Uttar Pradesh (UP) PDA Strategy to strengthen equation by targeting Gujjar vote bank. Follow Dainik Bhaskar Latest Updates.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव रविवार को नोएडा दादरी में ‘समाजवादी समता भाईचारा रैली’ करेंगे। इसे सपा के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान का आगाज माना जा रहा है। सवाल यह है कि अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन शुरू करने के लिए नोएडा को ही क्यों चुना?दरअसल, पश्चिमी यूपी में गुर्जर वोट काफी अहम है। अब-तक ये भाजपा का साथ देता आया है। अब सपा इस गठजोड़ में सेंधमारी करना चाहती है। तो क्या यह जयंत चौधरी की कमी को गुर्जर वोटबैंक से पूरा करने की रणनीति है? क्या वाकई गुर्जर समाज सपा के साथ आएगा?पश्चिमी यूपी की 24 सीटों पर गुर्जर मजबूत पश्चिमी यूपी गुर्जर समुदाय काफी प्रभावशाली माना जाता है। गाजियाबाद, नोएडा, दादरी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, संभल, कैराना जैसी करीब 24 सीटों पर 20 से 70 हजार तक गुर्जर वोट हैं। 2014 से यह भाजपा का कोर वोट रहा है। लेकिन, सपा मुस्लिम-गुर्जर गठजोड़ से इसे तोड़ना चाहती है। यही वजह है कि सपा अपनी रैली में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक के साथ गुर्जर वोटबैंक पर भी फोकस कर रही है।समाजवादी पार्टी ने 2022 का विधानसभा चुनाव जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के साथ मिलकर लड़ा था। लेकिन, लोकसभा चुनाव से पहले जयंत ने भाजपा से गठबंधन कर लिया था। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- लोकसभा चुनाव में इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। बिजनौर और बागपत में रालोद ने जीत हासिल की, लेकिन उसका वोट पूरी तरह से भाजपा को शिफ्ट नहीं हुआ। यही वजह रही कि सपा-कांग्रेस गठबंधन ने रालोद का गढ़ मानी जाने वाली मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर सीटें जीत लीं। अब चुनाव विधानसभा का है। ऐसे में सपा कोई काेर कसर नहीं छोड़ना चाहती। वो अपने सबसे कमजाेर इलाके से शुरुआत कर रही है। ऐसे में अगर वहां सपा के गुर्जर नेता भीड़ जुटाने में कामयाब रहते हैं, तो ये रैली भाजपा के साथ रालोद के माथे पर भी चिंता की लकीरें बढ़ा देगी। सपा 20-25% गुर्जर वोट भी पाती है, तो कई सीटों के समीकरण बदल जाएंगे।2022 में रालोद और सपा गठबंधन का पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर असर पड़ा था। शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर जैसे जिलों में सपा-रालोद गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था। वहीं, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ जैसे जिलों में गठबंधन को काफी संघर्ष करना पड़ा था। चुनाव के नतीजे आने के बाद रालोद सपा से अलग होकर भाजपा के साथ चली गई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यूपी की 80 में से 43 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर जैसी सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, अलीगढ़, मेरठ, फर्रुखाबाद, अमरोहा जैसी सीट पर हार का मार्जिन काफी कम था।नोएडा सपा की सबसे कमजोर कड़ी है। अखिलेश यादव का कहना है कि वे सबसे कमजोर क्षेत्र से अभियान की शुरुआत इसलिए कर रहे, जिससे संगठन की कमियां परखने के साथ साथ गुर्जर समाज में अपनी पैठ का मुआयना कर सकें। रैली का पूरा फोकस गुर्जर समाज पर है। अखिलेश यादव चेक करना चाहते हैं कि गुर्जर समाज के जो नेता लखनऊ आकर पूरे समाज के सपाई होने का दावा करते हैं, उसमें कितनी सच्चाई है। दरअसल, दादरी सीट पर सपा कभी जीत ही नहीं पाई है। पहले बसपा और अब भाजपा यहां काफी मजबूत है। यही वजह है कि पश्चिमी यूपी के कुछ नेताओं ने जब अखिलेश से पूछा कि क्या दादरी रैली उन्हें अपने इलाके से भी लोगों को लेकर आना है? इस पर अखिलेश का सीधा जवाब था- बिल्कुल नहीं। उनका कहना था कि हम उस क्षेत्र के नेताओं को परखना चाहते हैं, जो लखनऊ आकर बड़े-बड़े दावे करते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। भाषण देते समय वे सपा पर हमलावर थे। अब रविवार को अखिलेश यादव नोएडा के दादरी में रैली कर रहे हैं। जाहिर-सी बात है, वे भाजपा की केंद्र और यूपी सरकार पर निशाना साधेंगे। अखिलेश ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद एक्स पर पोस्ट लिखकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन और सपा की रैली के बाद विकास बनाम जमीनी हकीकत का मुद्दा केंद्र में रहेगा। जहां एक ओर भाजपा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से विकास का संदेश दे रही, वहीं विपक्ष इन्हीं प्रोजेक्ट्स को आधार बनाकर जमीनी समस्याओं और सामाजिक समीकरणों को उठाने की कोशिश करेगा।