केजरीवाल की महिला योजना, फ्रॉड घोषित

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केजरीवाल की महिला योजना, फ्रॉड घोषित
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को 2100 रुपए देने का वादा किया, लेकिन दिल्ली सरकार के ही दो विभागों ने इस योजना को फ्रॉड घोषित कर दिया।

Kejriwal Promised To Give Rs 2100 To Women, His Own Officers Published The Fraud In Newspapers; Everything You Need To Knowकेजरीवाल ने महिलाओं को 2100 देने का वादा किया, अफसरों ने अखबारों में छपवाया ये फ्रॉड; वो सबकुछ जो जानना जरूरी हैदिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने महिला सम्मान और संजीवनी योजना लॉन्च की। 23 दिसंबर से इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिए गए, लेकिन 25 दिसंबर को दिल्ली सरकार के ही दो विभागों ने अखबारों में विज्ञापन देकर इसे फ्रॉड बता दिया।क्या है पूरा विवाद, इसका चुनावी इम्पैक्ट क्या होगा और दिल्ली के अधिकारी अपने ही सीएम-मंत्रियों के खिलाफ नाफरमानी की हिम्मत कहां से लाते हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में.

..बीते 34 दिनों में दिल्ली की आम आदमी पार्टी यानी आप सरकार ने दिल्ली के लोगों के लिए 4 बड़ी योजनाओं का ऐलान किया। 23 दिसंबर से बुजुर्गों के लिए संजीवनी और महिलाओं को 2,100 रुपए देने की योजना के लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया। आप सरकार की 4 योजनाओं को पॉइंट्स से समझते हैं…25 दिसंबर को दिल्ली सरकार के महिला और बाल विकास विभाग के जॉइंट डायरेक्टर की ओर से अखबार में विज्ञापन दिया गया। इसमें कहा गया, 'एक राजनीतिक पार्टी दिल्ली की महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला योजना के तहत 2,100 रुपए प्रति माह देने का दावा कर रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं की गई है।' विज्ञापन में आगे लिखा, 'दिल्ली की जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी गैर-मौजूद योजना के वादों पर विश्वास न करें, क्योंकि ये भ्रामक और बिना किसी अधिकार के हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ऐसी किसी भी देनदारी या धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।' दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव की ओर से एक अन्य विज्ञापन जारी किया गया। इसमें संजीवनी योजना को फ्रॉड बताया। इसमें कहा, 'आज तक ऐसी कोई भी कथित संजीवनी योजना अस्तित्व में नहीं है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने न तो किसी स्वास्थ्य अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को बुजुर्ग नागरिकों से ऐसी व्यक्तिगत जानकारी और डेटा एकत्र करने के लिए अधिकृत किया है, न ही विभाग इस संबंध में कोई कार्ड प्रदान करता है।'कथित गैर-मौजूद संजीवनी योजना के तहत मुफ्त इलाज के किसी भी वादे पर विश्वास न करें।अनजाने में किसी भी दस्तावेज पर अपना हस्ताक्षर या अंगूठा न लगाएं।इलेक्शन एनालिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट अमिताभ तिवारी बताते हैं कि यह दोनों स्कीम्स नहीं, बल्कि चुनावी वादे हैं। संजीवनी योजना और महिला सम्मान योजना को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया है, क्योंकि आप सरकार के पास समय नहीं बचा है। मुख्यमंत्री आतिशी को इन स्कीम के वादों को पूरा करने के लिए प्रोसेस फॉलो करनी पड़ेगी, जिसमें लेफ्टिनेंट गवर्नर की परमिशन की जरूरत होगी।अन्य राज्यों में किसी भी स्कीम को लागू करने की पावर मुख्यमंत्री और गवर्नर के पास होती है, लेकिन दिल्ली में यह पावर LG को दी गई है। वहीं, फरवरी 2025 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार के पास स्कीम्स को लॉन्च करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है। इन सबके बीच विभागों के दोनों विज्ञापनों ने मामला और ज्यादा बिगाड़ दिया है।