जागरण संपादकीय: विदेशी धरती पर बेलगाम राहुल गांधी, इस तरह से बिगड़ती है भारत की छवि

Rahul Gandhi Controversial Speech News

जागरण संपादकीय: विदेशी धरती पर बेलगाम राहुल गांधी, इस तरह से बिगड़ती है भारत की छवि
Rahul Gandhi SpeechRahul Gandhi In AmericaRahul Gandhi Destroy India Image
  • 📰 Dainik Jagran
  • ⏱ Reading Time:
  • 223 sec. here
  • 8 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 103%
  • Publisher: 53%

बेलगाम बयानबाजी के जरिये राहुल गांधी का एक मकसद देश में जारी चुनावों में अपने पक्ष में माहौल बनाना भी रहता है क्योंकि विदेशी धरती पर घट रही भारत से संबंधित घटनाएं पूरे देश का ध्यान खींचती हैं। इसके जरिये राहुल अपने वोटरों को लुभाने और अपना समर्थक आधार वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश करते हैं लेकिन ऐसा करते वक्त भूल जाते हैं कि वह मामूली नेता नहीं...

उमेश चतुर्वेदी। महाभारत का एक प्रसंग है। वनवास के आखिरी दिनों में एक बार भीम ने देखा कि दुर्योधन को यक्ष बंदी बनाकर ले जा रहे हैं। दुश्मन दुर्योधन को बंदी बनाया जाते देख भीम की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। कुटिया पर लौटते ही इसकी जानकारी उन्होंने धर्मराज को दी, लेकिन युधिष्ठिर ने भीम की खुशी पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि आपस में भले ही हमारा बैर हो, लेकिन किसी बाहरी के लिए हम एक सौ पांच हैं। विदेशी धरती पर भारतीय राजनीति भी अपने घरेलू मुद्दों को लेकर इसी परंपरा को ही निभाती रही है, जिसे दुनिया ने 27 फरवरी, 1994 को जेनेवा में देखा। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में आर्गेनाइजेशन आफ इस्लामिक को-ऑपरेशन के जरिये कश्मीर में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भारत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव रखा था। अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता तो भारत को सुरक्षा परिषद के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इसकी अनूठी काट खोजी। भारत का पक्ष रखने के लिए उस समय विपक्षी दल के नेता अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल जेनेवा भेजा, जिसमें तब के विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद सदस्य की भूमिका में थे। भारतीय राजनीति ने उस संकट का मिलकर सामना किया और पाकिस्तान का प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया। राहुल गांधी अब नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इस परंपरा में उनका कोई विश्वास नहीं है। वह जब भी विदेश जाते हैं तो ऐसे बयान देते हैं, जिनसे देशविरोधी मुद्दों को हवा मिलती दिखती है। गत दिनों अमेरिका दौरे पर गए राहुल ने कहा, ‘आज भारत में लड़ाई इस बारे में है कि क्या एक सिख के रूप में उन्हें पगड़ी या कड़ा धारण करने की अनुमति दी जाएगी या एक सिख के रूप में वह गुरुद्वारा जाने में सक्षम होंगे। यही लड़ाई है और सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए है।’ इस बयान के जरिये राहुल गांधी विदेशी धरती पर यह जताने की कोशिश करते नजर आए कि भारत में सिख असुरक्षित हैं। सवाल यह है कि क्या भारत में सिखों को पगड़ी पहनने या गुरुद्वारा जाने से रोका जा रहा है? निश्चित तौर पर इसका जवाब न में है। ऐसे में राहुल गांधी के बयान को अगर उनके विरोधी खालिस्तानी आंदोलन से जोड़कर देखें तो कांग्रेस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भाजपा द्वारा राहुल को 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाना भी स्वाभाविक है। विदेशी धरती पर राहुल गांधी की बयानबाजी को वैश्विक प्रचार जरूर मिलता है, लेकिन इससे भारत की छवि लोकतंत्रहीन और तानाशाही वाले देश की बनती है। इस तरह राहुल दुनिया को यह बताने की कोशिश करते नजर आते हैं कि भारत में हर कोई खतरे में है और वहां नागरिक स्वतंत्रता खत्म हो चुकी है। पिछले साल अमेरिका में ही राहुल ने कहा था कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है। इसके पहले 2022 में लंदन में कहा था कि भारत के आत्मा पर हमले हो रहे हैं और बिना आत्मा के देश कुछ भी नहीं होता। 2018 में जर्मनी दौरे पर गए राहुल ने कहा था कि मोदी के अंदर देशभक्ति की भावना नहीं है। तब उन्होंने मोदी की तुलना ट्रंप से की थी। 2017 में अमेरिका में राहुल ने कहा था कि मोदी को देश की संघीय व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वह देश को बांटना चाहते हैं। दिलचस्प यह है कि बीते आम चुनाव में राहुल लगातार लोगों को डराते रहे कि भाजपा और मोदी आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। जातिगत जनगणना के मूल में उनके आरक्षण संबंधी विचार ही हैं, लेकिन अमेरिका के हालिया दौरे के दौरान आरक्षण को लेकर उन्होंने कह दिया कि जब भारत में बेहतर हालात होंगे तो आरक्षण खत्म कर देंगे। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में आरक्षण बड़ा मुद्दा तो नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं। आरक्षण और जातिगत जनगणना वहां के बड़े मुद्दे हैं। विवाद बढ़ता देखकर राहुल गांधी ने यह कह दिया कि वह आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक करना चाहते हैं। राहुल ने अमेरिका में यह भी कह दिया कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़ आदि भाषियों से कहा जा रहा है कि उनकी भाषा, संस्कृति और खानपान कमतर हैं। बेलगाम बयानबाजी के जरिये राहुल गांधी का एक मकसद देश में जारी चुनावों में अपने पक्ष में माहौल बनाना भी रहता है, क्योंकि विदेशी धरती पर घट रही भारत से संबंधित घटनाएं पूरे देश का ध्यान खींचती हैं। इसके जरिये राहुल अपने वोटरों को लुभाने और अपना समर्थक आधार वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करते वक्त भूल जाते हैं कि वह मामूली नेता नहीं हैं। पहले उनके बयानों को तवज्जो देश की सबसे पुरानी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के बयानों के नाते मिलती थी, अब वह नेता विपक्ष की भूमिका में हैं। इसलिए उनके बयानों को और महत्व मिलना स्वाभाविक है। अब वह भी संविधान और राष्ट्र के प्रति उतने ही जिम्मेदार हैं, जितना सत्ता पक्ष है। इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वह जो भी बोलेंगे, नपा-तुला और जिम्मेदारी के साथ बोलेंगे, लेकिन राहुल यहीं चूक रहे हैं। उनके गैर जिम्मेदाराना बयानों से भारत और भारत के बाहर स्थित देशविरोधी ताकतों का उत्साह बढ़ता है। राहुल के बयानों को लेकर कांग्रेस जिस तरह उनका बचाव करती दिख रही है, उससे लगता नहीं कि भविष्य में वह अपनी बयानबाजी को लेकर सचेत होंगे।.

