भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत तेज हो गई है। दोनों देश फरवरी से इस पर काम कर रहे हैं। एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका की यात्रा पर है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार 2030 तक दोगुना होकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: अमेरिका ने अपने टैरिफ के 'चक्रव्यूह' में पूरी दुनिया को फंसा दिया है। इसे भेदने का एक ही तरीका है- अमेरिका के साथ व्यापार समझौता। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की कोशिशें तेज हुई हैं। इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल इस हफ्ते अमेरिका की यात्रा पर जाएगा। यह यात्रा दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता का एक और दौर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की थी। बताया था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। यह समझौता फरवरी से ही चर्चा में है। तब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने अपने अधिकारियों को एक डील पर काम करने और 2025 की शरद ऋतु तक इसके पहले चरण को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया था। अब तक बातचीत के पांच दौर पूरे हो चुके हैं। एक अधिकारी ने बताया, 'भारतीय टीम इस हफ्ते दौरा करेगी।' उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि चर्चाएं सही रास्ते पर हैं। ये अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं। अब देखना ये है कि डील पर खुशखबरी कब तक आती है। अमेरिका ने भारत से की है मदद की अपेक्षा इसी बीच अमेरिका और चीन के बीच टेंशन बढ़ गई है। अमेरिका ने भारत से मदद की अपेक्षा की है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चीन की नई निर्यात पाबंदियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन को रेयर अर्थ यानी दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के निर्यात पर मनमानी करने नहीं देंगे। बेसेंट ने इसे ग्लोबल सप्लाई चेन पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति 'चीन बनाम बाकी दुनिया' जैसी है। अमेरिका अपने साथी देशों के साथ मिलकर काम करेगा। इनमें भारत और यूरोपीय सहयोगी शामिल हैं। पिछले महीने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल न्यूयॉर्क गए थे। वहां उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के साथ व्यापार परामर्श के लिए एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उस बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आपसी रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के शीघ्र निष्कर्ष के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी। अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान गोयल ने यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर और भारत में अमेरिका के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। उन्होंने प्रस्तावित व्यापार ढांचे के कई पहलुओं पर चर्चा की।व्यापार बाधाओं को कम करेगा समझौता यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25% का जवाबी टैरिफ और अतिरिक्त 25% का जुर्माना लगाया है। यह कदम भारत की ओर से रूस से कच्चे तेल की लगातार खरीद के जवाब में उठाया गया है। इससे भारतीय निर्यात पर कुल 50% का टैरिफ हो गया है। यह स्थिति द्विपक्षीय व्यापार समझौते के महत्व को और बढ़ा देती है। व्यापारिक बाधाओं को यह कम करने में मदद करेगा।इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। वर्तमान में यह व्यापार 191 अरब डॉलर है। 2024-25 में लगातार चौथे साल अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है। कुल व्यापार 131.
84 अरब डॉलर का है। इसमें भारत से 86.5 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है।फिलहाल, अमेरिका भारत के कुल माल निर्यात का लगभग 18% हिस्सा है। आयात में इसका हिस्सा 6.22% है और देश के कुल व्यापार में 10.73% है। इसलिए, यह प्रस्तावित समझौता नई दिल्ली की बाहरी व्यापार रणनीति के लिए बहुत अहम है। यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को आसान बनाने में मदद करेगा। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। व्यापार बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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