प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों पर ED की कार्रवाई में बाधा डालने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। ED ने इस मामले में CBI जांच की मांग की है।
नई दिल्ली/कोलकाता: I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों की दखलंदाजी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता के तहत 17 अपराधों की केंद्रीय जांच ब्यूरो ( CBI ) से जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में, ED ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर ने
8 जनवरी को I-PAC के प्रतीक जैन के घर पर ED की छापेमारी में न केवल बाधा डाली, बल्कि अधिकारियों को डरा-धमकाकर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की। ED ने मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।\प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि तलाशी स्थल से अवैध रूप से और जबरदस्ती ले जाए गए सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स, स्टोरेज मीडिया और दस्तावेजों को तुरंत जब्त करने, सील करने, फोरेंसिक रूप से संरक्षित करने और ED की कानूनी हिरासत में वापस करने का निर्देश दिया जाए। ED ने इस घटना को चौंकाने वाला, अभूतपूर्व और असाधारण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करना आवश्यक है। ED ने अपनी याचिका में बताया कि 8 जनवरी को I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के आवासीय परिसर पर छापा, अवैध कोयला खनन से प्राप्त लगभग 3,000 करोड़ रुपये के बहु-राज्य धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले की जांच के हिस्से के रूप में मारा गया था। आरोप है कि प्रतीक जैन को इस अवैध धन में से 20 करोड़ रुपये मिले थे। छापेमारी के दौरान, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव, DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और डिप्टी पुलिस कमिश्नर के साथ-साथ कई पुलिसकर्मी परिसर में घुस गए। उन्होंने न केवल प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को धमकाना शुरू किया, बल्कि अधिकारियों से आपत्तिजनक सामग्री वाली फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी छीन लिए। इसके अलावा, उन्हें आगे की तलाशी लेने की अनुमति नहीं दी गई।\ED ने कोलकाता पुलिस पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ED ने कहा कि राज्य के संवैधानिक और पुलिस अधिकारियों के अवैध कार्यों के लिए FIR दर्ज कराने के लिए स्थानीय पुलिस से संपर्क करना व्यर्थ होगा, क्योंकि इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं, जिनके पास गृह मंत्रालय भी है और जिनके अधीन पुलिस काम करती है। याचिका में यह भी बताया गया है कि आरोपियों पर FIR दर्ज करने और CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय (High Court) में नहीं हो सकी, क्योंकि उनके समर्थकों ने हंगामा किया और जज को सुनवाई स्थगित करने के लिए मजबूर किया। ED ने आरोप लगाया है कि हंगामे के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थकों को WhatsApp संदेश भेजकर बुलाया गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि ED अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी FIR दर्ज न की जाए। यह मामला पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव का एक और उदाहरण बनता जा रहा है, और इसमें शामिल व्यक्तियों पर कार्रवाई की संभावना को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या वह ED की मांग को स्वीकार करता है या नहीं।
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