S-400, S-500, Su-57 में चाइनीज चिप? भारत-रूस के बीच डील की चर्चा से पहले चीनी घुसपैठ की चिंता

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S-400, S-500, Su-57 में चाइनीज चिप? भारत-रूस के बीच डील की चर्चा से पहले चीनी घुसपैठ की चिंता
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रूसी हथियारों और सैन्य उपकरणों में चाइनीज चिप लगे होने की आशंका ने रक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, रूस ने ऐसी तमाम खबरों को गुमराह करने वाला बताया है।

नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना को जल्द से जल्द पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट की आवश्यकता है। स्वदेशी एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अभी कम से कम एक दशक दूर है। विचारों में रूसी Su-57 भी है, जो एक स्टील्थ फाइटर जेट है। लेकिन, क्या इनमें चाइनीज चिप लगा हुआ है? मित्र राष्ट्र रूस की ओर से इसका पूरी तरह से खंडन किए जाने के बावजूद भारतीय सुरक्षा संगठनों में चिंता बढ़नी स्वभाविक है। यही चिंता रूसी S-400 और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी पैदा हो गई है।डिफेंस-वेपन सिस्टम में चाइनीज घुसपैठ!रूस में बने संवेदनशील डिफेंस और वेपन सिस्टम में चाइनीज माइक्रोचिप और मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट के इस्तेमाल की अटकलों ने भारत समेत उन देशों में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो ऐसे कई सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं या भविष्य में करना चाहते हैं। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे संदिग्ध रूसी सिस्टम महत्वपूर्ण डिफेंस प्लेटफॉर्म में शामिल होते हैं तो इससे युद्ध के दौरान न सिर्फ साइबर जासूसी और डेटा चोरी हो सकती है, बल्कि सैन्य अभियानों में रुकावटें भी पैदा हो सकती हैं।चाइनीज चिप की आशंका से बढ़ रही चिंतारूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के तीन स्क्वाड्रन पहले से ही भारत में मौजूद हैं और दो और आने वाले हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इसने भारतीय एयर डिफेंस में बहुत ही बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में इस तरह के किसी भी सिस्टम में चीन की जरा सी भी घुसपैठ की आशंका नींद उड़ाने वाली है। रूस-यूक्रेन युद्ध के हालातों ने दी और हवाइन आशंकाओं को हवा मिलने की पुख्ता वजह हैं। दुनिया में सेमीकंडक्टर की भारी किल्लत है। ऊपर से रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से अमेरिका और पश्चिम देशों ने रूस पर चौतरफा पाबंदियां लगा रखी हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि कहीं रूस क्रिटिकल इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट के लिए वैकल्पिक सप्लायर की ओर ताकना न शुरू कर दिया हो। कुछ विश्लेषकों की दलील है कि भारी-भरकम हथियारों के लिए चीनी उपकरणों पर किसी भी तरह से संभावित निर्भरता रूसी सिस्टम इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक जोखिम साबित हो सकता है।चिप देश में ही बनाने का रूस का दावावैसे रूस की ओर से इन दावों का पूरी तरह से खंडन किया जा रहा है रूसी अधिकारियों और वहां के रक्षा उद्योग सू्त्रों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट पूरी तरह से गुमराह करने वाली है और पांचवीं पीढ़ी के जो भी अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म बन रहे हैं, उसके लिए सारे संवेदनशील कल-पुर्जों का देश में ही तेजी से उत्पादन हो रहा है। रूस का कहना है कि Su-57 और S-500 जैसे प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले सारे क्रिटिकल माइक्रोवेव चिप और कंट्रोल सिस्टम या तो पहले से ही देश में बन रहे हैं या उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पादन के लिए दिया गया है। भारत के पास क्या है रूस का विकल्पजिस तरह की खबरें आई हैं, वो भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह से काफी महत्वपूर्ण हैं। भारत S-400 को पहले ही अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर चुका है और इनकी तैनाती अहम जगहों पर की जा चुकी है। यह आज की तारीख में भारत का सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम बन चुका है। इस दौरान उससे इसकी बाकी बचे दो स्क्वाड्रन मंगवाने के अलावा अतिरिक्त खेप और इसके एडवांस वर्जन S-500 की संभावित खरीद की भी चर्चा हो रही है। वहीं भारत को अगर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट तत्काल चाहिए तो अमेरिकी F-35 के अलावा रूसी SU-57 ही विकल्प दिख रहा है। क्योंकि, स्वदेशी एएमसीए फिलहाल दूर की कौड़ी है।.

नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना को जल्द से जल्द पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट की आवश्यकता है। स्वदेशी एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अभी कम से कम एक दशक दूर है। विचारों में रूसी Su-57 भी है, जो एक स्टील्थ फाइटर जेट है। लेकिन, क्या इनमें चाइनीज चिप लगा हुआ है? मित्र राष्ट्र रूस की ओर से इसका पूरी तरह से खंडन किए जाने के बावजूद भारतीय सुरक्षा संगठनों में चिंता बढ़नी स्वभाविक है। यही चिंता रूसी S-400 और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी पैदा हो गई है।डिफेंस-वेपन सिस्टम में चाइनीज घुसपैठ!रूस में बने संवेदनशील डिफेंस और वेपन सिस्टम में चाइनीज माइक्रोचिप और मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट के इस्तेमाल की अटकलों ने भारत समेत उन देशों में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो ऐसे कई सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं या भविष्य में करना चाहते हैं। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे संदिग्ध रूसी सिस्टम महत्वपूर्ण डिफेंस प्लेटफॉर्म में शामिल होते हैं तो इससे युद्ध के दौरान न सिर्फ साइबर जासूसी और डेटा चोरी हो सकती है, बल्कि सैन्य अभियानों में रुकावटें भी पैदा हो सकती हैं।चाइनीज चिप की आशंका से बढ़ रही चिंतारूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के तीन स्क्वाड्रन पहले से ही भारत में मौजूद हैं और दो और आने वाले हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इसने भारतीय एयर डिफेंस में बहुत ही बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में इस तरह के किसी भी सिस्टम में चीन की जरा सी भी घुसपैठ की आशंका नींद उड़ाने वाली है। रूस-यूक्रेन युद्ध के हालातों ने दी और हवाइन आशंकाओं को हवा मिलने की पुख्ता वजह हैं। दुनिया में सेमीकंडक्टर की भारी किल्लत है। ऊपर से रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से अमेरिका और पश्चिम देशों ने रूस पर चौतरफा पाबंदियां लगा रखी हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि कहीं रूस क्रिटिकल इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट के लिए वैकल्पिक सप्लायर की ओर ताकना न शुरू कर दिया हो। कुछ विश्लेषकों की दलील है कि भारी-भरकम हथियारों के लिए चीनी उपकरणों पर किसी भी तरह से संभावित निर्भरता रूसी सिस्टम इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक जोखिम साबित हो सकता है।चिप देश में ही बनाने का रूस का दावावैसे रूस की ओर से इन दावों का पूरी तरह से खंडन किया जा रहा है रूसी अधिकारियों और वहां के रक्षा उद्योग सू्त्रों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट पूरी तरह से गुमराह करने वाली है और पांचवीं पीढ़ी के जो भी अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म बन रहे हैं, उसके लिए सारे संवेदनशील कल-पुर्जों का देश में ही तेजी से उत्पादन हो रहा है। रूस का कहना है कि Su-57 और S-500 जैसे प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले सारे क्रिटिकल माइक्रोवेव चिप और कंट्रोल सिस्टम या तो पहले से ही देश में बन रहे हैं या उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पादन के लिए दिया गया है। भारत के पास क्या है रूस का विकल्पजिस तरह की खबरें आई हैं, वो भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह से काफी महत्वपूर्ण हैं। भारत S-400 को पहले ही अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर चुका है और इनकी तैनाती अहम जगहों पर की जा चुकी है। यह आज की तारीख में भारत का सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम बन चुका है। इस दौरान उससे इसकी बाकी बचे दो स्क्वाड्रन मंगवाने के अलावा अतिरिक्त खेप और इसके एडवांस वर्जन S-500 की संभावित खरीद की भी चर्चा हो रही है। वहीं भारत को अगर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट तत्काल चाहिए तो अमेरिकी F-35 के अलावा रूसी SU-57 ही विकल्प दिख रहा है। क्योंकि, स्वदेशी एएमसीए फिलहाल दूर की कौड़ी है।

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