मुर्शिदाबाद हिंसा पर कलकत्ता हाई कोर्ट की जांच समिति ने जो रिपोर्ट दी है, उसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल सरकार दंगे की जिम्मेदारी लेने से बच नहीं सकती।
कोलकाता: वक्फ संशोधन कानून के विरोध के नाम पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में पिछले महीने जिस तरह से हिंसा हुई, उसका काला चिट्ठा खुल गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच के लिए जो तीन सदस्यीय पैनल बनाया था, उसकी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस की सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति भरोसा पूरी तरह से डांवाडोल हो गया है। TMC और मुख्यमंत्री ने आनन-फानन में मुर्शिदाबाद हिंसा के लिए 'बाहरियों' और बीएसएफ को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी। लेकिन, रिपोर्ट ने TMC नेताओं, पश्चिम बंगाल पुलिस और पश्चिम बंगाल सरकार को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। आज की तारीख में ये तीनों ही ममता बनर्जी की कमान में हैं, इसलिए मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकतीं और उन्हें इसका जवाब और हिसाब देना ही पड़ेगा।जन-प्रतिनिधि ही दंगाइयों के साथ कर रहे थे जनता का सफायामुर्शिदाबाद हिंसा पर कलकत्ता हाई कोर्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने जो फैक्ट फाइंटिंग रिपोर्ट दी है, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए कलंक से कम नहीं है। रिपोर्ट के कुछ तथ्य इतने खौफनाक हैं, जिसे देखकर लगता है जो लोग जनता की हिफाजत के उत्तरदायी हैं, वही न सिर्फ हिंसा की साजिश रच रहे थे और उसे भड़काने में लगे थे, बल्कि दंगे में खुद सक्रिय रूप से शामिल भी हो गए थे। रिपोर्ट में शमशेरगंज के बेतबोना गांव की घटना का जिक्र किया गया है। इसमें 11 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय पार्षद महबूब आलम और पार्टी के लोकल MLA अमिरुल इस्लाम के दंगाइयों के साथ मौजूद होने की बात कही गई है।दंगे को अंजाम देने में दंगाइयों के साथ TMC नेता सक्रिय तौर पर शामिलइस रिपोर्ट से यह खुलासा हो गया है कि मुर्शिदाबाद में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह से योजनाबद्ध था और दंगाइयों ने चुन-चुनकर पीड़ितों, उनके घरों और संपत्तियों को निशाना बनाया। यह कोई सामान्य हिंसा नहीं थी। रिपोर्ट के आधार पर लगता है कि दंगाइयों ने इसकी पूरी प्लानिंग कर रखी थी। मसलन, एक घटना में पंपों और पानी के टैंकों को पहले ही बर्बाद कर दिया गया था, ताकि अगर लोग अपने घरों में दंगाइयों की आग लगाने की वजह से जल रहे हों या उनकी प्रॉपर्टी तबाह हो रही है तो उन्हें बचाने के लिए पानी ही उपलब्ध न रहे।बंगाल पुलिस ने भी चुप रहकर दिया दंगाइयों का साथयही नहीं, एक घटना का जिक्र कर बताया गया है कि दंगाइयों ने एक परिवार की महिलाओं के सारे कपड़ों पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दिया, ताकि उनके पास पहनने के लिए एक भी कपड़े न बच जाएं। मुर्शिदाबाद में जो कुछ हुआ, वह किसी खौफनाक सपने से भी परे है। दंगाई सत्ताधारी नेताओं की मौजूदगी में मौत का कहर बरपा रहे थे और बंगाल पुलिस 'पूरी तरह से निष्क्रिय और अनुपस्थित थी।'