Young Scientist Dr. Bhanwar Malviya Success Story: सिरोही जिले के पिंडवाड़ा निवासी युवा वैज्ञानिक डॉ. भंवर मालवीय को ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की प्रतिष्ठित 'अपार्ट यूएसए पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप' मिली है. 5 करोड़ रुपये की इस फेलोशिप के तहत वे अगले चार साल ऑस्ट्रिया में दवाइयों पर ग्रीन और सस्टेनेबल रिसर्च करेंगे.
सिरोही. जिले के एक युवा वैज्ञानिक ने विज्ञान के क्षेत्र में विदेशी धरती पर अपना और जिले का नाम रोशन किया है. जिले के पिंडवाड़ा कस्बे के रहने वाले डॉ. भंवर मालवीय ने वैश्विक वैज्ञानिक जगत में देश का नाम रोशन किया है.
उन्हें ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से दी जाने वाली अपार्ट यूएसए पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप से सम्मानित किया गया है. इस फेलोशिप की कुल राशि 5 करोड़ भारतीय रुपये के बराबर है. यह अपने आप में अत्यंत प्रतिस्पर्धी है, क्योंकि हर विश्वविद्यालय से केवल एक ही शोधकर्ता का इसके लिए चयन किया जाता है. इसी इस फैलोशिप की प्रतिष्ठा और कठिन चयन प्रक्रिया का अंदाजा लगाया जा सकता है. अमेरिका में रिसर्च एसोसिएट पद पर कार्यरत डॉ. मालवीय इस समय यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन, अमेरिका में रिसर्च एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं. 4 साल तक करेंगे दवाइयों पर रिसर्च डॉ. मालवीय दवाइयों के विद्युत-रासायनिक संश्लेषण और स्केल-अप पर केंद्रित रिसर्च कर रहे हैं, जो फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में ग्रीन और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी के लिए बहुत उपयोगी है. अब डॉ. मालवीय इस फेलोशिप में अगले चार वर्षों तक ऑस्ट्रिया की एक शीर्ष विश्वविद्यालय में अपना शोध जारी रखेंगे. इससे पूर्व वे ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज में दो वर्षों तक पोस्टडॉक्टरल शोध कर चुके हैं. डॉ. मालवीय ने अपनी पीएच.डी. मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर से पूरी की थी. अब तक उन्होंने 25 देशों में वैज्ञानिक यात्राएं भी की हैं. ये भी पढ़ें: त्योहारों की सफाई में न फेंके पुराने प्लास्टिक डब्बे, इन्हें बनाएं रंग-बिरंगे गमले, जान लें गार्डन को नया लुक देने का तरीका समाज के लिए उपयोगी है ये रिसर्च अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. मालवीय ने लोकल 18 को बताया कि यह फेलोशिप उनके लिए एक जिम्मेदारी है. जिसमें वे वैज्ञानिक शोध को समाज के हित में लाना चाहते हैं, ताकि दवाओं का निर्माण ज्यादा टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल हो सके. उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय पिता अशोक कुमार मालवीय, माता और शिक्षकों को देते हुए बताया कि यह सम्मान भारत के उन युवाओं को भी प्रेरणा देगा, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं.
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