22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था. अपने उसी उत्साह के साथ बीजेपी ने चुनाव प्रचार शुरू किया. उस दौरान मंदिर कार्यक्रम में विपक्ष की गैरमौजूदगी को मुद्दा बनाया गया. इसी मुद्दे पर विपक्ष के कई नेता अपने दल को छोड़कर बीजेपी में आए.
22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था. अपने उसी उत्साह के साथ बीजेपी ने चुनाव प्रचार शुरू किया. उस दौरान मंदिर कार्यक्रम में विपक्ष की गैरमौजूदगी को मुद्दा बनाया गया.
इसी मुद्दे पर विपक्ष के कई नेता अपने दल को छोड़कर बीजेपी में आए. इसके साथ ही मोदी की गारंटी को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया गया. PM Modi in Kanyakumari: भगवा चोला और 45 घंटे की साधना, ध्यान में लीन PM मोदी की कन्याकुमारी से आई PHOTOSडिंपल कपाड़िया से सिर्फ 10 साल छोटे हैं दामाद अक्षय कुमार, लंदन से सासु मां को लेकर मुंबई लौटे 'खिलाड़ी'- PHOTOSNatasa Stankovic की फैमिली में है कौन-कौन, शादी से पहले इन बॉलीवुड फिल्मों में आईं नजर'पापा घोड़े का नाम सितारा रख दो'.... 'पंचायत 3' में छोटे से सीन में सबका ध्यान खींचने वाली 'ब्यूटी क्वीन' कौन है? बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव को बहुत आक्रामक तरीके से लड़ा है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि 75 दिनों तक चले चुनावी अभियान के दौरान पीएम मोदी ने कुल मिलाकर 206 रैलियां-जनसभाएं कीं और 80 से अधिक इंटरव्यू दिए. इस मामले में उन्होंने रिकॉर्ड बनाया है. 2019 के चुनाव में उन्होंने 142 रैलियां की थीं. इस बार बीजेपी का कैंपेन शुरुआत में राम मंदिर और मोदी की गारंटी के नाम से शुरू हुआ लेकिन पहले चरण के बाद ही पूरी तरह गियर शिफ्ट करके बेहद आक्रामक तरीके से विपक्ष पर हमला किया. इसी मुद्दे पर विपक्ष के कई नेता अपने दल को छोड़कर बीजेपी में आए. इसके साथ ही मोदी की गारंटी को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया गया.पहले चरण के चुनाव के बाद बीजेपी ने चुनावी अभियान की दिशा उस वक्त चेंज की जब कांग्रेस के घोषणापत्र की तुलना उसने मुस्लिम लीग से कर दी. उसके साथ ही पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के उस बयान को बार-बार दोहराया गया जिसमें संसाधनों पर अल्पसंख्यकों के पहले हक की बात कही गई थी. इसके साथ ही बीजेपी ने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाया. उसके बाद घुसपैठिया, मंगलसूत्र, विरासत टैक्स जैसे मुद्दों पर बीजेपी ने विपक्ष को घेरा.वैसे भी यदि कुल मिलाकर हालिया वर्षों के चुनावी नारों की बात की जाए तो 2024 के चुनाव में 'अबकी बार 400 पार' और 'फिर एक बार मोदी सरकार' के नारों ने मतदाताओं का ध्यान अपनी तरफ खूब आकर्षित किया. इसके साथ ही कांग्रेस का 'हाथ बदलेगा हालात', 'न्याय योजना' और भाजपा का चुनावी स्लोगन 'मोदी की गारंटी' भी लोगों को खूब पसंद आई. हालांकि, हर बार का चुनाव उसके संदेश के लिए याद किया जाता है जो जनता के बीच राजनीतिक पार्टियां परोसती हैं. चाहे 1977 आपातकाल के समय का चुनाव हो, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर भरा चुनाव हो, 2004 में भाजपा के द्वारा 'शाइनिंग इंडिया' स्लोगन के साथ लड़ा गया चुनाव हो. वैसे ही पीएम मोदी के तीन चुनावों का स्लोगन भी लोगों को याद रहेगा. 2014 में भाजपा 'अबकी बार मोदी सरकार', 2019 में 'मैं भी चौकीदार' और अब 2024 में 'अबकी बार 400 पार' चुनावी स्लोगन के साथ मैदान में रही और यह स्लोगन लोगों की जुबां पर छा गया. इन तीनों चुनावों में जो स्लोगन भाजपा की तरफ से दिए गए उसके जरिए पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार अभियान के तहत एक एजेंडा सेट किया और विपक्ष इससे बाहर आने के लिए छटपटाता नजर आया.वैसे यदि चुनावों की बात की जाए तो पीएम मोदी ने सबसे अधिक यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में रैलियां की. अब लाख टके का सवाल ये है कि बीजेपी के नेतृत्व में क्या इस तरह के आक्रामक चुनाव अभियान के बाद एनडीए 400 सीटों के आंकड़ों को पार करेगा. यानी इस फिगर पर बात करने वाले ये मानकर चल रहे हैं कि बीजेपी आसानी से तीसरी बार सत्ता में आ जाएगी और लगातार तीसरी बार सत्ता आने का पंडित नेहरू के रिकॉर्ड की पीएम नरेंद्र मोदी बराबरी कर लेंगे. इसके विपरीत ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी अपने 2019 के 303 सीट तक पहुंचने के अपने ही रिकॉर्ड की बराबरी भी कर पाएगी या उससे भी कम पर सिमट जाएगी.
मोदी की गारंटी से शुरू हुए चुनाव अभियान ने कब शिफ
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