Potato cultivation: बिहार में दाना तूफान के कारण लाखों किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, और आलू की बुवाई का समय नजदीक आ रहा है. किसानों को चिंता है कि खेतों में अधिक नमी होने से फसल प्रभावित हो सकती है.
राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के पादप रोग विभाग की वैज्ञानिक डॉ सुधा नंदिनी ने कहा कि दाना तूफान का असर किसानों में कई सवाल खड़ा कर रहा है. उन्होंने बताया कि आलू की बुवाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर तक है.
यदि खेत में पानी 80% से अधिक है, तो किसानों को कुछ समय के लिए रुकना होगा. अगर पानी 50-80% के बीच है, तो आलू की बुवाई कर सकते हैं. किसान भाइयों को आलू की रोपाई से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि सबसे पहले, किसानों को आलू के बीजों के अंकुरण होने तक इंतजार करना चाहिए. जब अंकुरण सही ढंग से हो जाए, तभी कटिंग करें. अंकुरित आलू को काटने के बाद, यह सुनिश्चित करें कि कटिंग में कोई नुकसान न हो, ताकि फसल स्वस्थ रहे. यदि कंद का वजन 30 से 40 ग्राम है, तो दो कंदों के बीच की दूरी 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर होनी चाहिए. इस तरह की सही दूरी बनाए रखने से फसल का उत्पादन बेहतर होगा और आलू के पौधों को सही विकास के लिए पर्याप्त स्थान मिलेगा. अगर किसान भाई अपनी फसल को बीमारियों से सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो बुवाई से पहले कार्बेंडाजिम या मैंकोजेब का इस्तेमाल कर सकते हैं.2 ग्राम रसायन को 1 लीटर पानी में मिलाएं. आलू के बीजों को इस घोल में 5-10 मिनट के लिए डुबोकर रखें. फिर बीजों को निकालकर छायादार स्थान पर सुखाएं. ध्यान रखें कि बीजों को 24 घंटे के अंदर बुवाई कर लें, अन्यथा उपचार का प्रभाव कम हो जाएगा. इस प्रक्रिया को अपनाकर किसान भाई अपनी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को बेहतर बना सकते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, किसानों के लिए आलू की बुवाई से पहले बीज का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसके लिए किसानों को प्रमाणित बीज का उपयोग करना चाहिए. प्रमाणित बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को प्रमाणित संस्थानों से संपर्क करना चाहिए. प्रमाणित बीज का उपयोग करने से आलू के पौधों में बीमारियों की संभावना कम होती है, जिससे फसल का उत्पादन बेहतर होता है. उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का चयन करें. बलुई-लौह मिट्टी सबसे उत्तम होती है. खेत की जुताई 2-3 बार अच्छी तरह करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए. फिर खेत को समतल करें ताकि पानी का जमाव न हो और जल निकासी सही रहे. खेत में कार्बन की जांच करवाएं और 15-20 टन प्रति हेक्टेयर 2-3 साल पुरानी गोबर का उपयोग करें. खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का छिड़काव करें. इन सुझावों को अपनाकर किसान अपनी आलू की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
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