Shivaji Jayanti: 15 की उम्र में जीत लिया किला, मराठा साम्राज्य बनाने वाला वो योद्धा जिससे थर-थर कांपते थे मुगल

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Shivaji Jayanti: 15 की उम्र में जीत लिया किला, मराठा साम्राज्य बनाने वाला वो योद्धा जिससे थर-थर कांपते थे मुगल
Shivaji Maharaj Ka Jivan Parichayछत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहासशिवाजी ने किसकी स्थापना की थी?
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Shivaji Maharaj Itihas: आज 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। एक वीर मराठा योद्धा जिसने हिंदवी साम्राज्य (Maratha Samrajya) की स्थापना की। अनगिनत लड़ाइयां लड़कर, ढेरों बार मुगलों को हराकर सैकड़ों किले फतह किए। इसी दिन उस शिवाजी का जन्म हुआ था जिसे फादर ऑफ इंडियन नेवी भी कहते...

About Chhatrapati Shivaji in Hindi: शिवाजी. ये बस एक नाम नहीं, इतिहास के पन्नों में दर्ज पूरी गाथा है। युद्धनीति और वीरता की गाथा। मराठा साम्राज्य की गाथा। छत्रपति शिवाजी महाराज वो नाम है, जो महाराष्ट्र के रग-रग में तो बसा ही है। भारत के कोने-कोने में आज भी शिवाजी की कहानियां गूंजती हैं। ये ऐतिहासिक कहानी उस मराठा योद्धा की है जिसने मुगलों को इतनी बार हराया, इतने वार किए कि कई मुगल शासक तो उनके नाम से भी थर-थर कांपते थे। शिवाजी से लड़ने और उन्हें हराने के लिए क्रूर मुगलों को दूसरे हिंदू राजाओं का सहारा तक लेना पड़ता था। आज 19 फरवरी 2026 को शिवाजी की जयंती पर जानिए 'छत्रपति' के बारे में।शिवाजी कौन थे?शिवाजी जन्म से कोई राजकुमार नहीं थे, जिसे राजसिंहासन मिल गया। उनके पिता बीजापुर सल्तनत में दरबारी थे। शिवाजी ने तो खुद अपनी रणनीतियों, साहस और सूझबूझ से एक नया साम्राज्य खड़ा किया। एक नए राज्य की नींव रखी। जब कई लोग इस कोशिश में लगे रहते थे कि उन्हें बस राजा के प्रति अपनी वफादारी साबित करके या राजा का विश्वास जीतकर राजमहल में अपनी जगह बनानी है, शिवाजी का मिशन सबसे अलग था। उन्होंने इसके लिए योजना बनाई और उसे पूरा किया। उन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की, जिसे हिन्दवी स्वराज्य के नाम से भी जाना जाता है।छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में जानकारी शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी के किले में हुआ था। शिवाजी के पिता का नाम शाहाजी भोंसले और मां का नाम जीजीबाई थी। बचपन से ही शिवाजी की मां ने उन्हें अपनी जगह और लोगों के प्रति गर्व और जिम्मेदारियों का एहसास करवाया। शुरुआत में जीजीबाई ने ही महाराभारत और रामायण की कहानियों के जरिए शिवाजी को वीरता और कूटनीति की शिक्षा दी। बाद में गुरु दादोजी कोंडदेव से तलवारबाजी, घुड़सवारी, भाला फेंकने और युद्ध कला का प्रशिक्षण लिया। सह्याद्री की पहाड़ियों में युद्ध कौशल सीखते हुए शिवाजी ने लड़ाई की अनोखी शैली सीखी, जिसे गनिमी कावा के नाम से जानते हैं। इसे आम भाषा में छापामार युद्ध नीति भी कहा गया था। शिवाजी सिर्फ 15 साल के थे, जब 1645 में उन्होंने पहला किला जीता था, तोरणा किला । उसके बाद उनकी ये यात्रा लगातार चलती रही। शिवाजी की नीतियां हमेशा किसानों और महिलाओं के पक्ष में होती थीं।