सपा रैली को बता रही भाईचारा सम्मेलन सपा दादरी रैली को आधिकारिक तौर पर चुनावी अभियान की नहीं कह रही। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई कहते हैं- पश्चिमी यूपी राजनीति के लिहाज से अहम है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में जाट और गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। सपा भाईचारा सम्मेलन करने जा रही है। इसमें दोनों वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे। जहां तक चुनावी अभियान की बात है, तो सपा ने अपना अभियान 2024 लोकसभा के चुनाव के बाद से ही शुरू कर दिया था। अखिलेश यादव लगातार जिलों में जा रहे हैं। कुछ जगहों पर सभाएं भी हुई हैं। ये बात जरूर है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा ये सिलसिला और बढ़ेगा।मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया, नोएडा में बोले- युद्ध के संकट से देश को एकजुट होकर लड़ना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को यूपी के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्घाटन किया। 4 फेज पूरे होने पर एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हो जाएगा।पूर्व मंत्री के कोल्ड स्टोरेज पर चलेगा बुलडोजरहिमाचल के 5 जिलों में कल ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्टआंधी-बारिश से सहरसा में भरा पानी, किशनगंज में घने बादलगाजियाबाद में आज बारिश का अलर्टआगरा में कल से 3 दिन तक आंधी-बारिश का अलर्ट.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव रविवार को नोएडा दादरी में ‘समाजवादी समता भाईचारा रैली’ करेंगे। इसे सपा के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान का आगाज माना जा रहा है। सवाल यह है कि अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन शुरू करने के लिए नोएडा को ही क्यों चुना?दरअसल, पश्चिमी यूपी में गुर्जर वोट काफी अहम है। अब-तक ये भाजपा का साथ देता आया है। अब सपा इस गठजोड़ में सेंधमारी करना चाहती है। तो क्या यह जयंत चौधरी की कमी को गुर्जर वोटबैंक से पूरा करने की रणनीति है? क्या वाकई गुर्जर समाज सपा के साथ आएगा?पश्चिमी यूपी की 24 सीटों पर गुर्जर मजबूत पश्चिमी यूपी गुर्जर समुदाय काफी प्रभावशाली माना जाता है। गाजियाबाद, नोएडा, दादरी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, संभल, कैराना जैसी करीब 24 सीटों पर 20 से 70 हजार तक गुर्जर वोट हैं। 2014 से यह भाजपा का कोर वोट रहा है। लेकिन, सपा मुस्लिम-गुर्जर गठजोड़ से इसे तोड़ना चाहती है। यही वजह है कि सपा अपनी रैली में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक के साथ गुर्जर वोटबैंक पर भी फोकस कर रही है।समाजवादी पार्टी ने 2022 का विधानसभा चुनाव जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के साथ मिलकर लड़ा था। लेकिन, लोकसभा चुनाव से पहले जयंत ने भाजपा से गठबंधन कर लिया था। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- लोकसभा चुनाव में इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। बिजनौर और बागपत में रालोद ने जीत हासिल की, लेकिन उसका वोट पूरी तरह से भाजपा को शिफ्ट नहीं हुआ। यही वजह रही कि सपा-कांग्रेस गठबंधन ने रालोद का गढ़ मानी जाने वाली मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर सीटें जीत लीं। अब चुनाव विधानसभा का है। ऐसे में सपा कोई काेर कसर नहीं छोड़ना चाहती। वो अपने सबसे कमजाेर इलाके से शुरुआत कर रही है। ऐसे में अगर वहां सपा के गुर्जर नेता भीड़ जुटाने में कामयाब रहते हैं, तो ये रैली भाजपा के साथ रालोद के माथे पर भी चिंता की लकीरें बढ़ा देगी। सपा 20-25% गुर्जर वोट भी पाती है, तो कई सीटों के समीकरण बदल जाएंगे।