Success Story: जिसे सभी ने नकारा, उसी ने बनाया करोड़पति... कमाल का बिजनेस, हर महीने 5 लाख की कमाई

जालंधर कौन हैं News

Success Story: जिसे सभी ने नकारा, उसी ने बनाया करोड़पति... कमाल का बिजनेस, हर महीने 5 लाख की कमाई
जालंधर की सफलताजालंधर की सफलता की कहानीसफलता की कहानी
  • 📰 NBT Hindi News
  • ⏱ Reading Time:
  • 14 sec. here
  • 11 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 40%
  • Publisher: 51%

यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति के धैर्य, दूरदर्शिता और अटूट विश्वास की मिसाल है, जिन्‍होंने साधारण से पौधे में असाधारण भविष्य देखा। तमिलनाडु के छोटे से गांव ईसनम कुप्पम के जालंधर ने डेजर्ट रोज की खेती को अंतरराष्‍ट्रीय स्तर के लाभदायक कारोबार में बदल दिया। जिस पौधे को कभी सभी ने नकारा आज वही उनकी लाखों की कमाई कमाई का जरिया...

नई दिल्‍ली: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के छोटे से गांव ईसनम कुप्पम के जालंधर की एक पैधे ने किस्‍मत बदल दी। यह पौधा है डेजर्ट रोज। इसमें जालंधर ने वह क्षमता देखी, जो कोई और नहीं देख पाया। जब दूसरे इसे खारिज कर रहे थे, तब जालंधर ने इसमें सुंदरता, संभावना और लाभदायक भविष्य देखा। उनकी इसी दूरदर्शिता और लगन ने आज एक फलते-फूलते व्यवसाय का रूप ले लिया है। वह अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर डेजर्ट रोज की खेती करते हैं। यह व्यवसाय उन्हें महीने में 5 लाख रुपये की कमाई कराता है। उनके पौधे भारत के साथ-साथ दुबई, जमैका और मॉरीशस जैसे देशों में भी एक्‍सपोर्ट होते हैं। आइए, यहां जालंधर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।छोटे से आइडिया पर बड़ा विश्वास छोटे से आइडिया पर बड़ा विश्वास' imgsize='81740' >तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के एक छोटे से गांव ईसनम कुप्पम के रहने वाले जालंधर ने वह देखा लिया जो दूसरे नहीं देख सके। जब उन्होंने पहली बार डेजर्ट रोज नाम के पौधे को देखा तो दूसरों ने इसे 'अति-विदेशी' और 'कमजोर बिजनेस आइडिया' कहकर खारिज कर दिया। जालंधर 40 सालों से बागवानी कर रहे थे। उन्‍होंने इस पौधे में सौंदर्य और लाभदायक भविष्य की संभावना देखी। आज उनका यही अटूट विश्वास एक फलता-फूलता कारोबार बन गया है। यह उन्हें सालाना 60 लाख रुपये तक कमाकर दे रहा है।सीखने के लिए विदेश तक गए सीखने के लिए विदेश तक गए' imgsize='40622' >जालंधर की यह सफल यात्रा 1986 में शुरू हुई। तब उन्होंने डेजर्ट रोज की अपनी पहली खेप मुंबई से जुटाई। इसके बाद उन्होंने ग्राफ्टिंग और हाइब्रिडाइजेशन के रहस्यों को जानने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। जालंधर ने थाईलैंड, ताइवान और वियतनाम की यात्रा की। यह उनके साधारण जीवन से बहुत दूर एक बड़ा जोखिम था। लेकिन, उनका साहस और सीखने की लगन उन्हें दूर तक ले गई। अपनी यात्राओं से हासिल ज्ञान के दम पर उन्होंने जल्द ही इस खास पौधे के उत्पादन में महारत हासिल कर ली।150 रुपये से 12 लाख रुपये तक पौधा 150 रुपये से 12 लाख रुपये तक पौधा' imgsize='73466' >आज जालंधर का 15 एकड़ का फार्म 450 से ज्‍यादा प्रकार के डेजर्ट रोज का घर है। इनमें से हर एक किस्‍म तीन अलग-अलग तरह के फूलों के साथ कई रंगों में खिल सकती है। उनकी मेहनत ने इन पौधों को 150 रुपये के छोटे पौधे से लेकर 12 लाख रुपये तक की कीमत वाले दुर्लभ, मोटी जड़ों वाले और कलात्मक रूप वाले पौधे में बदल दिया है। इन पौधों की खास बात यह है कि ये आसानी से बढ़ते हैं। इन्हें किसी उर्वरक की जरूरत नहीं होती। बस, थोड़ी धूप और सप्ताह में दो बार पानी चाहिए। इसी मजबूती के कारण जालंधर इन्हें पूरे भारत के साथ दुबई, जमैका और मॉरीशस जैसे देशों में भी एक्सपोर्ट कर पाते हैं।काम को मिली सराहना काम को मिली सराहना ' imgsize='105518' >अपनी सफलता के बावजूद जालंधर ऑनलाइन बिक्री से बचते हैं। कारण है कि उनका सामना धोखाधड़ी करने वाले विक्रेताओं से हुआ। ऐसे में वह ग्राहकों को सीधे फार्म पर आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनके काम को तमिलनाडु बागवानी विभाग ने भी सराहा है। उन्हें नेशनल एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट स्कीम के तहत शेड नेट हट के लिए 10.

