रूसी हथियारों और सैन्य उपकरणों में चाइनीज चिप लगे होने की आशंका ने रक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, रूस ने ऐसी तमाम खबरों को गुमराह करने वाला बताया है।
नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना को जल्द से जल्द पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट की आवश्यकता है। स्वदेशी एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अभी कम से कम एक दशक दूर है। विचारों में रूसी Su-57 भी है, जो एक स्टील्थ फाइटर जेट है। लेकिन, क्या इनमें चाइनीज चिप लगा हुआ है? मित्र राष्ट्र रूस की ओर से इसका पूरी तरह से खंडन किए जाने के बावजूद भारतीय सुरक्षा संगठनों में चिंता बढ़नी स्वभाविक है। यही चिंता रूसी S-400 और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी पैदा हो गई है।डिफेंस-वेपन सिस्टम में चाइनीज घुसपैठ!रूस में बने संवेदनशील डिफेंस और वेपन सिस्टम में चाइनीज माइक्रोचिप और मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट के इस्तेमाल की अटकलों ने भारत समेत उन देशों में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो ऐसे कई सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं या भविष्य में करना चाहते हैं। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे संदिग्ध रूसी सिस्टम महत्वपूर्ण डिफेंस प्लेटफॉर्म में शामिल होते हैं तो इससे युद्ध के दौरान न सिर्फ साइबर जासूसी और डेटा चोरी हो सकती है, बल्कि सैन्य अभियानों में रुकावटें भी पैदा हो सकती हैं।चाइनीज चिप की आशंका से बढ़ रही चिंतारूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के तीन स्क्वाड्रन पहले से ही भारत में मौजूद हैं और दो और आने वाले हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इसने भारतीय एयर डिफेंस में बहुत ही बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में इस तरह के किसी भी सिस्टम में चीन की जरा सी भी घुसपैठ की आशंका नींद उड़ाने वाली है। रूस-यूक्रेन युद्ध के हालातों ने दी और हवाइन आशंकाओं को हवा मिलने की पुख्ता वजह हैं। दुनिया में सेमीकंडक्टर की भारी किल्लत है। ऊपर से रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से अमेरिका और पश्चिम देशों ने रूस पर चौतरफा पाबंदियां लगा रखी हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि कहीं रूस क्रिटिकल इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट के लिए वैकल्पिक सप्लायर की ओर ताकना न शुरू कर दिया हो। कुछ विश्लेषकों की दलील है कि भारी-भरकम हथियारों के लिए चीनी उपकरणों पर किसी भी तरह से संभावित निर्भरता रूसी सिस्टम इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक जोखिम साबित हो सकता है।चिप देश में ही बनाने का रूस का दावावैसे रूस की ओर से इन दावों का पूरी तरह से खंडन किया जा रहा है रूसी अधिकारियों और वहां के रक्षा उद्योग सू्त्रों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट पूरी तरह से गुमराह करने वाली है और पांचवीं पीढ़ी के जो भी अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म बन रहे हैं, उसके लिए सारे संवेदनशील कल-पुर्जों का देश में ही तेजी से उत्पादन हो रहा है। रूस का कहना है कि Su-57 और S-500 जैसे प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले सारे क्रिटिकल माइक्रोवेव चिप और कंट्रोल सिस्टम या तो पहले से ही देश में बन रहे हैं या उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पादन के लिए दिया गया है। भारत के पास क्या है रूस का विकल्पजिस तरह की खबरें आई हैं, वो भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह से काफी महत्वपूर्ण हैं। भारत S-400 को पहले ही अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर चुका है और इनकी तैनाती अहम जगहों पर की जा चुकी है। यह आज की तारीख में भारत का सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम बन चुका है। इस दौरान उससे इसकी बाकी बचे दो स्क्वाड्रन मंगवाने के अलावा अतिरिक्त खेप और इसके एडवांस वर्जन S-500 की संभावित खरीद की भी चर्चा हो रही है। वहीं भारत को अगर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट तत्काल चाहिए तो अमेरिकी F-35 के अलावा रूसी SU-57 ही विकल्प दिख रहा है। क्योंकि, स्वदेशी एएमसीए फिलहाल दूर की कौड़ी है।.
नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना को जल्द से जल्द पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट की आवश्यकता है। स्वदेशी एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अभी कम से कम एक दशक दूर है। विचारों में रूसी Su-57 भी है, जो एक स्टील्थ फाइटर जेट है। लेकिन, क्या इनमें चाइनीज चिप लगा हुआ है? मित्र राष्ट्र रूस की ओर से इसका पूरी तरह से खंडन किए जाने के बावजूद भारतीय सुरक्षा संगठनों में चिंता बढ़नी स्वभाविक है। यही चिंता रूसी S-400 और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी पैदा हो गई है।डिफेंस-वेपन सिस्टम में चाइनीज घुसपैठ!रूस में बने संवेदनशील डिफेंस और वेपन सिस्टम में चाइनीज माइक्रोचिप और मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट के इस्तेमाल की अटकलों ने भारत समेत उन देशों में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो ऐसे कई सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं या भविष्य में करना चाहते हैं। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे संदिग्ध रूसी सिस्टम महत्वपूर्ण डिफेंस प्लेटफॉर्म में शामिल होते हैं तो इससे युद्ध के दौरान न सिर्फ साइबर जासूसी और डेटा चोरी हो सकती है, बल्कि सैन्य अभियानों में रुकावटें भी पैदा हो सकती हैं।चाइनीज चिप की आशंका से बढ़ रही चिंतारूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के तीन स्क्वाड्रन पहले से ही भारत में मौजूद हैं और दो और आने वाले हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इसने भारतीय एयर डिफेंस में बहुत ही बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में इस तरह के किसी भी सिस्टम में चीन की जरा सी भी घुसपैठ की आशंका नींद उड़ाने वाली है। रूस-यूक्रेन युद्ध के हालातों ने दी और हवाइन आशंकाओं को हवा मिलने की पुख्ता वजह हैं। दुनिया में सेमीकंडक्टर की भारी किल्लत है। ऊपर से रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से अमेरिका और पश्चिम देशों ने रूस पर चौतरफा पाबंदियां लगा रखी हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि कहीं रूस क्रिटिकल इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट के लिए वैकल्पिक सप्लायर की ओर ताकना न शुरू कर दिया हो। कुछ विश्लेषकों की दलील है कि भारी-भरकम हथियारों के लिए चीनी उपकरणों पर किसी भी तरह से संभावित निर्भरता रूसी सिस्टम इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक जोखिम साबित हो सकता है।चिप देश में ही बनाने का रूस का दावावैसे रूस की ओर से इन दावों का पूरी तरह से खंडन किया जा रहा है रूसी अधिकारियों और वहां के रक्षा उद्योग सू्त्रों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट पूरी तरह से गुमराह करने वाली है और पांचवीं पीढ़ी के जो भी अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म बन रहे हैं, उसके लिए सारे संवेदनशील कल-पुर्जों का देश में ही तेजी से उत्पादन हो रहा है। रूस का कहना है कि Su-57 और S-500 जैसे प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले सारे क्रिटिकल माइक्रोवेव चिप और कंट्रोल सिस्टम या तो पहले से ही देश में बन रहे हैं या उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पादन के लिए दिया गया है। भारत के पास क्या है रूस का विकल्पजिस तरह की खबरें आई हैं, वो भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह से काफी महत्वपूर्ण हैं। भारत S-400 को पहले ही अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर चुका है और इनकी तैनाती अहम जगहों पर की जा चुकी है। यह आज की तारीख में भारत का सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम बन चुका है। इस दौरान उससे इसकी बाकी बचे दो स्क्वाड्रन मंगवाने के अलावा अतिरिक्त खेप और इसके एडवांस वर्जन S-500 की संभावित खरीद की भी चर्चा हो रही है। वहीं भारत को अगर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट तत्काल चाहिए तो अमेरिकी F-35 के अलावा रूसी SU-57 ही विकल्प दिख रहा है। क्योंकि, स्वदेशी एएमसीए फिलहाल दूर की कौड़ी है।
