गोरखपुर में मासूम से दुष्कर्म करने वाले आरोपित को आजीवन कारावास, 55 हजार का अर्थदंड

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गोरखपुर में मासूम से दुष्कर्म करने वाले आरोपित को आजीवन कारावास, 55 हजार का अर्थदंड
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गोरखपुर में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी अशोक निषाद को आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने 24 दिन में यह फैसला दिया।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। छह वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपित को आजीवन कारावास की सजा हुई है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अशोक कुमार यादव ने 24 दिन के अंदर फैसला सुनाते हुए 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं साक्ष्य मिटाने और बेटे का साथ देने के आरोप में दोषी पाई की आरोपित की मां सुनीता देवी को भी चार वर्ष के कारावास के साथ पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा है। यह घटना 21 फरवरी की रात पीपीगंज थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस ने आरोपित अशोक निषाद को सख्त सजा दिलाने के लिए पांच दिन में चार्जशीट लगा दी थी। साथ ही न्यायाधीश से फंसी की सजा देने का अनुरोध किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी एवं अरविंद श्रीवास्तव का कोर्ट में कहना था कि वादी रिश्तेदारी में अपनी पत्नी व नातिन के साथ 20 फरवरी को शादी समारोह में शामिल होने गया था। 21 फरवरी की रात 12 से दो बजे के बीच वादी की छः वर्षीय नातिन शादी समारोह से लापता हो गई। मासूम के गायब होने पर स्वजन में हड़कंप मच गया और उसकी तलाश शुरू की। ढूढते हुए जब पंडाल के पीछे पहुंचे तो वहां का दृश्य देख स्वजन के होश उड़ गए। आरोपित अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। वादी समेत स्वनज को आता देख वह मासूम को छोड़कर मौके से फरार हो गया। मासूम अचेत अवस्था में मिली और गंभीर रूप से घायल थी, उसके शरीर से खून बह रहा था। घटना के बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपित के विरुद्ध दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट का केस दर्ज कर आरोपित अशोक को गिरफ्तार किया। वहीं जांच के दौरान साक्ष्य मिटाने व बेटे का साथ देने के आरोप में केस दर्ज करते हुए उसकी मां सुनीता को गिरफ्तार कर लिया। जांच प्रक्रिया को तेजी से पूरा करते हुए एक सप्ताह के भीतर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी बरतने की गुंजाइश नहीं है। न्यायालय ने आरोपित को पाक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, की सजा सुनाई। यह भी पढ़ें- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के कैंसर रोगियों को मिलेगी उन्नत उपचार की सुविधा साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी दी गई, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, सह-अभियुक्ता सुनीता देवी को साक्ष्य छिपाने का दोषी मानते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी निर्देश दिया कि दोषियों से वसूली गई पूरी जुर्माना राशि पीड़िता के पुनर्वास, शिक्षा और भविष्य के लिए उपयोग में लाई जाए। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को जिला कारागार गोरखपुर भेज दिया गया है।हर दिन हुई सुनवाई, पहली बार 18 कार्यदिवस में हुआ फैसलामासूम से दुष्कर्म के मामले में घटना के बाद पहली बार पुलिस ने भी तेजी दिखाते हए चार्जशाीट दाखिल की। न्यायालय ने अभियुक्त के विरुद्ध सात मार्च को आरोप बनाया था। अभियोजन की ओर से मामले को साबित करने के लिए सात तथ्य के साक्षियों समेत 13 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। यानी हर दिन पाक्सो कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, गवाहों का बयान दर्ज किया गया। न्यायाधीश ने मात्र 24 दिन में और 18 कार्यदिवस के अंदर कार्रवाई पूरी कर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार और रिश्तेदारों में खुशी है। मासूम के दादा-दादी ने कोर्ट और पीपीगंज पुलिस के प्रति आभार जताया है।.

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। छह वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपित को आजीवन कारावास की सजा हुई है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अशोक कुमार यादव ने 24 दिन के अंदर फैसला सुनाते हुए 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं साक्ष्य मिटाने और बेटे का साथ देने के आरोप में दोषी पाई की आरोपित की मां सुनीता देवी को भी चार वर्ष के कारावास के साथ पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा है। यह घटना 21 फरवरी की रात पीपीगंज थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस ने आरोपित अशोक निषाद को सख्त सजा दिलाने के लिए पांच दिन में चार्जशीट लगा दी थी। साथ ही न्यायाधीश से फंसी की सजा देने का अनुरोध किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी एवं अरविंद श्रीवास्तव का कोर्ट में कहना था कि वादी रिश्तेदारी में अपनी पत्नी व नातिन के साथ 20 फरवरी को शादी समारोह में शामिल होने गया था। 21 फरवरी की रात 12 से दो बजे के बीच वादी की छः वर्षीय नातिन शादी समारोह से लापता हो गई। मासूम के गायब होने पर स्वजन में हड़कंप मच गया और उसकी तलाश शुरू की। ढूढते हुए जब पंडाल के पीछे पहुंचे तो वहां का दृश्य देख स्वजन के होश उड़ गए। आरोपित अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। वादी समेत स्वनज को आता देख वह मासूम को छोड़कर मौके से फरार हो गया। मासूम अचेत अवस्था में मिली और गंभीर रूप से घायल थी, उसके शरीर से खून बह रहा था। घटना के बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपित के विरुद्ध दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट का केस दर्ज कर आरोपित अशोक को गिरफ्तार किया। वहीं जांच के दौरान साक्ष्य मिटाने व बेटे का साथ देने के आरोप में केस दर्ज करते हुए उसकी मां सुनीता को गिरफ्तार कर लिया। जांच प्रक्रिया को तेजी से पूरा करते हुए एक सप्ताह के भीतर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी बरतने की गुंजाइश नहीं है। न्यायालय ने आरोपित को पाक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, की सजा सुनाई। यह भी पढ़ें- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के कैंसर रोगियों को मिलेगी उन्नत उपचार की सुविधा साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी दी गई, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, सह-अभियुक्ता सुनीता देवी को साक्ष्य छिपाने का दोषी मानते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी निर्देश दिया कि दोषियों से वसूली गई पूरी जुर्माना राशि पीड़िता के पुनर्वास, शिक्षा और भविष्य के लिए उपयोग में लाई जाए। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को जिला कारागार गोरखपुर भेज दिया गया है।हर दिन हुई सुनवाई, पहली बार 18 कार्यदिवस में हुआ फैसलामासूम से दुष्कर्म के मामले में घटना के बाद पहली बार पुलिस ने भी तेजी दिखाते हए चार्जशाीट दाखिल की। न्यायालय ने अभियुक्त के विरुद्ध सात मार्च को आरोप बनाया था। अभियोजन की ओर से मामले को साबित करने के लिए सात तथ्य के साक्षियों समेत 13 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। यानी हर दिन पाक्सो कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, गवाहों का बयान दर्ज किया गया। न्यायाधीश ने मात्र 24 दिन में और 18 कार्यदिवस के अंदर कार्रवाई पूरी कर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार और रिश्तेदारों में खुशी है। मासूम के दादा-दादी ने कोर्ट और पीपीगंज पुलिस के प्रति आभार जताया है।

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