उमेश चतुर्वेदी। महाभारत का एक प्रसंग है। वनवास के आखिरी दिनों में एक बार भीम ने देखा कि दुर्योधन को यक्ष बंदी बनाकर ले जा रहे हैं। दुश्मन दुर्योधन को बंदी बनाया जाते देख भीम की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। कुटिया पर लौटते ही इसकी जानकारी उन्होंने धर्मराज को दी, लेकिन युधिष्ठिर ने भीम की खुशी पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि आपस में भले ही हमारा बैर हो, लेकिन किसी बाहरी के लिए हम एक सौ पांच हैं। विदेशी धरती पर भारतीय राजनीति भी अपने घरेलू मुद्दों को लेकर इसी परंपरा को ही निभाती रही है, जिसे दुनिया ने 27 फरवरी, 1994 को जेनेवा में देखा। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में आर्गेनाइजेशन आफ इस्लामिक को-ऑपरेशन के जरिये कश्मीर में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भारत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव रखा था। अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता तो भारत को सुरक्षा परिषद के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इसकी अनूठी काट खोजी। भारत का पक्ष रखने के लिए उस समय विपक्षी दल के नेता अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल जेनेवा भेजा, जिसमें तब के विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद सदस्य की भूमिका में थे। भारतीय राजनीति ने उस संकट का मिलकर सामना किया और पाकिस्तान का प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया। राहुल गांधी अब नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इस परंपरा में उनका कोई विश्वास नहीं है। वह जब भी विदेश जाते हैं तो ऐसे बयान देते हैं, जिनसे देशविरोधी मुद्दों को हवा मिलती दिखती है। गत दिनों अमेरिका दौरे पर गए राहुल ने कहा, ‘आज भारत में लड़ाई इस बारे में है कि क्या एक सिख के रूप में उन्हें पगड़ी या कड़ा धारण करने की अनुमति दी जाएगी या एक सिख के रूप में वह गुरुद्वारा जाने में सक्षम होंगे। यही लड़ाई है और सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए है।’ इस बयान के जरिये राहुल गांधी विदेशी धरती पर यह जताने की कोशिश करते नजर आए कि भारत में सिख असुरक्षित हैं। सवाल यह है कि क्या भारत में सिखों को पगड़ी पहनने या गुरुद्वारा जाने से रोका जा रहा है? निश्चित तौर पर इसका जवाब न में है। ऐसे में राहुल गांधी के बयान को अगर उनके विरोधी खालिस्तानी आंदोलन से जोड़कर देखें तो कांग्रेस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भाजपा द्वारा राहुल को 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाना भी स्वाभाविक है। विदेशी धरती पर राहुल गांधी की बयानबाजी को वैश्विक प्रचार जरूर मिलता है, लेकिन इससे भारत की छवि लोकतंत्रहीन और तानाशाही वाले देश की बनती है। इस तरह राहुल दुनिया को यह बताने की कोशिश करते नजर आते हैं कि भारत में हर कोई खतरे में है और वहां नागरिक स्वतंत्रता खत्म हो चुकी है। पिछले साल अमेरिका में ही राहुल ने कहा था कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है। इसके पहले 2022 में लंदन में कहा था कि भारत के आत्मा पर हमले हो रहे हैं और बिना आत्मा के देश कुछ भी नहीं होता। 2018 में जर्मनी दौरे पर गए राहुल ने कहा था कि मोदी के अंदर देशभक्ति की भावना नहीं है। तब उन्होंने मोदी की तुलना ट्रंप से की थी। 2017 में अमेरिका में राहुल ने कहा था कि मोदी को देश की संघीय व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वह देश को बांटना चाहते हैं। दिलचस्प यह है कि बीते आम चुनाव में राहुल लगातार लोगों को डराते रहे कि भाजपा और मोदी आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। जातिगत जनगणना के मूल में उनके आरक्षण संबंधी विचार ही हैं, लेकिन अमेरिका के हालिया दौरे के दौरान आरक्षण को लेकर उन्होंने कह दिया कि जब भारत में बेहतर हालात होंगे तो आरक्षण खत्म कर देंगे। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में आरक्षण बड़ा मुद्दा तो नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं। आरक्षण और जातिगत जनगणना वहां के बड़े मुद्दे हैं। विवाद बढ़ता देखकर राहुल गांधी ने यह कह दिया कि वह आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक करना चाहते हैं। राहुल ने अमेरिका में यह भी कह दिया कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़ आदि भाषियों से कहा जा रहा है कि उनकी भाषा, संस्कृति और खानपान कमतर हैं। बेलगाम बयानबाजी के जरिये राहुल गांधी का एक मकसद देश में जारी चुनावों में अपने पक्ष में माहौल बनाना भी रहता है, क्योंकि विदेशी धरती पर घट रही भारत से संबंधित घटनाएं पूरे देश का ध्यान खींचती हैं। इसके जरिये राहुल अपने वोटरों को लुभाने और अपना समर्थक आधार वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करते वक्त भूल जाते हैं कि वह मामूली नेता नहीं हैं। पहले उनके बयानों को तवज्जो देश की सबसे पुरानी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के बयानों के नाते मिलती थी, अब वह नेता विपक्ष की भूमिका में हैं। इसलिए उनके बयानों को और महत्व मिलना स्वाभाविक है। अब वह भी संविधान और राष्ट्र के प्रति उतने ही जिम्मेदार हैं, जितना सत्ता पक्ष है। इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वह जो भी बोलेंगे, नपा-तुला और जिम्मेदारी के साथ बोलेंगे, लेकिन राहुल यहीं चूक रहे हैं। उनके गैर जिम्मेदाराना बयानों से भारत और भारत के बाहर स्थित देशविरोधी ताकतों का उत्साह बढ़ता है। राहुल के बयानों को लेकर कांग्रेस जिस तरह उनका बचाव करती दिख रही है, उससे लगता नहीं कि भविष्य में वह अपनी बयानबाजी को लेकर सचेत होंगे।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Dainik Jagran /  🏆 10. in İN

