ईरान युद्ध से कच्चे तेल की कीमत में भारी तेजी आई है। इसकी तपिश अब भारतीय इंडस्ट्री में भी महसूस होने लगी है। ओवरकैपेसिटी के कारण इंडस्ट्री पहले से ही संकट से जूझ रही थी और अब रही सही कसर पश्चिम एशिया में चल रही जंग ने पूरी कर दी है।
नई दिल्ली: ईरान युद्ध का असर अब भारतीय उद्योगों पर भी दिखना शुरू हो गया है। सीमेंट उद्योग भी कच्चे माल की कीमतों में तेजी से परेशान है और कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रहा है। ओवरकैपेसिटी के कारण इंडस्ट्री पहले से ही संकट से जूझ रही थी और अब रही सही कसर पश्चिम एशिया में चल रही जंग ने पूरी कर दी है। इस लड़ाई के कारण पेटकोक, कोल और पैकेजिंग मटीरियल्स की कीमत में भारी तेजी आई है। इस कारण इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं।चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज में इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका का अनुमान है कि जियोपॉलिटकल कारणों से सीमेंट इंडस्ट्री की प्रोडक्शन कॉस्ट 150 रुपये से 200 रुपये प्रति टन बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के एबिटा मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। सीमेंट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में पावर और फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। अधिकांश बड़े प्रोड्यूसर अपनी जरूरत का 50 से 60 फीसदी पेटकोक आयात करते हैं। लेकिन पेटकोक केवल इसका एक पहलू है।ईरान युद्ध को लेकर नेतन्याहू पर भड़के जेडी वेंस, फोन कॉल पर जमकर लगाई फटकार, अमेरिका-इजरायल में तनाव!पैकेजिंग मटीरियल में बढ़ोतरीफ्रेट रेट भी बढ़ रहा है और इसके साथ ही पॉलीप्रोपाइलीन बैग की कीमत में बढ़ रही है। पॉलीप्रोपाइलीन बैग सीमेंट के लिए एक स्टैंडर्ड पैकेजिंग मटीरियल होता है। यह सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमत से जुड़ा है। इसलिए इसकी कीमत में काफी तेजी आई है। एलपीजी सप्लाई में दिक्कत से भी पैकेजिंग कॉस्ट पर दबाव पड़ रहा है। मुरारका का मानना है कि केवल इस सेगमेंट में 20 फीसदी तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग कॉस्ट से एबिटा में प्रति टन 50 से 60 रुपये का बोझ पड़ेगा। ईरान युद्ध का असर अब भारत की सीमेंट इंडस्ट्री पर भी पड़ने लगा है सीमेंट में यूज होने वाला कच्चा माल की कीमत में हाल में तेजी आई है पेटकोक, कोल और पैकेजिंग मटीरियल्स की कीमत में बढ़ोतरी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में पावर और फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 30% हैउन्होंने कहा कि ईरान में लड़ाई से प्रति टन एबिटा में 150 रुपये से 200 रुपये का प्रभाव पड़ेगा। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को कीमत में 4 से 5 फीसदी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। बाजार इसे एबजॉर्ब करेगा या नहीं, यह पूरी तरह अलग सवाल है। कंपनियों ने चौथी तिमाही के दौरान प्रति बैग 15 से 20 रुपये की बढ़ोतरी करने की कोशिश की लेकिन ओवरसप्लाई के कारण अधिकांश कंपनियों को इसे वापस लेना पड़ा।'नाटो में हमारी जरूरत नहीं', डोनाल्ड ट्रंप की यूरोपीय देशों को धमकी, ईरान युद्ध में शामिल न होने पर भड़केकितनी बढ़ सकती है कीमत?मुरारका ने कहा कि अप्रैल में सीमेंट कंपनी प्रति बैग 7 से 8 रुपये बढ़ोतरी कर सकती हैं लेकिन यह पूरी तरह डिमांड-सप्लाई डायनैमिक्स पर निर्भर करेगा। सीमेंट इंडस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 140 से 150 मिलियन टन नई कैपिसिटी जोड़ने की तैयारी में है जबकि मौजूदा यूटिलाइजेशन रेट 65 से 70 फीसदी है। ऐसी हालत में कीमतों में बढ़ोतरी को बनाए रखना मुश्किल हो सकती है।.
