं, सच में नहीं. #WATCH | On the shoe-hurling attempt on him and him insisting for no action against the said lawyer, former CJI B.R. Gavai says in an interview to ANI, Maybe it is a result of my upbringing, when something happened in the court, I didnt even know that it was related to some… pic.twitter.comuk4ib7Yd0j — ANI November 26, 2025 अपने ऊपर कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश वाले मामले पर उन्होंने कहा कि उन्होंने उस घटना को व्यक्तिगत रूप से लेने के बजाय अपनी सुनवाई जारी रखने का फैसला किया. कॉलेजियम की पारदर्शिता को लेकर गवई ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली पहले से अधिक पारदर्शी हो चुकी है. उनके अनुसार, कॉलेजियम के ओपेक होने के आरोप गलत हैं. हम उम्मीदवारों से बातचीत करते हैं और अलग-अलग स्रोतों कंसल्टिंग जज, कार्यपालिका, राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल तथा लॉ मिनिस्ट्री से इनपुट लेकर ही अंतिम सिफारिश करते हैं. #WATCH | Delhi: On attack by the Opposition on judiciary and constitutional bodies, former CJI B.R. Gavai says in an interview to ANI, This is wrong. Judges act according to their perception, according to law and as per the facts before them. Fair criticism of the judgment is… pic.twitter.comsgLmJJOS46 — ANI November 26, 2025 जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों पर पूर्व CJI बीआर गवई ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी. इस बात से इनकार करना गलत है कि इससे ज्यूडिशियरी की इमेज पर असर पड़ा है. लेकिन अब मामला पार्लियामेंट में पेंडिंग है और इंपीचमेंट की कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है. इस कोर्ट के एक मौजूदा जज की अगुवाई में जांच कर रही है. इसलिए, सही बात यह है कि मेरे लिए इस पर कमेंट करना ठीक नहीं होगा. न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष के हमले पर, पूर्व CJI बी.आर. गवई ने कहा कि यह गलत है. जज अपनी सोच, कानून और उनके सामने मौजूद तथ्यों के अनुसार काम करते हैं. फैसले की सही आलोचना का हमेशा स्वागत है. लेकिन जजों के फैसलों की आलोचना करना अच्छा नहीं है.

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