Interview: इल्तिजा ने अमर उजाला से कहा- महबूबा की बेटी होना शुरुआत, इसके बाद लोग मुझे चाहते हैं तो मेरी क्षमता

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Interview: इल्तिजा ने अमर उजाला से कहा- महबूबा की बेटी होना शुरुआत, इसके बाद लोग मुझे चाहते हैं तो मेरी क्षमता
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मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती नाना और अम्मी की पारंपरिक सीट बिजबिहाड़ा से चुनाव लड़ रही हैं।

अंदाज-ए-बयां मैं पाकिस्तान की प्रवक्ता नहीं हूं, मेरा पासपोर्ट भारतीय है, नीले रंग का है, तो मैं क्यों उनकी वकालत करूं कश्मीर में जो सियासतदां हैं, लोग उन्हें गलत समझते हैं, इज्जत नहीं देते, मेरे लिए इज्जत सबसे अहम है, प्यार न भी मिले, पर सम्मान होना चाहिए जितना आदमी में दम है उससे ज्यादा मुझमें दम है। यह समय बताएगा, मुझे मेरा बाजा बजाने की जरूरत नहीं मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती नाना और अम्मी की पारंपरिक सीट बिजबिहाड़ा से चुनाव लड़ रही हैं। खानदान ने जब पहले से दो पूर्व सीएम दिए हों तो उम्मीदों का ग्राफ काफी ऊंचा होता है। विपक्ष कहता है वह बच्ची हैं, परिवारवाद का आरोप कदम दर कदम उनके साथ चलता है। चुनाव और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर इल्तिजा मुफ्ती से अमर उजाला की खास बातचीत। कश्मीर में पॉलिटिक्स की प्राथिमकता क्या है? सच कहूं तो पांच साल से कश्मीर में पॉलिटिक्स तो बंद हो गई है। चुनाव दस साल बाद हो रहा है। पांच साल से बाबू-डम चल रहा है। बाहर के ब्यूरोक्रेट ऐश कर रहे हैं। लोगों के मसाइल हैं, वे किसके पास जाएं। अच्छा है हमारे यहां चुनाव हो रहे हैं। कश्मीर का मसला पाकिस्तान से जुड़ा होता है, आप क्या कहेंगी? बातचीत सबसे करनी चाहिए। ये टीआरपी का प्वाइंट बंन जाता है। सब सोचते हैं चलो इससे पाकिस्तान पर सवाल पूछते हैं। मैं वहां की स्पोक्सपर्सन तो नहीं हूं। मेरा पासपोर्ट भारतीय है। मैं क्यों उनकी वकालत करूं। उनकी अपनी मुश्किलें हैं। इल्तिजा का पहला चुनाव है, नर्वस हैं? नहीं। पर आप लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरूं इसका तनाव होता है। लोगों की उम्मीदें होती हैं। लोग जब जुड़ते हैं तो डर होता है कि क्या होगा अगर मैंने उन्हें निराश किया। मैं सो नहीं पाती हूं फिर। आप देखेंगी मेरी आंखों के नीचे गड्ढे हो गए हैं, क्योंकि मैं सो नहीं पा रही। सड़क-पानी-बिजली हमेशा चुनावों में बड़े मुद्दे होते हैं, कश्मीर में कश्मीरी पंडित या लोगों को जेल से छुड़ाना है क्या? मैं जहां जाती हूं, हर जगह चार-पांच औरतें मिलती हैं, वो बहुत ज्यादा रोती हैं। वे इतनी मासूम होती हैं कि उन्हें ये भी नहीं पता कि किस कानून में उनके घर के इंसान को गिरफ्तार किया गया है। कश्मीर में सब कुछ ठीक नहीं है। हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। हमारे नौजवान जेलों में सड़ रहे हैं। परिवारवाद के आरोपों के बीच, मुफ्ती की तीसरी पीढ़ी चुनाव लड़ रही व अब्दुल्ला की चौथी पीढ़ी प्रचार कर रही है, इसका फायदा है या नुकसान? दोनों बातें हैं। बहुत से लोग मुंह पर कहते हैं, आपके लिए वोट है, आपकी पार्टी के लिए नहीं। उन्होंने पांच साल में मुझे देखा है। लेकिन, यह दोधारी तलवार है। मैं महबूबा मुफ्ती की बेटी हूं, यह मेरी शुरुआत है। इसके बाद लोग मुझे चाहते हैं तो यह मेरी क्षमता है। अब जीत या हार,जो भी अवाम तय करेगी मंजूर है। सियासत खून में है, लेकिन कभी लगा नाना-अम्मी ने कोई गलती की जो मैं कभी नहीं करूंगी? बहुत सी