शिवाजी के नाम में छत्रपति कब और कैसे जुड़ा?दिल्ली यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त शिवाजी कॉलेज ने शिवाजी की जीवनी अपनी वेबसाइट पर भी डाली है। इसके अनुसार, 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया था। उसी समय उन्हें 'छत्रपति' की पदवी मिली थी। भारत के इतिहास में इसी दिन को आधिकारिक तौर पर मराठा साम्राज्य की स्थापना के रूप में देखा जाता है। शिवाजी ने कितने किले जीते, कौन-कौन से?छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए किलों की लिस्ट काफी लंबी है। इतिहासकार बताते हैं कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में 200 से भी ज्यादा छोटे-छोटे किले जीते थे। कई खुद बनवाए। इनमें से 12 ऐसे किले हैं जिन्हें यूनेस्को ने 2025 में विश्व धरोहर में शामिल किया। इनमें से 11 महाराष्ट्र में और एक तमिलनाडु में है। इनके नाम हैं- रायगढ़ का किला राजगढ़ का किला शिवनेरी का किला तोरणा किला सिंधुदुर्ग किला विजयदुर्ग किला प्रतापगढ़ किला लोहागढ़ किला साल्हेर किला पन्हाला किला जिंजी किला खांदेरी दुर्ग किलाशिवाजी ने कितने युद्ध लड़े थे?मराठा साम्राज्य की स्थापना के लिए शिवाजी को सैकड़ों युद्ध लड़ने पड़े। इतिहासकार मानते हैं कि उन्होंने 200 से ज्यादा छोटे और बड़े युद्ध लड़े। हालांकि इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं मिलती। लेकिन शिवाजी द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध की जानकारी इस प्रकार है- कौन सा युद्ध कब हुआ किसके बीच लड़ा गया प्रतापगढ़ का युद्ध नवंबर 1659 शिवाजी और आदिलशाही जनरल अफजल खान के बीच। शिवाजी की जीत हुई थी। कोल्हापुर का युद्ध दिसंबर 1659 शिवाजी और आदिलशाही सेना के बीच। मराठा जीते। उंबरखिंड का युद्ध फरवरी 1661 शिवाजी की सेना और मुगल जनरल करतलब खान के बीच। मराठा जीते। सूरत की लड़ाई जनवरी 1664 शिवाजी ने मुगल सरदार इनायत खान के खिलाफ सूरत पर धावा बोला। मराठा जीते। पुरंदर का युद्ध 1665 मुगल सम्राट औरंगजेब की ओर से राजा जय सिंह और मराठा साम्राज्य के बीच लड़ा गया। शिवाजी को स्वराज्य बचाने के लिए आत्मसमर्पण करना पड़ा और 23 किले देने पड़े थे। सिंहगढ़ का युद्ध फरवरी 1670 मराठा की ओर से तानाजी मलुसरे और मुगल की ओर से उदयभान राठौड़ के बीच लड़ाई। मराठा जीते। कल्याण का युद्ध 1682 से 1683 मुगल साम्राज्य के बहादुर खान के साथ। मराठाओं को हराकर मुगलों ने कल्याण पर कब्जा कर लिया। संगमनेर का युद्ध नवंबर 1679 ये मुगलों के खिलाफ छत्रपति शिवाजी द्वारा लड़ा गया आखिरी युद्ध था। जालाना से लौटते समय शिवाजी पर मुगलों ने अचानक हमला कर दिया था। 