India Gaza Plan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर 19 फरवरी को वॉशिंगटन में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक हो रही है। भारत का इस बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है। लेकिन, आगे के लिए उसकी रणनीति अहम हो सकती है।
नई दिल्ली: भारत अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस ऑफ बोर्ड का हिस्सा नहीं बना है और इसलिए लग नहीं रहा कि 19 फरवरी को वॉशिंगटन में होने जा रही इसकी पहली औपचारिक बैठक में शामिल भी होगा। यह मुद्दा हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुए भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी उठ चुका है। इस बैठक में भारत ने ट्रंप की इस पहल पर अरब लीग के देशों की राय को ध्यान से सुना है, लेकिन इसपर इसकी खुद की रणनीति क्या है, यह जाहिर नहीं होने दिया है। बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठकET की एक रिपोर्ट के अनुसार उसे पुख्ता तौर पर पता चला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के प्रस्ताव पर भारत सरकार अभी भी गौर कर रही है। लेकिन, वॉशिंगटन में होने वाली शुरुआती बैठक में अब जितना वक्त बच गया है, उससे यह लगभग तय कि इसका हिस्सा भारत नहीं बनने जा रहा। यह बैठक वॉशिंगटन के डोनाल्ड जे ट्रंप यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित की गई है।भारत अभी बोर्ड में शामिल नहींभारत ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए हमेशा से ही दो-राष्ट्र वाले समाधान की वकालत की है। वैसे मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत और इजरायल के संबंधों ने नए आसमान छूए हैं। ऐसे में अगर भारत आगे भी ट्रंप की पहल का हिस्सा बनने पर विचार करता है, तो उसे इस बात पर भी गौर करना पड़ेगा कि वह फिलिस्तीन के साथ अपने संबंधों को किसी तरह से नई धार दे सकता है। पाकिस्तान-तुर्की वाली चुनौतीभारत को ट्रंप के ऑफर को स्वीकार करने में जो देरी हो रही है, उसकी एक वजह यह भी है कि बोर्ड ऑफ पीस में इसके दो दुश्मनों पाकिस्तान और तुर्की की गजब की जुगलबंदी है। ट्रंप सरकार पहले गाजा में पाकिस्तान को फोर्स भेजने के लिए भी प्रोत्साहन दे चुकी है। इन दोनों की इस बोर्ड में मौजूदगी की वजह से भारत के लिए फिलिस्तीन और इजरायल के साथ तालमेल बिठाना ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसी महीने इजरायल जाएंगे मोदीगौर करने वाली बात ये है कि इसी महीने के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल भी जाने वाले हैं। 2017 के बाद यह उनकी पहली इजरायल यात्रा होगी और वे इस देश में जाने वाले पहले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी हैं। पीएम मोदी के तेल अवीव और यरुशलम जाने की संभावना है। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और तेजी बदल रही जियोपॉलिटिक्स को देखते हुए भारत की आगे की रणनीति क्या होगी, पीएम मोदी के दौरे में यह एजेंडा भी हावी हो सकता है। नेतन्याहू भी बनेंगे पीस बैठक का हिस्सा!कुछ इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी बोर्ड ऑफ पीस बैठक में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है ति यह इजरायल पर हमास के आंतकियों के अक्टूबर, 2023 में किए गए खौफनाक हमले के बाद उनकी अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ पहली बैठक होगी।.
नई दिल्ली: भारत अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस ऑफ बोर्ड का हिस्सा नहीं बना है और इसलिए लग नहीं रहा कि 19 फरवरी को वॉशिंगटन में होने जा रही इसकी पहली औपचारिक बैठक में शामिल भी होगा। यह मुद्दा हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुए भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी उठ चुका है। इस बैठक में भारत ने ट्रंप की इस पहल पर अरब लीग के देशों की राय को ध्यान से सुना है, लेकिन इसपर इसकी खुद की रणनीति क्या है, यह जाहिर नहीं होने दिया है। बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठकET की एक रिपोर्ट के अनुसार उसे पुख्ता तौर पर पता चला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के प्रस्ताव पर भारत सरकार अभी भी गौर कर रही है। लेकिन, वॉशिंगटन में होने वाली शुरुआती बैठक में अब जितना वक्त बच गया है, उससे यह लगभग तय कि इसका हिस्सा भारत नहीं बनने जा रहा। यह बैठक वॉशिंगटन के डोनाल्ड जे ट्रंप यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित की गई है।भारत अभी बोर्ड में शामिल नहींभारत ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए हमेशा से ही दो-राष्ट्र वाले समाधान की वकालत की है। वैसे मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत और इजरायल के संबंधों ने नए आसमान छूए हैं। ऐसे में अगर भारत आगे भी ट्रंप की पहल का हिस्सा बनने पर विचार करता है, तो उसे इस बात पर भी गौर करना पड़ेगा कि वह फिलिस्तीन के साथ अपने संबंधों को किसी तरह से नई धार दे सकता है। पाकिस्तान-तुर्की वाली चुनौतीभारत को ट्रंप के ऑफर को स्वीकार करने में जो देरी हो रही है, उसकी एक वजह यह भी है कि बोर्ड ऑफ पीस में इसके दो दुश्मनों पाकिस्तान और तुर्की की गजब की जुगलबंदी है। ट्रंप सरकार पहले गाजा में पाकिस्तान को फोर्स भेजने के लिए भी प्रोत्साहन दे चुकी है। इन दोनों की इस बोर्ड में मौजूदगी की वजह से भारत के लिए फिलिस्तीन और इजरायल के साथ तालमेल बिठाना ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसी महीने इजरायल जाएंगे मोदीगौर करने वाली बात ये है कि इसी महीने के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल भी जाने वाले हैं। 2017 के बाद यह उनकी पहली इजरायल यात्रा होगी और वे इस देश में जाने वाले पहले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी हैं। पीएम मोदी के तेल अवीव और यरुशलम जाने की संभावना है। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और तेजी बदल रही जियोपॉलिटिक्स को देखते हुए भारत की आगे की रणनीति क्या होगी, पीएम मोदी के दौरे में यह एजेंडा भी हावी हो सकता है। नेतन्याहू भी बनेंगे पीस बैठक का हिस्सा!कुछ इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी बोर्ड ऑफ पीस बैठक में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है ति यह इजरायल पर हमास के आंतकियों के अक्टूबर, 2023 में किए गए खौफनाक हमले के बाद उनकी अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ पहली बैठक होगी।
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