चीजें गलतियों के बारे में नहीं होतीं। नीयत ठीक होती है, नतीजे ठीक नहीं होते। मैं बस उम्मीद करती हूं लोग मुझसे नफरत न करें। कश्मीर में जो ज्यादातर सियासतदां हैं, लोग उन्हें गलत समझते हैं, इज्जत नहीं देते। मेरे लिए इज्जत अहम है। प्यार न भी मिले, पर इज्जत होनी चाहिए। जब मैं पीठ दूसरी तरफ करूं तो कोई मुझे बुरा न कहे। बहुत से निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। आपको क्या लगता है, नेशनल काॅन्फ्रेंस बड़ा खतरा है या ये लोग? विधानसभा चुनाव उम्मीदवार की लड़ाई है। पार्टी भी इतनी जरूरी नहीं जितना उम्मीदवार होता है। सबको हक है तो क्यों नहीं चुनाव लड़ें। यह लोकतंत्र हैै, देखते हैं कहां किसका कितना जोर है, कहां किसका गढ़ है। ये बच्ची है, कश्मीर नहीं जानती, कैसा लगता है जब ये कहा जाता है? हां ये बहुत होता है। मेरी उम्र 37 साल है। लेकिन कुछ लोग ऐसे करते हैं, इसको ये बताओ, इसको ये सिखाओ। वक्त सब बता देगा। मेरी क्या क्षमता है। मैं तो सब जगह कहती हूं, जितना आदमी में दम है उससे ज्यादा मुझमें दम है। ये समय बताएगा, मुझे मेरा बाजा बजाने की जरूरत नहीं है। बचपन में नाना और अम्मी ने आतंकवाद के बारे में कैसे बताया था? मेरी पैदाइश दिल्ली की है। जब खाला की किडनैपिंग हुई और मैं स्कूल जाती थी तो मेरे साथ सुरक्षा गार्ड होते थे। तब मुझे थोड़ा-थोड़ा समझ में आया। जब दस साल की थी तो यह समझ थी कि शायद मेरी अम्मी वापस लौटकर घर नहीं आएंगी। मैं उन्हें खो दूंगी। मेरी मां तलाकशुदा हैं। मेरे पास सिर्फ वही हैं। तो बच्ची होकर भी पता होता था कि कुछ गड़बड़ है। आप कश्मीर की बेटी हैं, फिक्र होगी आप शादी कब करेंगी, आपका ड्रीम मैन? ये ड्रीम मैन की बात नहीं। उस व्यक्ति से मिलने का मसला है, जिसके लिए आप ये कदम उठाएं। मुझे डर लगता है। अगर कोई बंदा हो ऐसा जो शादी करने लायक हो जिसकी आंखों में आप अपना भविष्य देखें, तो मैं भी अपना परिवार चाहूंगी। मैं दिल से पारंपरिक हूं। घर सजाना चाहती हूं। लेकिन यह ऊपर वाला लिखता है।.

अंदाज-ए-बयां मैं पाकिस्तान की प्रवक्ता नहीं हूं, मेरा पासपोर्ट भारतीय है, नीले रंग का है, तो मैं क्यों उनकी वकालत करूं कश्मीर में जो सियासतदां हैं, लोग उन्हें गलत समझते हैं, इज्जत नहीं देते, मेरे लिए इज्जत सबसे अहम है, प्यार न भी मिले, पर सम्मान होना चाहिए जितना आदमी में दम है उससे ज्यादा मुझमें दम है। यह समय बताएगा, मुझे मेरा बाजा बजाने की जरूरत नहीं मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती नाना और अम्मी की पारंपरिक सीट बिजबिहाड़ा से चुनाव लड़ रही हैं। खानदान ने जब पहले से दो पूर्व सीएम दिए हों तो उम्मीदों का ग्राफ काफी ऊंचा होता है। विपक्ष कहता है वह बच्ची हैं, परिवारवाद का आरोप कदम दर कदम उनके साथ चलता है। चुनाव और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर इल्तिजा मुफ्ती से अमर उजाला की खास बातचीत। कश्मीर में पॉलिटिक्स की प्राथिमकता क्या है? सच कहूं तो पांच साल से कश्मीर में पॉलिटिक्स तो बंद हो गई है। चुनाव दस साल बाद हो रहा है। पांच साल से बाबू-डम चल रहा है। बाहर के ब्यूरोक्रेट ऐश कर रहे हैं। लोगों के मसाइल हैं, वे किसके पास जाएं। अच्छा है हमारे यहां चुनाव हो रहे हैं। कश्मीर का मसला पाकिस्तान से जुड़ा होता है, आप क्या कहेंगी? बातचीत सबसे करनी चाहिए। ये टीआरपी का प्वाइंट बंन जाता है। सब सोचते हैं चलो इससे पाकिस्तान पर सवाल पूछते हैं। मैं वहां की स्पोक्सपर्सन तो नहीं हूं। मेरा पासपोर्ट भारतीय है। मैं क्यों उनकी वकालत करूं। उनकी अपनी मुश्किलें हैं। इल्तिजा का पहला