Rahul Gandhi Speech Rahul Gandhi In America Rahul Gandhi Destroy India Image

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

दादी इंदिरा गांधी की राह पर राहुल गांधी, अर्जुन पासी मामले में CM को लिखी चिट्ठी, कटनी की पीड़िता का हाल जा...दादी इंदिरा गांधी की राह पर राहुल गांधी, अर्जुन पासी मामले में CM को लिखी चिट्ठी, कटनी की पीड़िता का हाल जा...राहुल जिस तरह से दलितों पर होने वाले अत्याचार के विरोध में आवाज उठा रहे हैं उससे लग रहा है कि वे अपनी दादी इंदिरा गांधी की राह पर चल पड़े हैं.
Read more »

स्पैनिश एक्टर की फोटो 'राहुल गांधी की पत्नी' के गलत दावे से वायरलस्पैनिश एक्टर की फोटो 'राहुल गांधी की पत्नी' के गलत दावे से वायरलRahul Gandhi Wife Photo: इस तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी शादीशुदा हैं और तस्वीर में नजर आ रही महिला राहुल गांधी की पत्नी हैं.
Read more »

'अब तो राहुल गांधी को आतंकी पन्नू और इल्हान उमर का भी साथ', BJP बोली- भारत विरोधी जहर फैलाने में लगे हैं कांग्रेस सांसद'अब तो राहुल गांधी को आतंकी पन्नू और इल्हान उमर का भी साथ', BJP बोली- भारत विरोधी जहर फैलाने में लगे हैं कांग्रेस सांसदBJP attack Rahul Gandhi राहुल के सिखों और आरक्षण पर दिए बयान पर भाजपा ने हमला बोला है। इस बीच राहुल ने भारत विरोधी बयान देने वाली अमेरिकी सांसद से भी मुलाकात की जिसपर बवाल मच गया। भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी हमेशा की तरह भारत विरोधी विष फैलाने में जुटे हैं और पन्नू और इल्हान उमर तक राहुल गांधी की तारीफों में पुल गढ़े जा रहे...
Read more »

Rahul Gandhi: राहुल गांधी की अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक की यात्राओं पर विवाद, जानें पहले किन मुद्दों पर घिरेRahul Gandhi: राहुल गांधी की अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक की यात्राओं पर विवाद, जानें पहले किन मुद्दों पर घिरेRahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर हैं। इस दौरे में आरक्षण, सिख समुदाय और चीन पर दिए बयानों से भारत में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है।
Read more »

पीएम मोदी की 1993 की तस्वीर ‘भारतीयता’ पर देती है जोर, जो विदेश में राहुल गांधी के कार्यों से है अलगपीएम मोदी की 1993 की तस्वीर ‘भारतीयता’ पर देती है जोर, जो विदेश में राहुल गांधी के कार्यों से है अलगपीएम मोदी की 1993 की तस्वीर ‘भारतीयता’ पर देती है जोर, जो विदेश में राहुल गांधी के कार्यों से है अलग
Read more »

जागरण संपादकीय: कांग्रेस को अलग राह पर ले जाते राहुल गांधी, अमेरिका यात्रा पर हुआ विवादजागरण संपादकीय: कांग्रेस को अलग राह पर ले जाते राहुल गांधी, अमेरिका यात्रा पर हुआ विवादराहुल गांधी ने अमेरिका में अपने चिरपरिचित अंदाज में यह भी कहा कि चीन ने भारत की सैकड़ों किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया हुआ है और प्रधानमंत्री मोदी उससे निपट नहीं पा रहे हैं। वह यह बात न जाने कबसे दोहरा रहे हैं। साफ है कि वह यह भूलना पंसद कर रहे हैं कि चीन ने भारत की भूमि पर उस समय कब्जा किया था जब कांग्रेस सत्ता में...
Read more »



Render Time: 2026-04-02 13:25:30