पीड़ितों ने जांच समिति को बताया कि हिंसा के दौरान पुलिस ने उन्हें पूरी तरह से उनके हाल पर छोड़ दिया था। कुछ भी सुनने के लिए तैयार ही नहीं थी। 12 अप्रैल की एक घटना में स्थानीय विधायकों ने उपद्रव होते देखा और वहां से आंख मूंद कर चले गए। कुल मिलाकर इलाके को दंगाइयों के हाथों में दे दिया गया था। वह टारगेट चुन रहे थे। उनपर हमला कर रहे थे। उनके घर और दुकान जला रहे थे। क्योंकि, उन्हें सत्ता की ओर से खुली छूट मिली हुई थी। रिपोर्ट में एक जगह लिखा गया है, 'स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम ने हमलों को निर्देशित किया। लोकल पुलिस बिलकुल भी एक्टिव नहीं थी और गायब थी। पुलिस कुछ नहीं कर रही थी।'देश में शरणार्थी बन गए लोग, राजनीति करती रही सरकारअकेले मुर्शिदाबाद के बेतबोना गांव में करीब 113 घर तोड़ दिए गए, जो अब रहने लायक नहीं है। लाखों के सामान, आभूषण, कैश, फर्नीचर और मवेशी लूट लिए गए। इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों बेघर हो गए, जिनमें से अनेकों अभी तक अपने घर नहीं लौट सके हैं। दंगों के दौरान स्थिति ये थी कि जान बचाने के लिए कई परिवारों को अपने ही देश में किसी तरह से नावों के जरिए गंगा पार करके सरकारी इमारतों में शरण लेना पड़ गया। हाईकोर्ट की जांच समिति ने जो कुछ पाया है, उससे तीन बातें निकलती हैं। हिंसा को पूरी तसल्ली से अंजाम दिया गया। दंगाइयों को सत्ताधारी TMC के स्थानीय नेतृत्व का पूर्ण और सक्रिय समर्थन प्राप्त था; और बंगाल पुलिस ने पीड़ितों के जान को दंगाइयों के भरोसे छोड़कर आपराधिक चुप्पी साथ ली थी। सवाल है कि कम से कम दो दिनों तक मुर्शिदाबाद इस तरह से योजनाबद्ध तरीके से जलाया जा रहा था और राज्य की मुख्यमंत्री को इसकी जरा भी भनक नहीं थी? जबकि, उन्होंने हिंसा के करीब 22-23 दिन बाद अपनी सरकार की आपराधिक साजिश या लापरवाही का दोष दूसरों पर डालने की कोशिश कर रही थीं।मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिम्मेदारी से क्यों नहीं बच सकतीं5 मई, 2025 को मुर्शिदाबाद दौरे के मौके पर सीएम बनर्जी ने कहा था, 'BSF ने गोलियां क्यों चलाईं? अगर BSF ने गोलियां नहीं चलाई होतीं तो दूसरे दिन घटना और नहीं भड़कती। मैं BJP से कहना चाहूंगी कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के बजाए सीमाओं की चिंता करे।.
..मैं पीड़ितों से मिलने आई थी, लेकिन उन्हें गुपचुप तरीके से हटा दिया गया है। इसमें कुछ साजिश है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह घटना सुनियोजित थी और यह पूरी तरह से योजनाबद्ध थी।''मैंने अधिकांश साजिश का पर्दाफाश कर दिया है, मैं मीडिया के सामने इसका पर्दाफाश करूंगी...दुर्भाग्य से, कुछ मीडिया घरानों ने झूठ फैलाने में BJP के हाथों की कठपुतली बन गए।' लेकिन, कलकत्ता हाईकोर्ट की जांच समिति के नतीजे और ममता बनर्जी के दंगों के बाद के बयान को देखने से लगता है कि उन्हें सबकुछ पता था कि उनकी पार्टी के नेताओं और उनकी पुलिस ने मुर्शिदाबाद में क्या कुछ किया गया है। लेकिन, अपना वोट बैंक बचाने के चक्कर में उन्होंने इस मुद्दे पर भी राजनीति को अहमियत दी। इसलिए, मुर्शिदाबाद के दंगों में मारे गए लोगों के खून के छींटे सीएम बनर्जी की साड़ी पर पड़ चुके हैं, जिसका जवाब उन्हें आने वाले दिनों में बंगाल की जनता को देना ही पड़ेगा।
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