चुनाव है, नर्वस हैं? नहीं। पर आप लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरूं इसका तनाव होता है। लोगों की उम्मीदें होती हैं। लोग जब जुड़ते हैं तो डर होता है कि क्या होगा अगर मैंने उन्हें निराश किया। मैं सो नहीं पाती हूं फिर। आप देखेंगी मेरी आंखों के नीचे गड्ढे हो गए हैं, क्योंकि मैं सो नहीं पा रही। सड़क-पानी-बिजली हमेशा चुनावों में बड़े मुद्दे होते हैं, कश्मीर में कश्मीरी पंडित या लोगों को जेल से छुड़ाना है क्या? मैं जहां जाती हूं, हर जगह चार-पांच औरतें मिलती हैं, वो बहुत ज्यादा रोती हैं। वे इतनी मासूम होती हैं कि उन्हें ये भी नहीं पता कि किस कानून में उनके घर के इंसान को गिरफ्तार किया गया है। कश्मीर में सब कुछ ठीक नहीं है। हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। हमारे नौजवान जेलों में सड़ रहे हैं। परिवारवाद के आरोपों के बीच, मुफ्ती की तीसरी पीढ़ी चुनाव लड़ रही व अब्दुल्ला की चौथी पीढ़ी प्रचार कर रही है, इसका फायदा है या नुकसान? दोनों बातें हैं। बहुत से लोग मुंह पर कहते हैं, आपके लिए वोट है, आपकी पार्टी के लिए नहीं। उन्होंने पांच साल में मुझे देखा है। लेकिन, यह दोधारी तलवार है। मैं महबूबा मुफ्ती की बेटी हूं, यह मेरी शुरुआत है। इसके बाद लोग मुझे चाहते हैं तो यह मेरी क्षमता है। अब जीत या हार,जो भी अवाम तय करेगी मंजूर है। सियासत खून में है, लेकिन कभी लगा नाना-अम्मी ने कोई गलती की जो मैं कभी नहीं करूंगी? बहुत सी चीजें गलतियों के बारे में नहीं होतीं। नीयत ठीक होती है, नतीजे ठीक नहीं होते। मैं बस उम्मीद करती हूं लोग मुझसे नफरत न करें। कश्मीर में जो ज्यादातर सियासतदां हैं, लोग उन्हें गलत समझते हैं, इज्जत नहीं देते। मेरे लिए इज्जत अहम है। प्यार न भी मिले, पर इज्जत होनी चाहिए। जब मैं पीठ दूसरी तरफ करूं तो कोई मुझे बुरा न कहे। बहुत से निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। आपको क्या लगता है, नेशनल काॅन्फ्रेंस बड़ा खतरा है या ये लोग? विधानसभा चुनाव उम्मीदवार की लड़ाई है। पार्टी भी इतनी जरूरी नहीं जितना उम्मीदवार होता है। सबको हक है तो क्यों नहीं चुनाव लड़ें। यह लोकतंत्र हैै, देखते हैं कहां किसका कितना जोर है, कहां किसका गढ़ है। ये बच्ची है, कश्मीर नहीं जानती, कैसा लगता है जब ये कहा जाता है? हां ये बहुत होता है। मेरी उम्र 37 साल है। लेकिन कुछ लोग ऐसे करते हैं, इसको ये बताओ, इसको ये सिखाओ। वक्त सब बता देगा। मेरी क्या क्षमता है। मैं तो सब जगह कहती हूं, जितना आदमी में दम है उससे ज्यादा मुझमें दम है। ये समय बताएगा, मुझे मेरा बाजा बजाने की जरूरत नहीं है। बचपन में नाना और अम्मी ने आतंकवाद के बारे में कैसे बताया था? मेरी पैदाइश दिल्ली की है। जब खाला की किडनैपिंग हुई और मैं स्कूल जाती थी तो मेरे साथ सुरक्षा गार्ड होते थे। तब मुझे थोड़ा-थोड़ा समझ में आया। जब दस साल की थी तो यह समझ थी कि शायद मेरी अम्मी वापस लौटकर घर नहीं आएंगी। मैं उन्हें खो दूंगी। मेरी मां तलाकशुदा हैं। मेरे पास सिर्फ वही हैं। तो बच्ची होकर भी पता होता था कि कुछ गड़बड़ है। आप कश्मीर की बेटी हैं, फिक्र होगी आप शादी कब करेंगी, आपका ड्रीम मैन? ये ड्रीम मैन की बात नहीं। उस व्यक्ति से मिलने का मसला है, जिसके लिए आप ये कदम उठाएं। मुझे डर लगता है। अगर कोई बंदा हो ऐसा जो शादी करने लायक हो जिसकी आंखों में आप अपना भविष्य देखें, तो मैं भी अपना परिवार चाहूंगी। मैं दिल से पारंपरिक हूं। घर सजाना चाहती हूं। लेकिन यह ऊपर वाला लिखता है।

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