ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती देगा यह युवा नेता? गांधी परिवार के खास हैं पिता, दो दिग्गजों को कांग्रेस में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

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ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती देगा यह युवा नेता? गांधी परिवार के खास हैं पिता, दो दिग्गजों को कांग्रेस में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
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MP Politics: ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद ग्वालियर-चंबल की सियासत में जयवर्धन सिंह का दखल बढ़ गया है। वहीं, ओबीसी वर्ग से आने वाले अरुण यादव को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस राज्य के इन दो नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। सिंधिया ने 2020 में कांग्रेस से इस्तीफा दिया...

भोपाल: पहले एमपी विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बदलाव किया था। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस एआईसीसी की टीम में कुछ नए चेहरों को शामिल कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मध्य प्रदेश से कांग्रेस के दो नेताओं को एआईसीसी की टीम में शामिल किया जा सकता है। इनमें से एक नेता ओबीसी वर्ग से हो सकता है तो दूसरा युवा नेता।मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा चल रही है कि अरुण यादव और जयवर्धन सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह दोनों ही नेता अपने-अपने क्षेत्र में पकड़ रखते हैं। अरुण यादव लंबे समय से कांग्रेस में जिम्मेदारी की तलाश में हैं। अरुण यादव लगातार चुनाव भी हार चुके हैं जिसके बाद माना जा रहा है कि अब उनको संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि यह अभी अटकलें हैं। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी AICC की नई टीम में युवाओं और अनुभवियों को मौका देना चाहते हैं। क्यों मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारीमध्य प्रदेश से पूर्व पीसीसी चीफ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के पास लंबे समय से कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। विधानसभा चुनाव में अरुण यादव के समर्थक चुनाव हार गए। लोकसभा चुनाव में भी वह अपने क्षेत्र में पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। अरुण यादव के छोटे भाई सचिन यादव अभी विधायक हैं। यादव चेहरे के तौर पर अरुण यादव को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को साधने के लिए पार्टी अरुण यादव को आगे कर सकती है। जयवर्धन सिंह को क्यों मिल सकती है जिम्मेदारीजयवर्धन सिंह अभी राघौगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। जयवर्धन सिंह पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे हैं। वह ग्वालियर चंबल की सियासत में एक्टिव हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया की काट के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है। सिंधिया की काट क्यों हो सकते हैं जयवर्धनजयवर्धन सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों का ही संबंध राजपरिवार से है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर रियासत के महाराज हैं तो जयवर्धन सिंह राघौगढ़ राजघराने से संबंध रखते हैं। दोनों का ग्वालियर-चंबल की राजनीति में अच्छा खासा प्रभाव है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद इस इलाके में कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है ऐसे में कांग्रेस जयवर्धन सिंह पर दांव लगा सकती है। सिंधिया का बीजेपी में बढ़ा है कदकांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद बढ़ा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी सरकार में दूसरी बार केंद्रीय मंत्री हैं। उन्हें दूरसंचार विभाग का मंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही सिंधिया के कई समर्थक विधायक मोहन यादव की कैबिनेट में मंत्री हैं। हाल ही में बीजेपी ने जिला अध्यक्षों की घोषणा की है। इसमें सिंधिया समर्थक कई नेताओं को जगह मिली है।.

भोपाल: पहले एमपी विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बदलाव किया था। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस एआईसीसी की टीम में कुछ नए चेहरों को शामिल कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मध्य प्रदेश से कांग्रेस के दो नेताओं को एआईसीसी की टीम में शामिल किया जा सकता है। इनमें से एक नेता ओबीसी वर्ग से हो सकता है तो दूसरा युवा नेता।मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा चल रही है कि अरुण यादव और जयवर्धन सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह दोनों ही नेता अपने-अपने क्षेत्र में पकड़ रखते हैं। अरुण यादव लंबे समय से कांग्रेस में जिम्मेदारी की तलाश में हैं। अरुण यादव लगातार चुनाव भी हार चुके हैं जिसके बाद माना जा रहा है कि अब उनको संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि यह अभी अटकलें हैं। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी AICC की नई टीम में युवाओं और अनुभवियों को मौका देना चाहते हैं। क्यों मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारीमध्य प्रदेश से पूर्व पीसीसी चीफ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के पास लंबे समय से कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। विधानसभा चुनाव में अरुण यादव के समर्थक चुनाव हार गए। लोकसभा चुनाव में भी वह अपने क्षेत्र में पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। अरुण यादव के छोटे भाई सचिन यादव अभी विधायक हैं। यादव चेहरे के तौर पर अरुण यादव को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को साधने के लिए पार्टी अरुण यादव को आगे कर सकती है। जयवर्धन सिंह को क्यों मिल सकती है जिम्मेदारीजयवर्धन सिंह अभी राघौगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। जयवर्धन सिंह पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे हैं। वह ग्वालियर चंबल की सियासत में एक्टिव हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया की काट के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है। सिंधिया की काट क्यों हो सकते हैं जयवर्धनजयवर्धन सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों का ही संबंध राजपरिवार से है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर रियासत के महाराज हैं तो जयवर्धन सिंह राघौगढ़ राजघराने से संबंध रखते हैं। दोनों का ग्वालियर-चंबल की राजनीति में अच्छा खासा प्रभाव है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद इस इलाके में कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है ऐसे में कांग्रेस जयवर्धन सिंह पर दांव लगा सकती है। सिंधिया का बीजेपी में बढ़ा है कदकांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद बढ़ा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी सरकार में दूसरी बार केंद्रीय मंत्री हैं। उन्हें दूरसंचार विभाग का मंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही सिंधिया के कई समर्थक विधायक मोहन यादव की कैबिनेट में मंत्री हैं। हाल ही में बीजेपी ने जिला अध्यक्षों की घोषणा की है। इसमें सिंधिया समर्थक कई नेताओं को जगह मिली है।

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