उत्तर प्रदेश में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शैक्षिक सत्र 2026-27 से ‘स्कूल चलो अभियान’ शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत छह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाएगा। अभियान के दो चरण होंगे, पहला 15 अप्रैल तक और दूसरा 1 से 15 जुलाई तक। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर और शिक्षकों की अहम भूमिका होगी। बालिकाओं, दिव्यांग बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नामांकन से किसी को भी जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड न होने के कारण वंचित नहीं किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को 2500 रुपये दिए जाएंगे।
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शैक्षिक सत्र 2026-27 में एक अप्रैल से ‘ स्कूल चलो अभियान ’ चलेगा। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि छह से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा पढ़ाई से बाहर न रहे। अभियान के जरिये स्कूल से दूर बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराया जाएगा। पहला चरण 15 अप्रैल तक और दूसरा चरण एक से 15 जुलाई तक चलेगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि अभियान के तहत तीन वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों का आंगनबाड़ी या बालवाटिका में दाखिला कराया जाएगा, जबकि छह वर्ष के बच्चों को कक्षा-एक में प्रवेश दिलाया जाएगा। सात से 14 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं या स्कूल नहीं जा रहे हैं, उनकी पहचान कर उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ा जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी या बालवाटिका से कक्षा-एक, कक्षा-पांच से कक्षा-छह, कक्षा-आठ से कक्षा-नौ और कक्षा-10 से कक्षा-11 में शत प्रतिशत नामांकन के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ईसीसीई एजुकेटर की भूमिका रहेगी। वे तीन से पांच वर्ष के बच्चों की सूची बनाकर उनका आंगनबाड़ी या बालवाटिका में नामांकन कराएंगे और छह वर्ष पूरे करने वाले बच्चों की सूची कक्षा-एक के शिक्षकों को देंगे। कक्षा-पांच, आठ और 10वीं पास करने वाले छात्रों की सूची भी अगले स्तर के शिक्षकों को दी जाएगी। अभियान के दौरान शिक्षक अपने कैचमेंट क्षेत्र में घर-घर सर्वे कर ऐसे बच्चों की पहचान करेंगे जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। बालिकाओं की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा। दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का भी नामांकन कराया जाएगा। किसी भी बच्चे को जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड न होने के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को 2500 रुपये दिए जाएंगे। 31 मार्च तक तैयारी पूरी करने के निर्देश हैं। यह भी पढ़ें- यूपी में चलने वाली इस वंदे भारत एक्सप्रेस में कम हो सकती है बोगियों की संख्या, सर्वे हो गया शुरू.
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शैक्षिक सत्र 2026-27 में एक अप्रैल से ‘स्कूल चलो अभियान’ चलेगा। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि छह से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा पढ़ाई से बाहर न रहे। अभियान के जरिये स्कूल से दूर बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराया जाएगा। पहला चरण 15 अप्रैल तक और दूसरा चरण एक से 15 जुलाई तक चलेगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि अभियान के तहत तीन वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों का आंगनबाड़ी या बालवाटिका में दाखिला कराया जाएगा, जबकि छह वर्ष के बच्चों को कक्षा-एक में प्रवेश दिलाया जाएगा। सात से 14 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं या स्कूल नहीं जा रहे हैं, उनकी पहचान कर उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ा जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी या बालवाटिका से कक्षा-एक, कक्षा-पांच से कक्षा-छह, कक्षा-आठ से कक्षा-नौ और कक्षा-10 से कक्षा-11 में शत प्रतिशत नामांकन के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ईसीसीई एजुकेटर की भूमिका रहेगी। वे तीन से पांच वर्ष के बच्चों की सूची बनाकर उनका आंगनबाड़ी या बालवाटिका में नामांकन कराएंगे और छह वर्ष पूरे करने वाले बच्चों की सूची कक्षा-एक के शिक्षकों को देंगे। कक्षा-पांच, आठ और 10वीं पास करने वाले छात्रों की सूची भी अगले स्तर के शिक्षकों को दी जाएगी। अभियान के दौरान शिक्षक अपने कैचमेंट क्षेत्र में घर-घर सर्वे कर ऐसे बच्चों की पहचान करेंगे जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। बालिकाओं की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा। दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का भी नामांकन कराया जाएगा। किसी भी बच्चे को जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड न होने के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को 2500 रुपये दिए जाएंगे। 31 मार्च तक तैयारी पूरी करने के निर्देश हैं। यह भी पढ़ें- यूपी में चलने वाली इस वंदे भारत एक्सप्रेस में कम हो सकती है बोगियों की संख्या, सर्वे हो गया शुरू
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