S 500 Su 57 Chinese Chips India Russia India Russia China रूसी हथियारों में चाइनीज चिप भारत रूस चीन स्टील्थ फाइटर जेट Amca
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
रूस से Su-57 जेट खरीदे तो कड़े प्रतिबंध लगाएंगे, अमेरिका की अल्जीरिया को धमकी, भारत की क्यों बढ़ेगी टेंशन?अल्जीरिया के रूसी फाइटर जेट खरीदने ने ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के लिए चिंता पैदा की है। यूएस बैन लगाने के लिए काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट (CATSA) का इस्तेमाल कर सकता है।
Read more »
Su-57 सौदा: भारत की हवाई ताकत में नए युग का उदयभारत और रूस के बीच Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है। भारतीय सूत्रों के मुताबिक, तीन विकल्प हैं: सीधे विमान खरीदना, सीमित बदलावों के साथ लाइसेंस उत्पादन, और भारतीय एवियोनिक्स और सॉफ्टवेयर से लैस पूरी तरह कस्टमाइज्ड Su-57। यह सौदा भारत को एवियोनिक्स आर्किटेक्चर बदलने का अवसर देगा और रूस के साथ साझेदारी को मजबूत करेगा। अगर यह योजना सफल होती है, तो भारत अपनी खुद की पांचवीं पीढ़ी की हवाई ताकत बना पाएगा।
Read more »
Su-57 सौदा: भारत की हवाई ताकत में अभूतपूर्व बदलावभारत और रूस के बीच Su-57 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर चल रही बातचीत अब एडवांस टेक्निकल स्टेज में पहुंच चुकी है, जिसमें भारतीय एवियोनिक्स और सॉफ्टवेयर से लैस पूरी तरह कस्टमाइज्ड Su-57 बनाने पर ज़ोर है। यह सौदा भारत को न केवल विमान खरीदने का अवसर देगा, बल्कि उसे अपनी खुद की तकनीक और रणनीति के साथ विमान को विकसित करने की क्षमता भी देगा। रूस ने Su-57 का पूरा सोर्स कोड भारत को देने की पेशकश की है, जो गेमचेंजर साबित हो सकता है।
Read more »
F-35 और Su-57 का 'छोटा भाई' मचाएगा तबाही, पाकिस्तानी JF-17 का है बाप, डील होने जा रही पक्की!Rafale deal: भारत की आसमानी ताकत और बढ़ने वाली है. भारत 114 राफेल डील को पक्का करने में जुट चुका है. जी हां, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इसी महीने भारत के दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले देश का रक्षा मंत्रालय भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकता है.
Read more »
S-400, S-500 और Su-57 में चाइनीज चिप? इसी वजह से तो नहीं अटका रूसी 5th जेन जेट की डील, भारत ने दबाया पैनिक ...S-400 and Su-57 Chinese Chips: भारत अपने डिफेंस इक्विपमेंट और वेपन सिस्टम के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर है. नई दिल्ली और मॉस्को के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है, पर एक खबर ने भारत की नींद उड़ा दी है. इसमें चीन का इन्वॉल्वमेंट सामने आने से इंडियन डिफेंस डिपार्टमेंट का पूरा महकमा हिल गया है.
Read more »
West Bengal Assembly Election 2026: ভোটের আগেই বাংলায় বহরে বাড়ছে মিম! বড়সড় শক্তিক্ষয় শাসকের, বাজেটের পরই ৫০০ সংখ্যালঘু পরিবার...West Bengal Assembly Election 2026: 500 minor families from TMC join AIMIM in Malda
Read more »
