NEET PG Supreme Court News Today in Hindi: नीट पीजी में सीट ब्लॉकिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों को NEET PG Counselling से पहले मेडिकल पीजी की फीस बताने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG में बड़े पैमाने पर हो रही सीट ब्लॉकिंग पर चिंता जाहिर की है। साथ ही प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी को नीट पीजी काउंसलिंग से पहले फीस बताने का निर्देश दिया है। पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए काउंसलिंग में सीट ब्लॉकिंग जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कोर्ट ने यह कदम उठाया। सीट ब्लॉकिंग पर कोर्ट ने दंड की भी बात कही है।NEET PG Counselling: ऑल इंडिया और स्टेट राउंड एक साथ!जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि सीट ब्लॉकिंग की कुप्रथा सीटों की वास्तविक उपलब्धता को बिगाड़ देती है। यह उम्मीदवारों के बीच असमानता को बढ़ावा देती है। अक्सर यह प्रक्रिया योग्यता की बजाय किस्मत पर आधारित हो जाती है। अदालत ने निर्देश जारी कर कहा कि 'राष्ट्रीय स्तर पर नीट पीजी 2025 काउंसलिंग कैलंडर लागू किया जाए। ताकि ऑल इंडिया कोटा और राज्य स्तरीय राउंड एक साथ चलें। साथ ही नीट में सीट ब्लॉकिंग रोकी जा सके।' नीट पीजी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल के आदेश में कहा कि- सीट ब्लॉकिंग पारदर्शिता की कमी और कमजोर नीति अमल जैसी सिस्टमेटिक खामियों को दर्शाता है। सभी प्राइवेट/डीम्ड यूनिवर्सिटी को प्री-काउंसलिंग फीस के बारे में बताना जरूरी किया जाए, जिसमें ट्यूशन, हॉस्टल, सिक्योरिटी डिपोजिट और अन्य शुल्क शामिल हों। नैशनल मेडिकल कमिशन के तहत एक केंद्रीकृत फीस रेगुलेशन मैकेनिज्म बनाया जाए। राउंड 2 के बाद सीट अपग्रेड की सुविधा दी जाए, जिससे पहले से एडमिशन ले चुके कैंडिडेट्स बेहतर विकल्प चुन सकें। NEET PG के मल्टी-शिफ्ट एग्जाम में पारदर्शिता के लिए रॉ स्कोर, आंसर-की और नॉर्मलाइजेशन फॉर्म्युला सार्वजनिक किया जाए।Seat Blocking क्या होती है?सीट ब्लॉकिंग काउंसलिंग प्रक्रिया का एक स्टेप है, जिसमें उम्मीदवार जानबूझकर किसी कॉलेज की सीट सिर्फ ब्लॉक करने के लिए चुनता है। भले ही उसे उस सीट पर एडमिशन न लेना हो। ताकि वह सीट किसी और को न मिल सके। बाद में वे उस सीट के अपग्रेड होने का इंतजार करते हैं। या कहीं और बेहतर सीट मिल गई तो उसे छोड़ देते हैं। ऐसे में जरूरतमंद और इच्छुक कैंडिडेट्स को भी वह सीट नहीं मिल पाती है और अंत में खाली रह जाती है।.
सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG में बड़े पैमाने पर हो रही सीट ब्लॉकिंग पर चिंता जाहिर की है। साथ ही प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी को नीट पीजी काउंसलिंग से पहले फीस बताने का निर्देश दिया है। पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए काउंसलिंग में सीट ब्लॉकिंग जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कोर्ट ने यह कदम उठाया। सीट ब्लॉकिंग पर कोर्ट ने दंड की भी बात कही है।NEET PG Counselling: ऑल इंडिया और स्टेट राउंड एक साथ!जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि सीट ब्लॉकिंग की कुप्रथा सीटों की वास्तविक उपलब्धता को बिगाड़ देती है। यह उम्मीदवारों के बीच असमानता को बढ़ावा देती है। अक्सर यह प्रक्रिया योग्यता की बजाय किस्मत पर आधारित हो जाती है। अदालत ने निर्देश जारी कर कहा कि 'राष्ट्रीय स्तर पर नीट पीजी 2025 काउंसलिंग कैलंडर लागू किया जाए। ताकि ऑल इंडिया कोटा और राज्य स्तरीय राउंड एक साथ चलें। साथ ही नीट में सीट ब्लॉकिंग रोकी जा सके।'नीट पीजी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसलासुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल के आदेश में कहा कि- सीट ब्लॉकिंग पारदर्शिता की कमी और कमजोर नीति अमल जैसी सिस्टमेटिक खामियों को दर्शाता है। सभी प्राइवेट/डीम्ड यूनिवर्सिटी को प्री-काउंसलिंग फीस के बारे में बताना जरूरी किया जाए, जिसमें ट्यूशन, हॉस्टल, सिक्योरिटी डिपोजिट और अन्य शुल्क शामिल हों। नैशनल मेडिकल कमिशन के तहत एक केंद्रीकृत फीस रेगुलेशन मैकेनिज्म बनाया जाए। राउंड 2 के बाद सीट अपग्रेड की सुविधा दी जाए, जिससे पहले से एडमिशन ले चुके कैंडिडेट्स बेहतर विकल्प चुन सकें। NEET PG के मल्टी-शिफ्ट एग्जाम में पारदर्शिता के लिए रॉ स्कोर, आंसर-की और नॉर्मलाइजेशन फॉर्म्युला सार्वजनिक किया जाए।Seat Blocking क्या होती है?सीट ब्लॉकिंग काउंसलिंग प्रक्रिया का एक स्टेप है, जिसमें उम्मीदवार जानबूझकर किसी कॉलेज की सीट सिर्फ ब्लॉक करने के लिए चुनता है। भले ही उसे उस सीट पर एडमिशन न लेना हो। ताकि वह सीट किसी और को न मिल सके। बाद में वे उस सीट के अपग्रेड होने का इंतजार करते हैं। या कहीं और बेहतर सीट मिल गई तो उसे छोड़ देते हैं। ऐसे में जरूरतमंद और इच्छुक कैंडिडेट्स को भी वह सीट नहीं मिल पाती है और अंत में खाली रह जाती है।
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