65 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है। जालंधर अब अपने फार्म को पर्यटकों के लिए खोलना चाहते हैं। उनकी कहानी सिर्फ पौधों की खेती के बारे में नहीं है, बल्कि दृढ़ता, विश्वास और उस चीज को उगाने की शक्ति के बारे में है, जिसमें शुरू में किसी ने विश्वास नहीं किया था।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

NBT Hindi News /  🏆 20. in İN

जालंधर की सफलता जालंधर की सफलता की कहानी सफलता की कहानी जालंधर डेजर्ट रोज Who Is Jalandhar Jalandhar Success Jalandhar Success Story Success Story Jalandhar Desert Rose

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

Success Story: कभी इलाज कराने के भी नहीं थे पैसे, किस्मत ऐसी चमकी कि बन गए अरबपति, क्यों दान कर दी कंपनी?Success Story: कभी इलाज कराने के भी नहीं थे पैसे, किस्मत ऐसी चमकी कि बन गए अरबपति, क्यों दान कर दी कंपनी?Success Story of Yvon Chouinard: पेटागोनिया कंपनी के फाउंडर रहे यवोन चौइनार्ड की गिनती कभी अरबपतियों में होती थी। लेकिन उन्हें यह लेबल बिल्कुल भी पसंद नहीं आया।
Read more »

Success Story: पहले मोबाइल की दुकान में खाए धक्के, फिर कपड़ों का बिजनेस भी बंद, अचानक सफेद दानों ने बनाया ल...Success Story: पहले मोबाइल की दुकान में खाए धक्के, फिर कपड़ों का बिजनेस भी बंद, अचानक सफेद दानों ने बनाया ल...Sabudana Khichdi Business Success Story: साबूदाना खिचड़ी का बिजनेस आप कम लागत में भी शुरू कर सकते हैं, इसके साथ ही अगर आप साफ सफाई का ध्यान रखते हैं तो कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
Read more »

Success Story: रोज 8 घंटे 200 से 400 ईंटें ढोईं, फिर यूट्यूब से पढ़ाई, मिसाल है मजदूर से डॉक्टर बनने की कहानीSuccess Story: रोज 8 घंटे 200 से 400 ईंटें ढोईं, फिर यूट्यूब से पढ़ाई, मिसाल है मजदूर से डॉक्टर बनने की कहानीNEET Sarfaraz Success Story:
Read more »

Success Story: इंदौर के दो दोस्तों ने शुरू किया अनोखा बिजनेस, Super Power पैच से बीमारियां हुई दूर, हर महीन...Success Story: इंदौर के दो दोस्तों ने शुरू किया अनोखा बिजनेस, Super Power पैच से बीमारियां हुई दूर, हर महीन...Success Story: इनोवेशन और सही पार्टनरशिप से छोटा सा ब्रांड भी कहीं भी पहुंच सकता है. इंदौर के सिर्फ दो दोस्तों ने अपनी मेहनत से इस बात को सच साबित करके दिखाया है. सिर्फ एक सुपरपॉवर पैच की मदद से हर महीने इन दोनों की दोगुनी सेल हो रही है.
Read more »

Success Story: भूखा रहा, पेट भरने के लिए खाई पेड़ की छाल, बना डाला दुनिया का बड़ा कार ब्रांडSuccess Story: भूखा रहा, पेट भरने के लिए खाई पेड़ की छाल, बना डाला दुनिया का बड़ा कार ब्रांडSuccess Story: दक्षिण कोरिया के गरीब किसान परिवार में जन्मे चुंग जू-युंग ने भूख, गरीबी और संघर्ष के बावजूद हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने छोटे-मोटे कामों से शुरुआत की और साल 1976 में हुंडई मोटर्स की स्थापना की.
Read more »

Success Story: पहले प्रयास में एक नंबर से चूकीं, दूसरे अटेंप्ट में AIR-1 हासिल कर रचा इतिहास, जानें कौन हैं IAS श्रुति शर्मा?Success Story: पहले प्रयास में एक नंबर से चूकीं, दूसरे अटेंप्ट में AIR-1 हासिल कर रचा इतिहास, जानें कौन हैं IAS श्रुति शर्मा?UPSC Success Story: आईएएस श्रुति शर्मा उन चुनिंदा आईएएस अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पहला रैंक हासिल किया है. आइए हम आपको उनकी प्रेरणादायक जर्नी के बारे में बताते हैं.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 08:58:06