गुजरात और पश्चिम बंगाल में SIR ड्यूटी के दौरान दो और BLO की हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिवारों ने आरोप लगाया कि अत्यधिक काम का दबाव, लंबे घंटों की ड्यूटी और तकनीकी दिक्कतों ने उनकी सेहत पर गंभीर असर डालकर यह स्थिति पैदा की।
कोलकाता: देशभर में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों पर बढ़ते दबाव का असर देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल और गुजरात में दो और बीएलओ की हार्ट अटैक से मौत हो गई। दोनों ही सरकारी स्कूलों में शिक्षक थे। इससे पहले भी विभिन्न राज्यों में कई बीएलओ की स्वास्थ्य स्थिति खराब हुई थी, जिनमें से कई की मौत हो चुकी है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के 55 वर्षीय जाकिर हुसैन और गुजरात के मेहसाणा जिले के सुधारसना गांव के 50 वर्षीय दिनेश रावल की अचानक मौत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंगाल में अब तक चार बीएलओ की मौत हो चुकी है, जबकि 14 अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से दो महिला बीएलओ ने तनाव के चलते फांसी लगाकर जान दे दी थी। गुजरात में अब तक पांच बीएलओ की मौत दर्ज की गई है, इनमें चार हार्ट अटैक से और एक ने आत्महत्या की।परिवार का आरोपजाकिर हुसैन के परिवार ने चुनाव आयोग के कामकाज और तकनीकी खामियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि जाकिर एक आधे-अधूरे तरीके से चलने वाले बीएलओ ऐप में डेटा अपलोड करने में घंटों उलझे रहते थे। यह प्रक्रिया बेहद थकाऊ और तनावपूर्ण थी। रिश्तेदारों का दावा है कि जाकिर एक साथ बीएलओ ड्यूटी और स्कूल की नियमित जिम्मेदारियों को निभाने के दबाव में थे। स्कूल प्रशासन ने एसआईआर कार्य के लिए उन्हें छुट्टी देने से भी मना कर दिया था, जिसके कारण उनका तनाव लगातार बढ़ता गया। स्थानीय तृणमूल कांग्रेस विधायक आशीष मारजीत और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर बीएलओ पर अत्यधिक बोझ डालने का आरोप लगाया है। दोनों नेताओं ने जाकिर के परिवार के लिए मुआवजे और एक आश्रित को नौकरी देने की मांग की है।गुजरात में भी उठी आवाज, लेकिन पुलिस ने नकारागुजरात में भी कांग्रेस और शिक्षकों के संगठनों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में तेजी लाने के लिए अधिकारियों ने बीएलओ पर अत्यधिक दबाव डाला। उनका कहना है कि तनाव, लंबी ड्यूटी और लक्ष्य पूरा करने का भारी बोझ इन मौतों की वजह बना है। हालांकि जांच अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि मौतों के कारणों की मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तथ्य सामने आएंगे। इन घटनाओं ने एसआईआर कार्य की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएलओ का कहना है कि फील्ड में लगातार दौरा, तकनीकी खामियां और सीमित समय में लक्ष्य पूरा करने का दबाव उनकी सेहत पर भारी पड़ रहा है।.
कोलकाता: देशभर में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों पर बढ़ते दबाव का असर देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल और गुजरात में दो और बीएलओ की हार्ट अटैक से मौत हो गई। दोनों ही सरकारी स्कूलों में शिक्षक थे। इससे पहले भी विभिन्न राज्यों में कई बीएलओ की स्वास्थ्य स्थिति खराब हुई थी, जिनमें से कई की मौत हो चुकी है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के 55 वर्षीय जाकिर हुसैन और गुजरात के मेहसाणा जिले के सुधारसना गांव के 50 वर्षीय दिनेश रावल की अचानक मौत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंगाल में अब तक चार बीएलओ की मौत हो चुकी है, जबकि 14 अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से दो महिला बीएलओ ने तनाव के चलते फांसी लगाकर जान दे दी थी। गुजरात में अब तक पांच बीएलओ की मौत दर्ज की गई है, इनमें चार हार्ट अटैक से और एक ने आत्महत्या की।परिवार का आरोपजाकिर हुसैन के परिवार ने चुनाव आयोग के कामकाज और तकनीकी खामियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि जाकिर एक आधे-अधूरे तरीके से चलने वाले बीएलओ ऐप में डेटा अपलोड करने में घंटों उलझे रहते थे। यह प्रक्रिया बेहद थकाऊ और तनावपूर्ण थी। रिश्तेदारों का दावा है कि जाकिर एक साथ बीएलओ ड्यूटी और स्कूल की नियमित जिम्मेदारियों को निभाने के दबाव में थे। स्कूल प्रशासन ने एसआईआर कार्य के लिए उन्हें छुट्टी देने से भी मना कर दिया था, जिसके कारण उनका तनाव लगातार बढ़ता गया। स्थानीय तृणमूल कांग्रेस विधायक आशीष मारजीत और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर बीएलओ पर अत्यधिक बोझ डालने का आरोप लगाया है। दोनों नेताओं ने जाकिर के परिवार के लिए मुआवजे और एक आश्रित को नौकरी देने की मांग की है।गुजरात में भी उठी आवाज, लेकिन पुलिस ने नकारागुजरात में भी कांग्रेस और शिक्षकों के संगठनों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में तेजी लाने के लिए अधिकारियों ने बीएलओ पर अत्यधिक दबाव डाला। उनका कहना है कि तनाव, लंबी ड्यूटी और लक्ष्य पूरा करने का भारी बोझ इन मौतों की वजह बना है। हालांकि जांच अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि मौतों के कारणों की मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तथ्य सामने आएंगे। इन घटनाओं ने एसआईआर कार्य की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएलओ का कहना है कि फील्ड में लगातार दौरा, तकनीकी खामियां और सीमित समय में लक्ष्य पूरा करने का दबाव उनकी सेहत पर भारी पड़ रहा है।
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