3 दिन तक शिवाजी और मराठा सेना ने वीरता और अद्भुत युद्ध कौशल से मुगलों का सामना करके सुरक्षित निकल गए। मुगलों के खिलाफ शिवाजी की लड़ाईगोविंद पंसारे की किताब 'शिवाजी कौन थे' में भी छत्रपति के व्यक्तित्व की झलक मिलती है। इसके अनुसार, शिवाजी मुसलमानों के खिलाफ नहीं थे, वो मुगल शासन के खिलाफ थे। ऐसा नहीं है कि शिवाजी दूसरे धर्म से नफरत करते थे, बल्कि उनका सिर्फ एक लक्ष्य और एक सपना था- मराठा स्वराज्य स्थापित करना। इसके लिए उन्हें कई मुगल शासकों से लड़ाई लड़नी पड़ी, जो उन्होंने लड़ी। इसके लिए अगर उन्हें हिंदू शासकों से लड़ने की जरूरत पड़ी, या कभी मुगलों के साथ कूटनीति करनी पड़ी, तो उन्होंने वो भी किया। ये शिवाजी की सूझबूझ और रणनीतियों का हिस्सा था। शिवाजी को फादर ऑफ इंडियन नेवी क्यों कहा जाता है?भारतीय नौसेना में आज भी छत्रपति शिवाजी महाराज का कद बड़ा है। 4 दिसंबर नेवी डे के मौके पर इंडियन नेवी ने शिवाजी को Father of Indian Navy की उपाधि से सम्मानित किया था। कारण? शिवाजी ने सिर्फ मराठा साम्राज्य ही नहीं, मराठा नौसेना की भी नींव रखी थी। जब समंदर पर विदेशी ताकतों का कब्जा था, Chhatrapati Shivaji Maharaj ने अपना नौसेना का बेड़ा तैयार करना शुरू किया। एक के बाद एक किले फतह करने के दौरान शिवाजी को एहसास हुआ कि व्यापार के लिए उन्हें अपना नेवल पावर बनाना होगा, जिसपर उस समय यूरोपीय अधिकार था। नतीजा- 1657 से 1658 के बीच शिवाजी ने कोंकण तट पर करीब 100 किमी के क्षेत्र पर अपना अधिकार काबिज कर लिया। शिवाजी महाराज का नारा क्या था? छत्रपति शिवाजी के प्रमुख नारों में से एक था- 'हर हर महादेव'। हालांकि ये कोई धार्मिका नारा नहीं था। बल्कि मुगलों के खिलाफ शिवाजी की लड़ाई का एक युद्धघोष था। ऐसा युद्धघोष जो मराठा सैनिकों में जोश भर देता था। इसके अलावा 'हिंदवी स्वराज्य' भी शिवाजी का नारा था, जो उनका लक्ष्य भी था। Hindvi Swarajya का अर्थ होता है भारतीय स्वराज्य। यानी पूरी तरह भारत का स्वदेशी शासन वाला राज्य। शिवाजी ऐसा राज्य बनाना चाहते थे जिसमें मुगलों का राज न हो। जहां भारतीय संस्कृति का सम्मान हो। 'जय भवानी, जय शिवाजी' का नारा शिवाजी के मराठा समर्थकों का था। जिसमें देवी भवानी के साथ-साथ शिवाजी महाराज का जयकारा जुड़ा है।शिवाजी की मृत्यु कैसे हुई?छत्रपति शिवाजी की मृत्यु 3 अप्रैल 1680 को हुई थी। वो अपने रायगढ़ के किले में ही थे। संकल्प इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, करीब तीन हफ्तों से शिवाजी को लगातार बुखार रह रहा था। कहा जाता है कि उनकी मृत्यु बीमारी के कारण हुई थी। उनका अंतिम संस्कार उनके बेटे राजाराम और पत्नी सोयराबाई की मौजूदगी में किया गया था। शिवाजी की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे सांभाजी और पत्नी सोयराबाई के बीच राजगद्दी को लेकर लड़ाई हुई। एक छोटी लड़ाई के बाद सांभाजी को राजा बनाया गया। शिवाजी जयंती पर महाराष्ट्र में क्या होता है?महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती, 19 फरवरी के मौके पर पूरे राज्य में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महाराष्ट्र गवर्नमेंट टूरिज्म वेबसाइट पर इस बारे में जानकारी भी दी गई है। इसके अनुसार, इस दिन रैली, परेड, शिव कथा, नाटक के आयोजनों से लेकर ऐतिहासिक हथियारों की प्रदर्शनी और राजगढ़, शिवनेरी, सिंहगढ़ के किलों पर बड़े पैमाने पर जश्न का आयोजन होता है। सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित कराई जाती हैं।.

