रविशंकर प्रसाद ने साल 1971 में पटना के सेंट जेवियर्स स्कूल से प्रथम श्रेणी से मैट्रीक की परीक्षा पास की थी.
रविशंकर प्रसाद ने साल 1971 में पटना के सेंट जेवियर्स स्कूल से प्रथम श्रेणी से मैट्रीक की परीक्षा पास की थी. साल 1972 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और कुछ ही दिनों में सक्रीय कार्यकर्ता भी बन गए.
भाजपा ने पटना साहिब लोकसभा सीट से शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काट दिया है. अब राज्यसभा सांसद और मोदी सरकार में कानून एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद इस सीट से चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे. पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे रविशंकर प्रसाद का राजनीतिक सफर कब शुरू हुआ और वे कब-कब किस पद पर आसीन रहे. आइए पढ़ते हैं पटना से नीलकमल की इस खास रिपोर्ट में.रविशंकर प्रसाद का जन्म 30 अगस्त 1954 को हुआ था. वे मोदी सरकार में दूसरी बार कानून मंत्री बने हैं. मोदी सरकार के पहले भी वो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कोयला, सूचना एवं जनसंपर्क के साथ-साथ कानून मंत्रालय की जिम्मेवारी संभाल चुके थे. दरअसल, केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो चुका था.बात यदि रविशंकर प्रसाद के छात्र जीवन की करें तो उन्होंने 1971 में पटना के सेंट जेवियर्स स्कूल से प्रथम श्रेणी से मैट्रीक की परीक्षा पास की थी. इसके बाद इसी साल वे पटना विश्वविद्यालय में नामांकन लेकर पढ़ाई शुरू कर दिए. साल 1972 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और कुछ ही दिनों में सक्रीय कार्यकर्ता भी बन गए. साल 1974 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में उन्हें संयुक्त सचिव चुना गया था. तब पटना विवि छात्र संघ के चुनाव में लालू प्रसाद अध्यक्ष और सुशील कुमार मोदी सचिव चुने गये थे. रविशंकर ने राजनीतिक शास्त्र में स्नातक करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन किया.साल 1975 से 1977 तक उन्होने विधि की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने पहला मुकदमा पटना विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ ही लड़ा था, क्योंकि कुलपति एक साथ दो पद पर आसीन थे और दोनों जगह से वेतन उठाते थे. ऐसे में रविशंकर प्रसाद के केस लड़ने से कुलपति को दूसरे पद से हटना पड़ा था.जेपी आंदेलन के वक्त रविशंकर प्रसाद सक्रीय रूप से जेपी के कहने पर काम करते थे. आपातकाल के दौरान जब सभी अखबारों में कुछ भी लिखने की पाबंदी थी तब रविशंकर प्रसाद ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर लोकवाणी अखबार निकाला और भूमिगत प्रेस के जरिए आपातकाल के विरूद्ध काफी बातें लिखीं. जेपी की गिरफ्तारी के बाद रविशंकर प्रसाद ने काफी उग्र होकर लेखन किया. फिलहाल, वे नरेन्द्र मोदी सरकार में कैबीनेट के टॉप टेन में स्थान रखने वाले केन्द्रीय मंत्री के रूप में पहचान रखते हैं.रविशंकर प्रसाद साल 1981 में भाजपा के सक्रीय कार्यकर्ता के रूप में उभर कर सामने आए. इसी साल उनकी शादी वरीय अधिवक्ता की पुत्री माया शंकर से हुई थी.लेकिन मुख्यधारा की राजनीति में वे1990 के बाद आए. रविशंकर प्रसाद साल 1990 से 1994 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं. साथ ही वे बिहार भाजपा अधिवक्ता मंच के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं. वे बिहार भाजपा चुनाव समिति के अध्यक्ष पर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. साथ ही रविशंकर प्रसाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता भी रह चुके हैं.बता दें कि रविशंकर प्रसाद बाजपेयी सरकार में पहली बार मंत्री बने थे. तब उन्होंने कोयला, सूचना जनसंपर्क और कानून मंत्री पद की जिम्मेवाली संभाली थी. इसके अलावा वे राज्यसभा के उपनेता भी रहे हैं. रविशंकर प्रसाद अयोध्या में रामलला के वकील भी हैं. उन्हें 16वीं लोकसभा चुनाव अभियान समिति का मीडिया संयोजक बनाया गया था.
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