India-EU FTA: नॉर्वे ने भारत और यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का पू्र्ण समर्थन किया है। भारत में नॉर्वे की राजदूत ने कहा है कि इससे उनके देश के साथ-साथ पूरे यूरोप के साथ भारत के आर्थिक संबंधों में और मजबूती आएगी।
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार संधि को अंतिम रूप देने के करीब हैं। अगले हफ्ते इसकी औपचारिक घोषणा होने वाली है। 20 वर्षों से अटके इस संधि को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। यह लाइन भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों के नेताओं का है। यूरोप का एक देश नॉर्वे इस संधि का हिस्सा नहीं है, फिर भी उसने भारत के साथ इसकी वजह से आर्थिक तालमेल में और बढ़ोतरी होने का संकेत दिया है। नॉर्वे ने इस संधि का पूरी तरह से समर्थन किया है।' भारत -ईयू संधि ऐतिहासिक मील का पत्थर'एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा है कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हो रही मुक्त व्यापार संधि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है; इससे नॉर्वे और पूरे यूरोपीय क्षेत्र के साथ के भारत के व्यापारिक संबंधों को एक सकारात्मक गति मिलेगी। बता दें कि नॉर्वे , यूके और स्विट्जरलैंड यूरोप के उन बड़े देशों में शामिल हैं, जो यूरोपियन यूनियन का हिस्सा नहीं है। ' भारत -यूरोप के संबंध और मजबूत होंगे'स्टेनर ने भारत और यूरोपीय संघ की मुक्त व्यापार संधि को लेकर जो कहा है, उसका मतलब ये है कि उनका देश यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन का हिस्सा है और भारत के साथ उसका पहले से ही ट्रेड एंड इकॉनमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट है, जो 1 अक्टूबर से लागू हुआ है। उन्होंने कहा कि ' भारत के साथ हमारे संबंधों के लिए यह माइलस्टोन था।' इसी वजह से उन्होंने आगे कहा भारत और यूरोपीय संघ में जो संधि हो रही है, उससे भारत के यूरोप के साथ संबंध और मजबूत होंगे।मुक्त व्यापार के समर्थन में है नॉर्वे उनका कहना है कि यूरोपियन यूनियन नॉर्वे का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है, इससे भारत और यूरोप में जो आर्थिक तालमेल बढ़ेगा, वह उनके देश के लिए भी सकारात्मक होगा। यही नहीं, ऐसे समय में जब जियोपॉलिटिक्स में टैरिफ और संरक्षणवाद का दबाव वापस आ गया है, नॉर्वे ने मुक्त व्यापार का समर्थन किया है। 'ट्रेड बैरियर को खत्म करने में विश्वास'अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यापारिक कूटनीति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत और यूरोप जैसे देश प्रभावित हुए हैं, और माना कि मुक्त व्यापार से छोटे और खुली अर्थव्यवस्था के तौर पर नॉर्वे को बहुत ज्यादा फायदा हुआ है। उन्होंने कहा, 'हम नियम आधारित मल्टीलैटरल सिस्टम में भरोसा करते हैं और हमारा विश्वास ट्रेड बैरियर को खत्म करने में है, न कि उन्हें बढ़ाने में।'.
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार संधि को अंतिम रूप देने के करीब हैं। अगले हफ्ते इसकी औपचारिक घोषणा होने वाली है। 20 वर्षों से अटके इस संधि को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। यह लाइन भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों के नेताओं का है। यूरोप का एक देश नॉर्वे इस संधि का हिस्सा नहीं है, फिर भी उसने भारत के साथ इसकी वजह से आर्थिक तालमेल में और बढ़ोतरी होने का संकेत दिया है। नॉर्वे ने इस संधि का पूरी तरह से समर्थन किया है।'भारत-ईयू संधि ऐतिहासिक मील का पत्थर'एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा है कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हो रही मुक्त व्यापार संधि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है; इससे नॉर्वे और पूरे यूरोपीय क्षेत्र के साथ के भारत के व्यापारिक संबंधों को एक सकारात्मक गति मिलेगी। बता दें कि नॉर्वे, यूके और स्विट्जरलैंड यूरोप के उन बड़े देशों में शामिल हैं, जो यूरोपियन यूनियन का हिस्सा नहीं है। 'भारत-यूरोप के संबंध और मजबूत होंगे'स्टेनर ने भारत और यूरोपीय संघ की मुक्त व्यापार संधि को लेकर जो कहा है, उसका मतलब ये है कि उनका देश यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन का हिस्सा है और भारत के साथ उसका पहले से ही ट्रेड एंड इकॉनमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट है, जो 1 अक्टूबर से लागू हुआ है। उन्होंने कहा कि 'भारत के साथ हमारे संबंधों के लिए यह माइलस्टोन था।' इसी वजह से उन्होंने आगे कहा भारत और यूरोपीय संघ में जो संधि हो रही है, उससे भारत के यूरोप के साथ संबंध और मजबूत होंगे।मुक्त व्यापार के समर्थन में है नॉर्वेउनका कहना है कि यूरोपियन यूनियन नॉर्वे का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है, इससे भारत और यूरोप में जो आर्थिक तालमेल बढ़ेगा, वह उनके देश के लिए भी सकारात्मक होगा। यही नहीं, ऐसे समय में जब जियोपॉलिटिक्स में टैरिफ और संरक्षणवाद का दबाव वापस आ गया है, नॉर्वे ने मुक्त व्यापार का समर्थन किया है। 'ट्रेड बैरियर को खत्म करने में विश्वास'अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यापारिक कूटनीति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत और यूरोप जैसे देश प्रभावित हुए हैं, और माना कि मुक्त व्यापार से छोटे और खुली अर्थव्यवस्था के तौर पर नॉर्वे को बहुत ज्यादा फायदा हुआ है। उन्होंने कहा, 'हम नियम आधारित मल्टीलैटरल सिस्टम में भरोसा करते हैं और हमारा विश्वास ट्रेड बैरियर को खत्म करने में है, न कि उन्हें बढ़ाने में।'
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