About Chhatrapati Shivaji in Hindi: शिवाजी... ये बस एक नाम नहीं, इतिहास के पन्नों में दर्ज पूरी गाथा है। युद्धनीति और वीरता की गाथा। मराठा साम्राज्य की गाथा। छत्रपति शिवाजी महाराज वो नाम है, जो महाराष्ट्र के रग-रग में तो बसा ही है। भारत के कोने-कोने में आज भी शिवाजी की कहानियां गूंजती हैं। ये ऐतिहासिक कहानी उस मराठा योद्धा की है जिसने मुगलों को इतनी बार हराया, इतने वार किए कि कई मुगल शासक तो उनके नाम से भी थर-थर कांपते थे। शिवाजी से लड़ने और उन्हें हराने के लिए क्रूर मुगलों को दूसरे हिंदू राजाओं का सहारा तक लेना पड़ता था। आज 19 फरवरी 2026 को शिवाजी की जयंती पर जानिए 'छत्रपति' के बारे में।शिवाजी कौन थे?शिवाजी जन्म से कोई राजकुमार नहीं थे, जिसे राजसिंहासन मिल गया। उनके पिता बीजापुर सल्तनत में दरबारी थे। शिवाजी ने तो खुद अपनी रणनीतियों, साहस और सूझबूझ से एक नया साम्राज्य खड़ा किया। एक नए राज्य की नींव रखी। जब कई लोग इस कोशिश में लगे रहते थे कि उन्हें बस राजा के प्रति अपनी वफादारी साबित करके या राजा का विश्वास जीतकर राजमहल में अपनी जगह बनानी है, शिवाजी का मिशन सबसे अलग था। उन्होंने इसके लिए योजना बनाई और उसे पूरा किया। उन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की, जिसे हिन्दवी स्वराज्य के नाम से भी जाना जाता है।छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में जानकारी शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी के किले में हुआ था। शिवाजी के पिता का नाम शाहाजी भोंसले और मां का नाम जीजीबाई थी। बचपन से ही शिवाजी की मां ने उन्हें अपनी जगह और लोगों के प्रति गर्व और जिम्मेदारियों का एहसास करवाया। शुरुआत में जीजीबाई ने ही महाराभारत और रामायण की कहानियों के जरिए शिवाजी को वीरता और कूटनीति की शिक्षा दी। बाद में गुरु दादोजी कोंडदेव से तलवारबाजी, घुड़सवारी, भाला फेंकने और युद्ध कला का प्रशिक्षण लिया। सह्याद्री की पहाड़ियों में युद्ध कौशल सीखते हुए शिवाजी ने लड़ाई की अनोखी शैली सीखी, जिसे गनिमी कावा के नाम से जानते हैं। इसे आम भाषा में छापामार युद्ध नीति भी कहा गया था। शिवाजी सिर्फ 15 साल के थे, जब 1645 में उन्होंने पहला किला जीता था, तोरणा किला । उसके बाद उनकी ये यात्रा लगातार चलती रही। शिवाजी की नीतियां हमेशा किसानों और महिलाओं के पक्ष में होती थीं।शिवाजी के नाम में छत्रपति कब और कैसे जुड़ा?दिल्ली यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त शिवाजी कॉलेज ने शिवाजी की जीवनी अपनी वेबसाइट पर भी डाली है। इसके अनुसार, 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया था। उसी समय उन्हें 'छत्रपति' की पदवी मिली थी। भारत के इतिहास में इसी दिन को आधिकारिक तौर पर मराठा साम्राज्य की स्थापना के रूप में देखा जाता है। शिवाजी ने कितने किले जीते, कौन-कौन से?छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए किलों की लिस्ट काफी लंबी है। इतिहासकार बताते हैं कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में 200 से भी ज्यादा छोटे-छोटे किले जीते थे। कई खुद बनवाए। इनमें से 12 ऐसे किले हैं जिन्हें यूनेस्को ने 2025 में विश्व धरोहर में शामिल किया। इनमें से 11 महाराष्ट्र में और एक तमिलनाडु में है। इनके नाम हैं- रायगढ़ का किला राजगढ़ का किला शिवनेरी का किला तोरणा किला सिंधुदुर्ग किला विजयदुर्ग किला प्रतापगढ़ किला लोहागढ़ किला साल्हेर किला पन्हाला किला जिंजी किला खांदेरी दुर्ग किलाशिवाजी ने कितने युद्ध लड़े थे?मराठा साम्राज्य की स्थापना के लिए शिवाजी को सैकड़ों युद्ध लड़ने पड़े। इतिहासकार मानते हैं कि उन्होंने 200 से ज्यादा छोटे और बड़े युद्ध लड़े। हालांकि इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं मिलती। लेकिन शिवाजी द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध की जानकारी इस प्रकार है- कौन सा युद्ध कब हुआ किसके बीच लड़ा गया प्रतापगढ़ का युद्ध नवंबर 1659 शिवाजी और आदिलशाही जनरल अफजल खान के बीच। शिवाजी की जीत हुई थी। कोल्हापुर का युद्ध दिसंबर 1659 शिवाजी और आदिलशाही सेना के बीच। मराठा जीते। उंबरखिंड का युद्ध फरवरी 1661 शिवाजी की सेना और मुगल जनरल करतलब खान के बीच। मराठा जीते। सूरत की लड़ाई जनवरी 1664 शिवाजी ने मुगल सरदार इनायत खान के खिलाफ सूरत पर धावा बोला। मराठा जीते। पुरंदर का युद्ध 1665 मुगल सम्राट औरंगजेब की ओर से राजा जय सिंह और मराठा साम्राज्य के बीच लड़ा गया। शिवाजी को स्वराज्य बचाने के लिए आत्मसमर्पण करना पड़ा और 23 किले देने पड़े थे। सिंहगढ़ का युद्ध फरवरी 1670 मराठा की ओर से तानाजी मलुसरे और मुगल की ओर से उदयभान राठौड़ के बीच लड़ाई। मराठा जीते। कल्याण का युद्ध 1682 से 1683 मुगल साम्राज्य के बहादुर खान के साथ। मराठाओं को हराकर मुगलों ने कल्याण पर कब्जा कर लिया। संगमनेर का युद्ध नवंबर 1679 ये मुगलों के खिलाफ छत्रपति शिवाजी द्वारा लड़ा गया आखिरी युद्ध था। जालाना से लौटते समय शिवाजी पर मुगलों ने अचानक हमला कर दिया था। 3 दिन तक शिवाजी और मराठा सेना ने वीरता और अद्भुत युद्ध कौशल से मुगलों का सामना करके सुरक्षित निकल गए। मुगलों के खिलाफ शिवाजी की लड़ाईगोविंद पंसारे की किताब 'शिवाजी कौन थे' में भी छत्रपति के व्यक्तित्व की झलक मिलती है। इसके अनुसार, शिवाजी मुसलमानों के खिलाफ नहीं थे, वो मुगल शासन के खिलाफ थे। ऐसा नहीं है कि शिवाजी दूसरे धर्म से नफरत करते थे, बल्कि उनका सिर्फ एक लक्ष्य और एक सपना था- मराठा स्वराज्य स्थापित करना। इसके लिए उन्हें कई मुगल शासकों से लड़ाई लड़नी पड़ी, जो उन्होंने लड़ी। इसके लिए अगर उन्हें हिंदू शासकों से लड़ने की जरूरत पड़ी, या कभी मुगलों के साथ कूटनीति करनी पड़ी, तो उन्होंने वो भी किया। ये शिवाजी की सूझबूझ और रणनीतियों का हिस्सा था। शिवाजी को फादर ऑफ इंडियन नेवी क्यों कहा जाता है?