ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना समुद्र से पाकिस्तान पर हमले करने ही वाले थे कि उन्होंने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बुधवार को यह बात कही।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना समुद्र से पाकिस्तान पर हमले करने ही वाले थे कि उन्होंने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बुधवार को यह बात कही। उन्होंने यह बात नौसेना अलंकरण समारोह-2026 में कही। समारोह में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी विशेष सेवा के लिए नौसेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों को युद्ध सेवा पदक प्रदान किए। यह ऑपरेशन पिछले साल पहलगाम आतंक हमले के बाद किया गया था। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम पाकिस्तान पर समुद्र से हमला करने से बस कुछ मिनट दूर थे, जब उन्होंने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। समुद्र से पाकिस्तान पर हमला करने वाली थी नौसेना नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर से भारतीय नौसेना ने अनुकरणीय तत्परता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। हमारी इकाइयों ने त्वरित तैनाती की और पूरी अवधि के दौरान अत्यधिक आक्रामक रुख बनाए रखा। यह अब कोई छिपी हुई बात नहीं है कि जब हम समुद्र से पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उसने सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तत्काल और दृढ़ कार्रवाई के जरिये भारतीय सेना ने अपनी क्षमताओं से देश के भरोसे को मजबूत किया। उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर और पूरे वर्ष निरंतर परिचालन गतिविधि के अलावा, हमें पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक 17 घंटे की रात की तैनाती के दौरान प्रधानमंत्री के सामने अपनी परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन करने पर भी बहुत गर्व है।' ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट: भारत ने चुना नया रास्ता, अफ्रीका-रूस से मंगवाए कच्चे तेल से लदे जहाज एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, इसी के साथ भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली ताकत के रूप में अपनी प्रतिबद्धता को भी निभाया। हमने कम समय में और कठिन परिस्थितियों में म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा से लेकर श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु तककई राहत और बचाव अभियान चलाए। उन्होंने कहा, आत्मनिर्भरता पर लगातार फोकस करने से हम अपने जहाज और पनडुब्बियां खुद बनाने वाली नौसेना बनने की दिशा में आगे बढ़े और हमारी ताकत भी तेजी से बढ़ी। एक ही साल में 12 जहाज और पनडुब्बियां शामिल की गईं। आज हम केवल पिछले साल की उपलब्धियां नहीं गिनाते, बल्कि भारतीय नौसेना की कामयाबी को भी सम्मान देते हैं। उन्होंने कहा, हमारी असली ताकत हमारे लोग हैं, जो अपनी प्रतिबद्धता, चरित्र और क्षमता के साथ देश की सेवा लगातार करते रहते हैं। उन्होंने आगे कहा, तेजी से बदलती तकनीक और रणनीतियों ने न केवल यह बदला है कि युद्ध कैसे योजना बनाकर शुरू किए जाते हैं, बल्कि इससे गैर-पारंपरिक चुनौतियां भी ज्यादा जटिल और कम अनुमानित हो गई हैं। इसकी वजह समुद्री माहौल की मांग अब यह है कि संगठन स्तर पर फुर्ती और दूरदर्शिता हो। इकाइयों के स्तर पर पूरी तैयारी और प्रभावी संचालन हो और व्यक्तिगत स्तर पर साहस व सही निर्णय के साथ पेशेवर उत्कृष्टता हो। आज मुझे गर्व के साथ यह कहते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय नौसेना ने इन सभी पहलुओं पर अच्छा प्रदर्शन किया है और पिछले एक साल में कई चुनौतियों का सामना किया है और उपलब्धियों को हासिल किया है। पश्चिम एशिया संकट पर क्या कहा? पश्चिम एशिया संघर्ष के बारे में उन्होंने कहा कि जब से अमेरिका, इस्राइल और ईरान का युद्ध शुरू हुआ है, तब से क्षेत्र में 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमला हो चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग 1,900 जहाज इस संघर्ष के कारण फंसे हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर सिर्फ छह-सात रह गई है, जबकि संघर्ष से पहले यह औसतन लगभग 130 थी।.