Pakistan Crypto Bro: पाकिस्‍तान का 'क्रिप्‍टो भाई' जो अमेरिका को ला रहा इस्‍लामाबाद के करीब, ट्रंप से ऐसे जोड़ रहा तार

बिलाल बिन साकिब News

Pakistan Crypto Bro: पाकिस्‍तान का 'क्रिप्‍टो भाई' जो अमेरिका को ला रहा इस्‍लामाबाद के करीब, ट्रंप से ऐसे जोड़ रहा तार
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Pakistan Crypto Bro Bilal bin Saqib: बिलाल बिन साकिब खुद को 'क्रिप्‍टो ब्रो' कहते हैं। वह पाकिस्‍तान में तेजी से उभरता नाम हैं। क्रिप्‍टो जगत में साकिब पाकिस्‍तान की पोजिशन मजबूत करने में जुटे हैं। हाल में उन्‍होंने 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के सीईओ जैकेरी विटकॉफ की यात्रा का आयोजन करने में अहम भूमिका निभाई। वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल का रिश्‍ता...

नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान में एक बिजनेसमैन का नाम अचानक तेजी से उभरा है। बिलाल बिन साकिब । वह खुद को ' क्रिप्‍टो ब्रो ' या 'क्रिप्‍टो भाई' भी कहते हैं। साकिब पाकिस्तान को क्रिप्‍टो जगत में मजबूत स्थिति दिलाने के लिए जोर-शोर से लगे हैं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में क्रिप्टो प्लेटफॉर्म 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के सीईओ जैकेरी विटकॉफ की यात्रा को आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में इसे एक ऐसा कदम बताया जिसने 'पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे पर लाने' में मदद की। 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के तार अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उनके परिवार से सीधे जुड़े हैं। यह एक ऐसा डिसेंट्रलाइज्‍ड फाइनेंस प्‍लेटफॉर्म है जिसका प्रमोटर ट्रंप परिवार है। प्‍लेटफॉर्म बैंकिंग के पारंपरिक बिचौलियों को हटाकर क्रिप्‍टोकरेंसी के जरिये उधार लेने-देने की सुविधा देता है। जनवरी 2026 में पाकिस्तान ने विटकॉफ की मेजबानी की। इसमें शीर्ष नागरिक और सैन्य नेता मौजूद थे। यह मुलाकात किसी बिजनेस मीटिंग से ज्‍यादा एक राजकीय दौरे जैसी लग रही थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर, दोनों ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसका नतीजा एक 'नॉन-बाइंडिंग लेटर ऑफ इंटेंट' था। इसमें सीमा-पार पेमेंट के लिए 'स्टेबलकॉइन्स' के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई थी। साकिब ट्रंप परिवार से बना रहे रिश्‍तेब्लूमबर्ग के अनुसार, पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी और बैठक के दौरान ली गई आधिकारिक तस्वीरों ने इस कार्यक्रम को कूटनीतिक रंग दे दिया। साकिब की रणनीति यह लगती है कि वह क्रिप्टो को कूटनीति के एक नए औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जरिए वह ट्रंप के करीबी लोगों के बीच निजी संबंध बना रहे हैं।इसके साथ ही, पाकिस्तान मौजूदा संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर भी खुद को चुपचाप स्थापित करने की कोशिश में जुटा है। सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद ने एक 15-सूत्रीय रूपरेखा साझा की है। बातचीत के लिए एक संभावित स्थान के तौर पर उस पर विचार किया जा रहा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने में लगा है। व्यापार के क्षेत्र में कुछ प्रगति देखने को मिली है। हाल के महीनों में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से सेना प्रमुख जनरल मुनीर की तारीफ की है। साकिब ने मुहैया कराया है एंट्री-गेटविश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी नीति में निजी संबंध, सामान्य से कहीं ज्‍यादा बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। क्रिप्टो की दुनिया में साकिब के नेटवर्क ने पाकिस्तान को एक ऐसा एंट्री-गेट मुहैया कराया है, जो आमतौर पर नहीं मिलता। पाकिस्‍तान की पॉलिसी में कैसे आया है चेंज? घरेलू मोर्चे पर पाकिस्तान ने क्रिप्टो को लेकर अत्यधिक सतर्क रहने की अपनी पुरानी नीति को छोड़ दिया है। पाकिस्‍तान ने अब इसे पूरी तरह से अपनाने का रुख अपना लिया है। सरकार ने नए कानून लागू किए हैं जिसके तहत एक समर्पित नियामक संस्था का गठन किया गया है। पाकिस्‍तान सरकार ने एक 'राष्ट्रीय क्रिप्टो रिजर्व' का प्रस्ताव रखा है। यहां तक कि 'क्रिप्टो माइनिंग' के लिए 2,000 मेगावाट बिजली भी अलग से आवंटित की है।कुछ एक्‍सपर्ट ने दी है चेतावनीहालांकि, कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इसमें जोखिम भी शामिल हैं। खासकर तब जब आईएमएफ इस पर पैनी नजर रखे हुए है। फिर भी साकिब का मानना है कि डिजिटल एसेट्स पाकिस्तान को अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने, फाइनेंशियल इन्‍क्‍लूजन को बढ़ावा देने और विदेशी कर्ज पर अपनी दीर्घकालिक निर्भरता को कम करने में मदद कर सकती हैं। वैसे, यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह 'क्रिप्टो डिप्‍लोमेसी' स्थायी नतीजे देती है। लेकिन, इसने निश्चित रूप से पाकिस्तान को वाशिंगटन के प्रभावशाली लोगों के साथ जुड़ने का नया और लीक से हटकर तरीका दिया है।.

नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान में एक बिजनेसमैन का नाम अचानक तेजी से उभरा है। बिलाल बिन साकिब। वह खुद को ' क्रिप्‍टो ब्रो ' या 'क्रिप्‍टो भाई' भी कहते हैं। साकिब पाकिस्तान को क्रिप्‍टो जगत में मजबूत स्थिति दिलाने के लिए जोर-शोर से लगे हैं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में क्रिप्टो प्लेटफॉर्म 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के सीईओ जैकेरी विटकॉफ की यात्रा को आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में इसे एक ऐसा कदम बताया जिसने 'पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे पर लाने' में मदद की। 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के तार अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उनके परिवार से सीधे जुड़े हैं। यह एक ऐसा डिसेंट्रलाइज्‍ड फाइनेंस प्‍लेटफॉर्म है जिसका प्रमोटर ट्रंप परिवार है। प्‍लेटफॉर्म बैंकिंग के पारंपरिक बिचौलियों को हटाकर क्रिप्‍टोकरेंसी के जरिये उधार लेने-देने की सुविधा देता है। जनवरी 2026 में पाकिस्तान ने विटकॉफ की मेजबानी की। इसमें शीर्ष नागरिक और सैन्य नेता मौजूद थे। यह मुलाकात किसी बिजनेस मीटिंग से ज्‍यादा एक राजकीय दौरे जैसी लग रही थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर, दोनों ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसका नतीजा एक 'नॉन-बाइंडिंग लेटर ऑफ इंटेंट' था। इसमें सीमा-पार पेमेंट के लिए 'स्टेबलकॉइन्स' के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई थी। साकिब ट्रंप परिवार से बना रहे रिश्‍तेब्लूमबर्ग के अनुसार, पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी और बैठक के दौरान ली गई आधिकारिक तस्वीरों ने इस कार्यक्रम को कूटनीतिक रंग दे दिया। साकिब की रणनीति यह लगती है कि वह क्रिप्टो को कूटनीति के एक नए औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जरिए वह ट्रंप के करीबी लोगों के बीच निजी संबंध बना रहे हैं।इसके साथ ही, पाकिस्तान मौजूदा संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर भी खुद को चुपचाप स्थापित करने की कोशिश में जुटा है। सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद ने एक 15-सूत्रीय रूपरेखा साझा की है। बातचीत के लिए एक संभावित स्थान के तौर पर उस पर विचार किया जा रहा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने में लगा है। व्यापार के क्षेत्र में कुछ प्रगति देखने को मिली है। हाल के महीनों में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से सेना प्रमुख जनरल मुनीर की तारीफ की है। साकिब ने मुहैया कराया है एंट्री-गेटविश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी नीति में निजी संबंध, सामान्य से कहीं ज्‍यादा बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। क्रिप्टो की दुनिया में साकिब के नेटवर्क ने पाकिस्तान को एक ऐसा एंट्री-गेट मुहैया कराया है, जो आमतौर पर नहीं मिलता। पाकिस्‍तान की पॉलिसी में कैसे आया है चेंज? घरेलू मोर्चे पर पाकिस्तान ने क्रिप्टो को लेकर अत्यधिक सतर्क रहने की अपनी पुरानी नीति को छोड़ दिया है। पाकिस्‍तान ने अब इसे पूरी तरह से अपनाने का रुख अपना लिया है। सरकार ने नए कानून लागू किए हैं जिसके तहत एक समर्पित नियामक संस्था का गठन किया गया है। पाकिस्‍तान सरकार ने एक 'राष्ट्रीय क्रिप्टो रिजर्व' का प्रस्ताव रखा है। यहां तक कि 'क्रिप्टो माइनिंग' के लिए 2,000 मेगावाट बिजली भी अलग से आवंटित की है।कुछ एक्‍सपर्ट ने दी है चेतावनीहालांकि, कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इसमें जोखिम भी शामिल हैं। खासकर तब जब आईएमएफ इस पर पैनी नजर रखे हुए है। फिर भी साकिब का मानना है कि डिजिटल एसेट्स पाकिस्तान को अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने, फाइनेंशियल इन्‍क्‍लूजन को बढ़ावा देने और विदेशी कर्ज पर अपनी दीर्घकालिक निर्भरता को कम करने में मदद कर सकती हैं। वैसे, यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह 'क्रिप्टो डिप्‍लोमेसी' स्थायी नतीजे देती है। लेकिन, इसने निश्चित रूप से पाकिस्तान को वाशिंगटन के प्रभावशाली लोगों के साथ जुड़ने का नया और लीक से हटकर तरीका दिया है।

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