Success Story: जिस आइडिया पर यकीन करना था मुश्किल, उस पर लगा दिया दांव, अब ₹28340000000 का IPO

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Success Story: जिस आइडिया पर यकीन करना था मुश्किल, उस पर लगा दिया दांव, अब ₹28340000000 का IPO
फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स आईपीओफ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स सफलता की कहानीश्रीकांत वेलामकन्नी
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Success Story: फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स का आईपीओ निवेश के लिए खुला हुआ है। इस कंपनी का यहां तक पहुंचने का सफर बेहद रोमांचक रहा है। यह कई उठापटक के दौर से गुजरी है। आईपीओ में मिरचंदानी जीएलएम ट्रस्ट अपनी 15.

नई दिल्‍ली: साल 2001 की बात है। ओनिडा ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन गुल्लू मि‍रचंदा‍नी ने एक बेडरूम स्टार्टअप पर बड़ा दांव खेला। इसका नाम था फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स । यह कंपनी डेटा एनालिट‍िक्‍स के क्षेत्र में क्रांति लाने वाली थी। फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स ने मि‍रचंदा‍नी से पूंजी मांगी। बताया कि वह बैंकों को डेटा के आधार पर वित्तीय फैसले लेने में मदद करेगी। यह कॉन्सेप्ट काफी अकादमिक था। यकीन करना मुकिश्‍ल था। बैंकों को अपना बहुत सारा क्‍लाइंट डेटा फ्रैक्‍टल के साथ शेयर करना पड़ता। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि बैंक इस आइडिया पर सहमत हो गए। इस तरह एक नए सेक्‍टर का जन्म हुआ। मि‍रचंदा‍नी ने शुरुआत में 60,000 डॉलर का चेक दिया। 2006 तक फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स के क्लाइंट्स में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यूटीआई बैंक, कोरियन एक्सचेंज बैंक और जापान का ओसीबीसी बैंक शामिल हो गए। तब कंपनी का रेवेन्यू 30 लाख डॉलर था। अब कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में 2,800 करोड़ रुपये का कुल टर्नओवर दर्ज किया है। इसके उलट वित्त वर्ष 2023-24 में 55 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स अब 2,833.

90 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई है। इसका प्राइस बैंड 857 करोड़ - 900 करोड़ रुपये है। इसमें 1,810.40 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल है। मिरचंदानी की निकली लॉटरीइस आईपीओ के तहत मि‍रचंदा‍नी GLM ट्रस्ट के जरिए 15.5% हिस्सेदारी बेचेंगे। इसकी कीमत 450 करोड़ रुपये है। अन्य शेयरहोल्‍डर अपाक्‍स पार्टनर्स और टीपीजी कैपिटल भी अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी ने अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में आईपीओ का आकार लगभग 42% घटाकर 4,900 करोड़ रुपये से 2,833.90 करोड़ रुपये कर दिया है, ताकि यह निवेशकों को आकर्षक लगे। आईपीओ की रकम का कहां होगा इस्‍तेमाल?कंपनी आईपीओ से हासिल रकम का इस्‍तेमाल रणनीतिक क्षेत्रों में करेगी। लगभग 264.9 करोड़ रुपये अपनी सहायक कंपनी फ्रैक्‍टल यूएसए में कर्ज चुकाने के लिए निवेश किए जाएंगे। इसके अलावा, 355.1 करोड़ INR रिसर्च एंड डेवलपमेंट और फ्रैक्‍टल अल्फा के तहत सेल्स और मार्केटिंग को मजबूत करने के लिए रखे गए हैं। आईपीओ 9 फरवरी, 2026 को निवेश के लिए खुला था। इस मुकाम तक पहुंचना नहीं था आसानइस मुकाम तक पहुंचने से पहले कंपनी ने काफी मेहनत की है। 2007 में संस्थापकों के बीच विवाद हुआ। गुल्‍लू मि‍रचंदा‍नी ने श्रीकांत वेलामकन्नी का समर्थन किया, जो सीईओ बने। दो संस्थापक बाहर चले गए। बाद में वेलामकन्नी के विजन ने कंपनी को आगे बढ़ाया। क्रेडिट कार्ड खर्चों को समझने से लेकर कर्जदार के रीपेमेंट शेड्यूल तक फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स ने सब कुछ किया। संकटों का किया सामना2009 में वैश्विक वित्तीय संकट ने कंपनी को बहुत प्रभावित किया। फ्रैक्‍टल ने जनरल मोटर्स को खो दिया, जो उसके 10% रेवेन्यू का योगदान करता था। लेकिन, कंपनी ने इस संकट को एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। अमेरिकी बैंकों को डिफॉल्ट मैनेज करने में मदद की। इसके बाद कंपनी ने कई सेगमेंट्स में फैलने के बजाय अपने क्लाइंट्स के साथ गहराई से काम करने का फैसला किया। 2012 तक कंपनी का रेवेन्यू 1.3 करोड़ डॉलर था। अब यह कुछ क्लाइंट्स के साथ काम कर रही है। 2016 में कंपनी ने मलेशियाई सॉवरेन फंड खजानाह नैशनल से 10 करोड़ डॉलर का निवेश हासिल किया।वेलामकन्नी के नेतृत्‍व में जोरदार ग्रोथपिछले कुछ सालों में वेलामकन्नी ने डेटा एनालिट‍िक्‍स के लिए AI स्पेस को अपनाया। यह दांव कंपनी के लिए काम कर गया। 2018 में ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म एपाक्‍स पार्टनर्स ने कंपनी में 20 करोड़ डॉलर में एक माइनॉरिटी स्टेक खरीदा। इससे फ्रैक्‍टल के R&D बजट को काफी बढ़ावा मिला। वेलामकन्नी अब सीईओ CEO और एग्जीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन हैं। आज फ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स भारत की उन चुनिंदा AI कंपनियों में से एक है जिसने पिछले 10 सालों में अभूतपूर्व रफ्तार से ग्रोथ की है। कंपनी कस्टम AI सॉल्यूशंस प्रदान करती है ताकि ग्राहक अनुभव, सप्लाई-चेन एफिशिएंसी और मार्केटिंग इफेक्टिवनेस को बेहतर बनाया जा सके। इसके पास Cogentiq नाम का एक प्लेटफॉर्म है, जो जटिल कामों को ऑटोमेट करने में मदद करता है। फ्रैक्‍टल AI को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के बजाय एक मुख्य उत्पाद के रूप में पेश करती है। ये है सबसे बड़ी चुनौतीफ्रैक्‍टल एनालिट‍िक्‍स जैसी फर्मों के लिए मुख्य चुनौती तेजी से परिपक्‍व हो रहे इकोसिस्टम में डिजरप्‍शन बनाए रखना है। कंपनी ऐसे समय में पब्लिक मार्केट में डेब्यू करने की तैयारी कर रही है जब AI-ड्रिवेन उद्यमों में निवेशकों की रुचि और वैश्विक ऑटोमेशन ट्रेंड्स के आसपास अनिश्चितता दोनों अधिक हैं। जैसे-जैसे उद्योगों में डेटा-आधारित परिवर्तन की मांग तेज हो रही है, फ्रैक्‍टल खुद को उच्च-मूल्य वाले एनालिट‍िक्‍स और AI सेवाओं के बाजार में एक बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए तैयार कर रही है। फिर भी, इसका डेब्यू वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य में तेजी से बदलाव के साथ मेल खाता है।

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