भारतीय नौसेना में आज भी छत्रपति शिवाजी महाराज का कद बड़ा है। 4 दिसंबर नेवी डे के मौके पर इंडियन नेवी ने शिवाजी को Father of Indian Navy की उपाधि से सम्मानित किया था। कारण? शिवाजी ने सिर्फ मराठा साम्राज्य ही नहीं, मराठा नौसेना की भी नींव रखी थी। जब समंदर पर विदेशी ताकतों का कब्जा था, Chhatrapati Shivaji Maharaj ने अपना नौसेना का बेड़ा तैयार करना शुरू किया। एक के बाद एक किले फतह करने के दौरान शिवाजी को एहसास हुआ कि व्यापार के लिए उन्हें अपना नेवल पावर बनाना होगा, जिसपर उस समय यूरोपीय अधिकार था। नतीजा- 1657 से 1658 के बीच शिवाजी ने कोंकण तट पर करीब 100 किमी के क्षेत्र पर अपना अधिकार काबिज कर लिया। शिवाजी महाराज का नारा क्या था? छत्रपति शिवाजी के प्रमुख नारों में से एक था- 'हर हर महादेव'। हालांकि ये कोई धार्मिका नारा नहीं था। बल्कि मुगलों के खिलाफ शिवाजी की लड़ाई का एक युद्धघोष था। ऐसा युद्धघोष जो मराठा सैनिकों में जोश भर देता था। इसके अलावा 'हिंदवी स्वराज्य' भी शिवाजी का नारा था, जो उनका लक्ष्य भी था। Hindvi Swarajya का अर्थ होता है भारतीय स्वराज्य। यानी पूरी तरह भारत का स्वदेशी शासन वाला राज्य। शिवाजी ऐसा राज्य बनाना चाहते थे जिसमें मुगलों का राज न हो। जहां भारतीय संस्कृति का सम्मान हो। 'जय भवानी, जय शिवाजी' का नारा शिवाजी के मराठा समर्थकों का था। जिसमें देवी भवानी के साथ-साथ शिवाजी महाराज का जयकारा जुड़ा है।शिवाजी की मृत्यु कैसे हुई?छत्रपति शिवाजी की मृत्यु 3 अप्रैल 1680 को हुई थी। वो अपने रायगढ़ के किले में ही थे। संकल्प इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, करीब तीन हफ्तों से शिवाजी को लगातार बुखार रह रहा था। कहा जाता है कि उनकी मृत्यु बीमारी के कारण हुई थी। उनका अंतिम संस्कार उनके बेटे राजाराम और पत्नी सोयराबाई की मौजूदगी में किया गया था। शिवाजी की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे सांभाजी और पत्नी सोयराबाई के बीच राजगद्दी को लेकर लड़ाई हुई। एक छोटी लड़ाई के बाद सांभाजी को राजा बनाया गया। शिवाजी जयंती पर महाराष्ट्र में क्या होता है?महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती, 19 फरवरी के मौके पर पूरे राज्य में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महाराष्ट्र गवर्नमेंट टूरिज्म वेबसाइट पर इस बारे में जानकारी भी दी गई है। इसके अनुसार, इस दिन रैली, परेड, शिव कथा, नाटक के आयोजनों से लेकर ऐतिहासिक हथियारों की प्रदर्शनी और राजगढ़, शिवनेरी, सिंहगढ़ के किलों पर बड़े पैमाने पर जश्न का आयोजन होता है। सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित कराई जाती हैं।

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