चुनाव के बाद हम महिलाओं को हर महीने 2100 रुपए देंगे। बुजुर्गों के मुफ्त इलाज भी कराएंगे। इसमें रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं। साढ़े 12 लाख रजिस्ट्रेशन महिला योजना और करीब डेढ़ लाख बुजुर्गों की योजना में रजिस्ट्रेशन हुए हैं। द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 की शुरुआत में दिल्ली सरकार की ओर से टैक्स न देने वाली महिलाओं को 1 हजार रुपए देने की योजना को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इस योजना के लिए अभी तक ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल शुरू नहीं हुआ है। महिलाओं को 1 हजार रुपए देने की घोषणा बजट में की गई थी और इसे मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को मुफ्त इलाज की घोषणा पर कोई काम नहीं हुआ है, क्योंकि कैबिनेट ने इसे पारित नहीं किया है। दिल्ली में योजनाओं को लेकर चुनी हुई सरकार और ब्यूरोक्रेसी के बीच चल रहे घमासान से इन योजनाओं को लागू करने में परेशानी हो सकती है।इन फॉर्म के जरिए दिल्ली सरकार अवैध रूप से डेटा इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है।अमिताभ तिवारी कहते हैं कि इस कॉन्ट्रोवर्सी के बावजूद दिल्ली में आप को हराना भाजपा के लिए मुश्किल है, क्योंकि भाजपा के सबसे सुस्त नेता दिल्ली के प्रदेश कार्यालय में बैठते हैं। वो सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भरोसे बैठे रहते हैं। इनके मुकाबले आप के नेता बहुत ज्यादा सक्षम हैं। आप को हराने के लिए भाजपा को केजरीवाल की टक्कर का एक नेता उतारना होगा, जो दिल्ली में सीएम का फेस होगा। या फिर सभी 70 सीटों पर कद्दावर नेताओं की जरूरत होगी। यह सब भाजपा के लिए बेहद मुश्किल काम है। अमिताभ तिवारी बताते हैं कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव में 30% फ्लोटिंग वोटर्स आम आदमी पार्टी को वोट करते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह वोटर्स 15% भाजपा के पास और 15% वोटर्स कांग्रेस के पास चले जाते हैं। अब आप को उम्मीद है कि वोटर्स उनके पास वापस आ जाएंगे, लेकिन इसके पीछे भी आप की बिल्कुल अलग राजनीति चली आ रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में वोटर्स के पास वापस लौटने के लिए स्कूल डेवलपमेंट, फ्री बिजली और फ्री पानी जैसी स्कीम मौजूद थीं, लेकिन 2025 के चुनाव में महिलाओं के लिए फ्री बस सर्विस इकलौती नई स्कीम रही। इसलिए आप सरकार ने 4 नई स्कीम्स का वादा किया। जिससे वोटर्स को इस बार चुनाव में कुछ नया पेश किया जाए, लेकिन इनमें से भी 2 स्कीम्स विवादों में उलझ चुकी हैं।अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मैं महिलाओं को 2,100 रुपए महीना दिलाकर रहूंगा। फ्री बस सर्विस बंद नहीं होने दूंगा, ये मेरा वादा है। भले ये मुझे 10 बार जेल में डाल दें।दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने एक मीटिंग बुलाई, जिसमें संबंधित विभाग के बड़े अधिकारी नहीं पहुंचे। इस वजह से मंत्री राय ने मीटिंग कैंसिल कर दी। यह पहली बार दिल्ली की राज्य सरकार में हुआ, जब मंत्री के बुलावे पर अधिकारी नहीं पहुंचे।दिल्ली के तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल के जेल में होने के चलते मंत्री गोपाल राय ने GAD के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी को एक पत्र लिखा। राय ने लिखा कि केजरीवाल की जगह 15 अगस्त को आतिशी दिल्ली में तिरंगा फहराएगी। इस पत्र का रिप्लाई करते हुए चौधरी ने इसे अवैध बता दिया।केजरीवाल सरकार में मंत्री राजकुमार आनंद ने अप्रैल में इस्तीफा दे दिया। 6 अगस्त को मंत्री गोपाल राय ने जीएडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी को पत्र लिखा। इस पत्र में राय ने आनंद के सभी विभागों के अधिकारियों को आतिशी को रिपोर्ट करने का आदेश देने के लिए कहा, लेकिन मुख्य सचिव ने नियमों का हवाला देते हुए इससे मना कर दिया।दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सर्विसेज विभाग के सचिव आशीष मोरे को हटाने का फैसला किया था। मंत्री सौरभ के इस फैसले की सूचना आशीष मोरे को मिल गई। इसके बावजूद उन्होंने सरकार के आदेश को अनदेखा कर दिया।19 मई 2023 को केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अध्यादेश लेकर आई। इसके तहत दिल्ली के अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े अंतिम फैसला लेने का हक LG को दे दिया गया। दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश विद विधानसभा का दर्जा मिला हुआ है। यही वजह है कि दिल्ली राज्य के अफसर दिल्ली सरकार और उसके मंत्रियों की बात नहीं मानते। इस अध्यादेश के मुताबिक, दिल्ली में तैनात 'दानिक्स' कैडर के 'ग्रुप-ए' अधिकारियों से जुड़े फैसले राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण यानी NCCSA करता है। इसमें अफसरों के ट्रांसफर से लेकर उनके खिलाफ डिसीप्लिनरी प्रोसीडिंग्स जैसी कार्रवाई शामिल हैं। दानिक्स कैडर यानी दिल्ली, अंडमान एंड निकोबार, लक्षद्वीप, दमन एंड दीव, दादरा-नगर हवेली के सिविल सर्विस अधिकारी हैं।प्राधिकरण को सभी दानिक्‍स के अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े डिसीजन लेने का हक होता है। आखिरी फैसला LG लेते हैं। यानी अगर LG को प्राधिकरण का कोई फैसला ठीक नहीं लगा, तो वो उसे बदलने के लिए वापस लौटा सकते हैं। फिर भी अगर प्राधिकरण इसमें चेंज नहीं करता है, तो लास्ट डिसीजन LG का ही होता है। वहीं, दूसरे राज्यों में अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है। ऑल इंडिया सर्विसेज एक्ट 1969 के मुताबिक, किसी भी राज्य सरकार के तहत काम करने वाले अफसरों पर केंद्र सरकार किसी भी तरह का एक्शन नहीं ले सकती है। इसमें ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामले भी शामिल है। इस कानून के तहत ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों की नियुक्तियां होती हैं।दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने एक बयान जारी कर इन दोनों नोटिस को झूठा बताया। सीएम आतिशी ने कहा, 'जो नोटिस आज छपे हैं, वो गलत हैं। कुछ अफसरों पर भाजपा ने दबाव बनाकर गलत सूचना छपवाई है। अफसरों के खिलाफ एडमिनिस्ट्रेटिव और पुलिस कार्रवाई होगी। कैबिनेट का नोटिफिकेशन जनता के बीच आया है।'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अध्यादेश, 2023 के मुताबिक, दिल्ली की सीएम आतिशी सीधे अफसरों पर कोई एक्शन नहीं ले सकती हैं। अफसरों पर ट्रांसफर, सस्पेंड या किसी भी तरह के एक्शन के लिए उन्हें नेशनल कैपिटल पब्लिक सर्विस अथॉरिटी में मामले को ले जाना होगा। जहां उनके साथ दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह प्रधान सचिव मामले पर चर्चा करेंगे। दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह प्रधान सचिव केंद्र सरकार नियुक्त करती है, ऐसे में वो किसी एक्शन का समर्थन नहीं करेंगे। अगर फिर भी अथॉरिटी कोई एक्शन लेने का फैसला करती है, तो उसमें आखिरी फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल का होगा।दिल्ली में 60 साल से ऊपर बुजुर्गों का मुफ्त इलाज: चुनाव से पहले केजरीवाल की तीसरी बड़ी घोषणा, महिलाओं-ऑटोवालों के लिए ऐलान कर चुके आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का ऐलान किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल ने घोषणा की कि 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों का मुफ्त इलाज होगा।मेरठ में अगले दो दिन में बारिश के आसारहरियाणा में हिसार सबसे ठंडा, तापमान 4.9°सागर में बादलों के बीच छाई धुंध,कल बारिश का अलर्टअयोध्या में मौसम का मिजाज बदलासीकर में बारिश की संभावना, फसलों को होगा फायदा

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