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना समुद्र से पाकिस्तान पर हमले करने ही वाले थे कि उन्होंने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बुधवार को यह बात कही। उन्होंने यह बात नौसेना अलंकरण समारोह-2026 में कही। समारोह में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी विशेष सेवा के लिए नौसेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों को युद्ध सेवा पदक प्रदान किए। यह ऑपरेशन पिछले साल पहलगाम आतंक हमले के बाद किया गया था। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम पाकिस्तान पर समुद्र से हमला करने से बस कुछ मिनट दूर थे, जब उन्होंने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। समुद्र से पाकिस्तान पर हमला करने वाली थी नौसेना नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर से भारतीय नौसेना ने अनुकरणीय तत्परता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। हमारी इकाइयों ने त्वरित तैनाती की और पूरी अवधि के दौरान अत्यधिक आक्रामक रुख बनाए रखा। यह अब कोई छिपी हुई बात नहीं है कि जब हम समुद्र से पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उसने सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तत्काल और दृढ़ कार्रवाई के जरिये भारतीय सेना ने अपनी क्षमताओं से देश के भरोसे को मजबूत किया। उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर और पूरे वर्ष निरंतर परिचालन गतिविधि के अलावा, हमें पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक 17 घंटे की रात की तैनाती के दौरान प्रधानमंत्री के सामने अपनी परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन करने पर भी बहुत गर्व है।' ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट: भारत ने चुना नया रास्ता, अफ्रीका-रूस से मंगवाए कच्चे तेल से लदे जहाज एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, इसी के साथ भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली ताकत के रूप में अपनी प्रतिबद्धता को भी निभाया। हमने कम समय में और कठिन परिस्थितियों में म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा से लेकर श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु तककई राहत और बचाव अभियान चलाए। उन्होंने कहा, आत्मनिर्भरता पर लगातार फोकस करने से हम अपने जहाज और पनडुब्बियां खुद बनाने वाली नौसेना बनने की दिशा में आगे बढ़े और हमारी ताकत भी तेजी से बढ़ी। एक ही साल में 12 जहाज और पनडुब्बियां शामिल की गईं। आज हम केवल पिछले साल की उपलब्धियां नहीं गिनाते, बल्कि भारतीय नौसेना की कामयाबी को भी सम्मान देते हैं। उन्होंने कहा, हमारी असली ताकत हमारे लोग हैं, जो अपनी प्रतिबद्धता, चरित्र और क्षमता के साथ देश की सेवा लगातार करते रहते हैं। उन्होंने आगे कहा, तेजी से बदलती तकनीक और रणनीतियों ने न केवल यह बदला है कि युद्ध कैसे योजना बनाकर शुरू किए जाते हैं, बल्कि इससे गैर-पारंपरिक चुनौतियां भी ज्यादा जटिल और कम अनुमानित हो गई हैं। इसकी वजह समुद्री माहौल की मांग अब यह है कि संगठन स्तर पर फुर्ती और दूरदर्शिता हो। इकाइयों के स्तर पर पूरी तैयारी और प्रभावी संचालन हो और व्यक्तिगत स्तर पर साहस व सही निर्णय के साथ पेशेवर उत्कृष्टता हो। आज मुझे गर्व के साथ यह कहते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय नौसेना ने इन सभी पहलुओं पर अच्छा प्रदर्शन किया है और पिछले एक साल में कई चुनौतियों का सामना किया है और उपलब्धियों को हासिल किया है। पश्चिम एशिया संकट पर क्या कहा? पश्चिम एशिया संघर्ष के बारे में उन्होंने कहा कि जब से अमेरिका, इस्राइल और ईरान का युद्ध शुरू हुआ है, तब से क्षेत्र में 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमला हो चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग 1,900 जहाज इस संघर्ष के कारण फंसे हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर सिर्फ छह-सात रह गई है, जबकि संघर्ष से पहले यह औसतन लगभग 130 थी।
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