Who Is Niranjan Kumar Mehta: बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ये तस्वीर थी व्हीलचेयर पर मतदान के लिए पहुंचे विधायक निरंजन कुमार मेहता की।
पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान सियासत की एक भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई। जनता दल के विधायक निरंजन कुमार मेहता चोटिल होने के बावजूद व्हीलचेयर पर बैठकर विधानसभा पहुंचे और अपना मतदान किया। उनकी इस प्रतिबद्धता ने सदन में मौजूद सभी का ध्यान खींचा। मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा, 'अगर मैं स्ट्रेचर पर भी होता, तब भी वोट डालने जरूर आता।' उन्होंने एनडीए की एकजुटता पर भरोसा जताते हुए दावा किया कि बिहार में राज्यसभा की सभी पांचों सीटों पर एनडीए की जीत तय है।निरंजन मेहता: मुखिया से विधायक तक निरंजन कुमार मेहता बिहार की राजनीति का एक जमीनी चेहरा माने जाते हैं। मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने मधेपुरा जिले की उदाकिशुनगंज प्रखंड के अंतर्गत मधुबन पंचायत के मुखिया के रूप में जनता की सेवा की। पंचायत स्तर से शुरू हुआ उनका यह सफर उन्हें बिहार विधानसभा की दहलीज तक ले गया।बिहारीगंज में शरद यादव की बेटी को दी थी मातनिरंजन मेहता ने बिहारीगंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार अपनी पकड़ मजबूत की है। वे 2015 और 2020 के चुनावों में यहां से विधायक चुने गए। 2020 के चुनाव में उन्होंने दिग्गज नेता दिवंगत शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव को भारी मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद 2025 के चुनावों में भी उन्होंने जदयू के टिकट पर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। बता दें कि यह क्षेत्र मधेपुरा लोकसभा का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व कभी खुद शरद यादव करते थे।किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं निरंजन मेहताविधायक के रूप में निरंजन मेहता अपनी बेबाक पैरवी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मधेपुरा क्षेत्र के किसानों के लिए मक्का की फसल के उचित मूल्य का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, जहां किसानों को कम कीमतों पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता था। इसके अलावा, उन्होंने बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए उदा-मधुबन सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य संपन्न कराया, जो 1980-85 के बाद से उपेक्षित थी।'कुशवाहा राजनीतिक विचार मंच' से भी जुड़े हैं निरंजन मेहतानिरंजन मेहता केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक संगठनों में भी सक्रिय हैं। वे 'कुशवाहा राजनीतिक विचार मंच' से जुड़े हुए हैं। यह संगठन कोइरी जाति के राजनीतिक अधिकारों और उनके उत्थान के लिए निरंतर कार्य करता है।.
पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान सियासत की एक भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई। जनता दल के विधायक निरंजन कुमार मेहता चोटिल होने के बावजूद व्हीलचेयर पर बैठकर विधानसभा पहुंचे और अपना मतदान किया। उनकी इस प्रतिबद्धता ने सदन में मौजूद सभी का ध्यान खींचा। मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा, 'अगर मैं स्ट्रेचर पर भी होता, तब भी वोट डालने जरूर आता।' उन्होंने एनडीए की एकजुटता पर भरोसा जताते हुए दावा किया कि बिहार में राज्यसभा की सभी पांचों सीटों पर एनडीए की जीत तय है।निरंजन मेहता: मुखिया से विधायक तकनिरंजन कुमार मेहता बिहार की राजनीति का एक जमीनी चेहरा माने जाते हैं। मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने मधेपुरा जिले की उदाकिशुनगंज प्रखंड के अंतर्गत मधुबन पंचायत के मुखिया के रूप में जनता की सेवा की। पंचायत स्तर से शुरू हुआ उनका यह सफर उन्हें बिहार विधानसभा की दहलीज तक ले गया।बिहारीगंज में शरद यादव की बेटी को दी थी मातनिरंजन मेहता ने बिहारीगंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार अपनी पकड़ मजबूत की है। वे 2015 और 2020 के चुनावों में यहां से विधायक चुने गए। 2020 के चुनाव में उन्होंने दिग्गज नेता दिवंगत शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव को भारी मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद 2025 के चुनावों में भी उन्होंने जदयू के टिकट पर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। बता दें कि यह क्षेत्र मधेपुरा लोकसभा का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व कभी खुद शरद यादव करते थे।किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं निरंजन मेहताविधायक के रूप में निरंजन मेहता अपनी बेबाक पैरवी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मधेपुरा क्षेत्र के किसानों के लिए मक्का की फसल के उचित मूल्य का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, जहां किसानों को कम कीमतों पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता था। इसके अलावा, उन्होंने बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए उदा-मधुबन सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य संपन्न कराया, जो 1980-85 के बाद से उपेक्षित थी।'कुशवाहा राजनीतिक विचार मंच' से भी जुड़े हैं निरंजन मेहतानिरंजन मेहता केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक संगठनों में भी सक्रिय हैं। वे 'कुशवाहा राजनीतिक विचार मंच' से जुड़े हुए हैं। यह संगठन कोइरी जाति के राजनीतिक अधिकारों और उनके उत्थान के लिए निरंतर कार्य करता है।
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