ईरान की एक बार फिर पश्चिमी देशों से दोस्ती के संकेत मिल रहे हैं. अरसे बाद ईरान के विदेश मंत्री यूरोपीय नेताओं से बात करने जा रहे हैं. इसका मकसद किसी भी तरह यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के प्रतिबंधों से बचना है.
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब धीरे-धीरे बातचीत की राह पकड़ती दिख रही है. बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से अहम बातचीत करेंगे.
इसका मकसद संयुक्त राष्ट्र की ओर से फिर से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को टालना है. यूरोपीय देश चाहते थे कि यूएन को और प्रतिबंध लगाए जाएं, ताकि उसे परमाणु बम बनाने से रोका जाए. ईरान किसी भी सूरत में इससे बचना चाहता है. कहा तो ये भी जा रहा है कि इसी बहाने वे अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत का रास्ता भी तलाश रहे हैं. फ्रांस के एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि इस कॉल का उद्देश्य यूरोपीय देशों द्वारा तय शर्तों की समीक्षा करना है, जिनके आधार पर प्रतिबंधों को टाला जा सकता है. यूरोपीय देश पिछले महीने से ईरान पर स्नैपबैक मैकेनिज्म के तहत UN प्रतिबंध दोबारा लागू करने की प्रक्रिया में जुटे हैं. ये प्रतिबंध 2015 की उस परमाणु संधि के तहत हटाए गए थे, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में तोड़ दिया था. ईरान बार-बार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह सिर्फ ऊर्जा व चिकित्सा शोध जैसे कामों के लिए यूरेनियम समृद्ध कर रहा है. हालांकि पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान धीरे-धीरे हथियार बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. अब सारी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत से तनाव घटेगा और प्रतिबंध टल सकेंगे या हालात एक बार फिर टकराव की तरफ बढ़ेंगे. IAEA के साथ नई शुरुआत पिछले हफ्ते ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बीच सहयोग बहाल करने पर सहमति बनी थी. इसमें परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी है. यही यूरोपीय देशों की प्रमुख मांगों में से एक थी, ताकि ईरान पर प्रतिबंधों की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए. तनाव की वजह क्या जून में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे. उनका आरोप था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता के बेहद करीब पहुंच चुका है. इस हमले के बाद IAEA के निरीक्षण बाधित हो गए और हालात और बिगड़ गए. अब यूरोपीय देश चाहते हैं कि ईरान पारदर्शिता दिखाए और IAEA के साथ पूरी तरह सहयोग करे. ईरान की उम्मीदें और चेतावनी ईरान ने बुधवार को यूरोपीय देशों से “सकारात्मक रवैये और सद्भावना” की अपील की. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, “अगर कुछ यूरोपीय पक्ष शिकायत करते हैं और कहते हैं कि यह काफी नहीं है, तो इसका मतलब है कि वे IAEA को ही स्वीकार नहीं कर रहे. हमें उम्मीद है कि आज और आगे होने वाले संवाद से सभी इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि तनाव बढ़ाना किसी के हित में नहीं है.”
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