2022 में रालोद और सपा गठबंधन का पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर असर पड़ा था। शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर जैसे जिलों में सपा-रालोद गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था। वहीं, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ जैसे जिलों में गठबंधन को काफी संघर्ष करना पड़ा था। चुनाव के नतीजे आने के बाद रालोद सपा से अलग होकर भाजपा के साथ चली गई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यूपी की 80 में से 43 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर जैसी सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, अलीगढ़, मेरठ, फर्रुखाबाद, अमरोहा जैसी सीट पर हार का मार्जिन काफी कम था।नोएडा सपा की सबसे कमजोर कड़ी है। अखिलेश यादव का कहना है कि वे सबसे कमजोर क्षेत्र से अभियान की शुरुआत इसलिए कर रहे, जिससे संगठन की कमियां परखने के साथ साथ गुर्जर समाज में अपनी पैठ का मुआयना कर सकें। रैली का पूरा फोकस गुर्जर समाज पर है। अखिलेश यादव चेक करना चाहते हैं कि गुर्जर समाज के जो नेता लखनऊ आकर पूरे समाज के सपाई होने का दावा करते हैं, उसमें कितनी सच्चाई है। दरअसल, दादरी सीट पर सपा कभी जीत ही नहीं पाई है। पहले बसपा और अब भाजपा यहां काफी मजबूत है। यही वजह है कि पश्चिमी यूपी के कुछ नेताओं ने जब अखिलेश से पूछा कि क्या दादरी रैली उन्हें अपने इलाके से भी लोगों को लेकर आना है? इस पर अखिलेश का सीधा जवाब था- बिल्कुल नहीं। उनका कहना था कि हम उस क्षेत्र के नेताओं को परखना चाहते हैं, जो लखनऊ आकर बड़े-बड़े दावे करते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। भाषण देते समय वे सपा पर हमलावर थे। अब रविवार को अखिलेश यादव नोएडा के दादरी में रैली कर रहे हैं। जाहिर-सी बात है, वे भाजपा की केंद्र और यूपी सरकार पर निशाना साधेंगे। अखिलेश ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद एक्स पर पोस्ट लिखकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन और सपा की रैली के बाद विकास बनाम जमीनी हकीकत का मुद्दा केंद्र में रहेगा। जहां एक ओर भाजपा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से विकास का संदेश दे रही, वहीं विपक्ष इन्हीं प्रोजेक्ट्स को आधार बनाकर जमीनी समस्याओं और सामाजिक समीकरणों को उठाने की कोशिश करेगा।सपा रैली को बता रही भाईचारा सम्मेलन सपा दादरी रैली को आधिकारिक तौर पर चुनावी अभियान की नहीं कह रही। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई कहते हैं- पश्चिमी यूपी राजनीति के लिहाज से अहम है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में जाट और गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। सपा भाईचारा सम्मेलन करने जा रही है। इसमें दोनों वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे। जहां तक चुनावी अभियान की बात है, तो सपा ने अपना अभियान 2024 लोकसभा के चुनाव के बाद से ही शुरू कर दिया था। अखिलेश यादव लगातार जिलों में जा रहे हैं। कुछ जगहों पर सभाएं भी हुई हैं। ये बात जरूर है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा ये सिलसिला और बढ़ेगा।मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया, नोएडा में बोले- युद्ध के संकट से देश को एकजुट होकर लड़ना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को यूपी के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्घाटन किया। 4 फेज पूरे होने पर एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हो जाएगा।पूर्व मंत्री के कोल्ड स्टोरेज पर चलेगा बुलडोजरहिमाचल के 5 जिलों में कल ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्टआंधी-बारिश से सहरसा में भरा पानी, किशनगंज में घने बादलगाजियाबाद में आज बारिश का अलर्टआगरा में कल से 3 दिन तक आंधी-बारिश का अलर्ट
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