Success Story: सिर्फ 3 साल में ₹3.2 लाख के पैकेज से ₹80 लाख, नौकरी में ऐसी छलांग कि लोग हैं हैरान

अर्का मजूमदार कौन हैं News

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अर्का मजूमदार बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं। उन्‍होंने अपने जॉब करियर में जबरदस्‍त छलांग लगाई है। 3 साल में 3.2 लाख रुपये के सालाना पैकेज से उन्‍होंने 80 लाख रुपये सालाना पैकेज तक का सफर तय किया है।

नई दिल्‍ली: बेंगलुरु के 26 साल के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर की कहानी सोशल मीडिया पर छा गई है। उनका नाम अर्का मजूमदार है। नौकरी में उन्‍होंने ऐसी छलांग लगाई कि लोग हैरान हैं। अर्का मजूमदार ने सोशल मीडिया पर अपने करियर का सफर शेयर किया है। सॉफ्टवेयर डेवलपर ने बताया है कि उन्‍होंने सिर्फ तीन साल में कंपनियां बदलकर अपने एनुअल पैकेज को 3.

2 लाख रुपये से बढ़ाकर 80 लाख रुपये कर लिया है। यहां तक 2031 तक उनका रिटायर होने का प्लान है। इसके बाद वह अपना वेंचर शुरू करना चाहते हैं। आइए, यहां अर्का मजूमदार की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।स्विच करने का मिला फायदा स्विच करने का मिला फायदा' imgsize='70226' >मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, अर्का मजूमदार अभी गूगल में काम कर रहे हैं। मजूमदार मानते हैं कि कंपनी के प्रति वफादारी से हमेशा सैलरी नहीं बढ़ती। इंस्‍टाग्राम पर एक वीडियो में उन्होंने अपनी कहानी शेयर की है। इसमें मजूमदार ने बताया कि उन्होंने 23 साल की उम्र में टीसीएस से अपने करियर की शुरुआत की थी। तब उनकी सैलरी 3.2 लाख रुपये सालाना थी। दो साल बाद मजूमदार कूकू एफएम में चले गए। वहां उन्हें 14 लाख रुपये सालाना मिलने लगे। फिर वह स्विच करके गूगल में गए। इससे उन्‍हें 80 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर नौकरी मिल गई।ऐसे हुई करियर की शुरुआत ऐसे हुई करियर की शुरुआत' imgsize='30126' >रिपोर्ट में मजूमदार के हवाले से बताया गया कि उन्होंने 2021 में टीसीएस के निंजा प्रोग्राम के जरिए असिस्टेंट सिस्टम इंजीनियर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। तब उनकी सैलरी सिर्फ 3.2 लाख रुपये सालाना थी। कॉलेज से कुछ साल पहले निकले मजूमदार ने खुद को 'आंखों में सपने और सीखने की जबरदस्त चाहत रखने वाला' बताया। 2022 में टीसीएस का डिजिटल प्रोग्राम पास करने के बाद उन्हें सिस्टम इंजीनियर के पद पर प्रमोशन मिला। इससे उनकी सैलरी बढ़कर करीब 7 लाख रुपये सालाना हो गई। उसी समय के आसपास उन्होंने डेटा स्‍ट्रक्‍चर्स एंड एलगॉरिदम्‍स की गंभीरता से तैयारी शुरू कर दी। यह एक ऐसा हुनर है जिसे प्रोडक्ट-बेस्ड टेक नौकरियों के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।पहली बड़ी छलांग लगा 15 लाख तक पहुंचे पहली बड़ी छलांग लगा 15 लाख तक पहुंचे' imgsize='33050' >मजूमदार 2023 तक वह DSA की प्रैक्टिस के लिए हर रोज पांच से छह घंटे देते थे। उन्होंने 380 से ज्‍यादा LeetCode प्रॉब्लम्स सॉल्व कर ली थीं। इससे उन्हें मीडियम और हार्ड लेवल के सवालों को हल करने का कॉन्फिडेंस मिल गया था। जनवरी 2024 में उन्होंने टीसीएस के बाहर दूसरी नौकरियों के लिए अप्लाई करना शुरू किया। लेकिन, उन्हें अपना पहला ऑफर मिलने में करीब आठ महीने लग गए। कई इंटरव्यू में नाकाम रहने के बावजूद आखिर में उन्हें बेंगलुरु के एक प्रोडक्ट स्टार्टअप कूकू एफएम में नौकरी मिल गई। वहां उनकी सैलरी बढ़कर करीब 14-15 लाख रुपये सालाना हो गई। यह उनके लिए पहली बड़ी छलांग थी। 2031 तक अपना वेंचर शुरू करने का प्‍लान 2031 तक अपना वेंचर शुरू करने का प्‍लान ' imgsize='24950' >2025 में मजूमदार ने गूगल में 80 लाख के पैकेज पर जॉइन किया। इसे उन्होंने अपने करियर की 'सबसे बड़ी छलांग' बताया। यह ऑफर मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी। ग्राफ, ट्रीज और डायनामिक प्रोग्रामिंग जैसे एडवांस्ड टॉपिक्स को कवर किया। इससे LeetCode पर उनके सॉल्व किए गए सवालों की संख्या 750 से ज्‍यादा हो गई। कॉलेज के दिनों में हर बीटेक स्टूडेंट की तरह उनका भी गूगल में काम करने का सपना था। लेकिन, सही गाइडेंस की कमी और टियर-3 कॉलेज की सीमाओं की वजह से उन्‍हें 3.2 लाख के पैकेज से शुरुआत करनी पड़ी। उन्हें उम्मीद है कि वह पांच साल में रिटायर हो जाएंगे और अपना खुद का कोई वेंचर शुरू कर देंगे। लोगों को करियर ग्राफ पर हैरानी लोगों को करियर ग्राफ पर हैरानी ' imgsize='16172' >जहां कई लोगों ने उन्हें बधाई दी, वहीं उनके दावों पर कुछ लोगों ने शक भी जाहिर किया। कई यूजर्स ने 15 लाख के पैकेज से सीधे 80 लाख के पैकेज तक की इस बड़ी छलांग पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा-'15 LPA से 80 LPA तक पहुंचना सच में बहुत ही अवास्तविक लगता है।' एक अन्य यूज़र ने कहा, 'आपने उन्हें इसके लिए कैसे राजी किया? क्या आपकी पिछली सैलरी को ध्यान में नहीं रखा गया था?' मजूमदार लगातार इन कमेंट्स का जवाब देते रहे हैं। इस बात पर कायम हैं कि उनका यह सफर पूरी तरह से सच्चा है। यह उनकी अनुशासित तैयारी और सही समय पर लिए गए रणनीतिक फैसलों का ही नतीजा है।

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