नई दिल्ली: ईरान युद्ध का असर अब भारतीय उद्योगों पर भी दिखना शुरू हो गया है। सीमेंट उद्योग भी कच्चे माल की कीमतों में तेजी से परेशान है और कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रहा है। ओवरकैपेसिटी के कारण इंडस्ट्री पहले से ही संकट से जूझ रही थी और अब रही सही कसर पश्चिम एशिया में चल रही जंग ने पूरी कर दी है। इस लड़ाई के कारण पेटकोक, कोल और पैकेजिंग मटीरियल्स की कीमत में भारी तेजी आई है। इस कारण इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं।चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज में इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका का अनुमान है कि जियोपॉलिटकल कारणों से सीमेंट इंडस्ट्री की प्रोडक्शन कॉस्ट 150 रुपये से 200 रुपये प्रति टन बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के एबिटा मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। सीमेंट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में पावर और फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। अधिकांश बड़े प्रोड्यूसर अपनी जरूरत का 50 से 60 फीसदी पेटकोक आयात करते हैं। लेकिन पेटकोक केवल इसका एक पहलू है।ईरान युद्ध को लेकर नेतन्याहू पर भड़के जेडी वेंस, फोन कॉल पर जमकर लगाई फटकार, अमेरिका-इजरायल में तनाव!पैकेजिंग मटीरियल में बढ़ोतरीफ्रेट रेट भी बढ़ रहा है और इसके साथ ही पॉलीप्रोपाइलीन बैग की कीमत में बढ़ रही है। पॉलीप्रोपाइलीन बैग सीमेंट के लिए एक स्टैंडर्ड पैकेजिंग मटीरियल होता है। यह सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमत से जुड़ा है। इसलिए इसकी कीमत में काफी तेजी आई है। एलपीजी सप्लाई में दिक्कत से भी पैकेजिंग कॉस्ट पर दबाव पड़ रहा है। मुरारका का मानना है कि केवल इस सेगमेंट में 20 फीसदी तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग कॉस्ट से एबिटा में प्रति टन 50 से 60 रुपये का बोझ पड़ेगा। ईरान युद्ध का असर अब भारत की सीमेंट इंडस्ट्री पर भी पड़ने लगा है सीमेंट में यूज होने वाला कच्चा माल की कीमत में हाल में तेजी आई है पेटकोक, कोल और पैकेजिंग मटीरियल्स की कीमत में बढ़ोतरी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में पावर और फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 30% हैउन्होंने कहा कि ईरान में लड़ाई से प्रति टन एबिटा में 150 रुपये से 200 रुपये का प्रभाव पड़ेगा। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को कीमत में 4 से 5 फीसदी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। बाजार इसे एबजॉर्ब करेगा या नहीं, यह पूरी तरह अलग सवाल है। कंपनियों ने चौथी तिमाही के दौरान प्रति बैग 15 से 20 रुपये की बढ़ोतरी करने की कोशिश की लेकिन ओवरसप्लाई के कारण अधिकांश कंपनियों को इसे वापस लेना पड़ा।'नाटो में हमारी जरूरत नहीं', डोनाल्ड ट्रंप की यूरोपीय देशों को धमकी, ईरान युद्ध में शामिल न होने पर भड़केकितनी बढ़ सकती है कीमत?मुरारका ने कहा कि अप्रैल में सीमेंट कंपनी प्रति बैग 7 से 8 रुपये बढ़ोतरी कर सकती हैं लेकिन यह पूरी तरह डिमांड-सप्लाई डायनैमिक्स पर निर्भर करेगा। सीमेंट इंडस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 140 से 150 मिलियन टन नई कैपिसिटी जोड़ने की तैयारी में है जबकि मौजूदा यूटिलाइजेशन रेट 65 से 70 फीसदी है। ऐसी हालत में कीमतों में बढ़ोतरी को बनाए रखना मुश्किल हो सकती है।
Iran War Impact On India Iran War Latest Update Iindia-Iran War News Cement Price In India सीमेंट की कीमत ईरान युद्ध का सीमेंट पर असर ईरान युद्ध का सीमेंट उद्योग पर असर
