India Petroleum Reserves: बीते कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिली। इसकी वजह सोशल मीडिया वे दावे थे जिनमें कहा गया कि देश में सिर्फ 5 दिनों का तेल भंडार मौजूद है। हालांकि, हकीकत बिल्कुल अलग है। देश में 74 दिन का ऑयल रिजर्व...
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल के बारे में अक्सर अफवाहें फैलती रहती हैं। इससे लोग पंपों पर गाड़ी में ईंधन भराने के लिए लाइन में लग जाते हैं। हाल के दिनों में लखनऊ, भोपाल, इंदौर, प्रयागराज से लेकर दिल्ली तक ऐसे नजारे देखने को मिले। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया गया कि भारत के पास सिर्फ 5 दिन का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है। जबकि यह बात सच से कोसों दूर है। 'पीआईबी फैक्ट चेक' ने इस तरह के दावों को खारिज किया है। सच यह है कि भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है। अभी लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और भूमिगत गुफाओं में समर्पित रणनीतिक भंडारण शामिल है। आइए, यहां 74 दिन के तेल भंडार के पीछे का पूरा हिसाब-किताब समझते हैं। पेट्रोलियम रिजर्व क्या होता है? पेट्रोलियम रिजर्व का मतलब है कच्चे तेल या पेट्रोल-डीजल का ऐसा स्टॉक, जिसे कोई देश भविष्य की सप्लाई के लिए जमा करके रखता है। ठीक वैसे ही जैसे घरों में लोग अनाज जमा करके रखते हैं। उसी तरह देश भी तेल का रिजर्व बनाए रखते हैं।भारत में मोटे तौर पर दो तरह का पेट्रोलियम रिजर्व 1.
स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्वइसे आप पेट्रोलियम की एक 'तिजोरी' मान सकते हैं। इसे सरकार आपातकालीन स्थितियों के लिए बनाए रखती है। आम दिनों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसका इस्तेमाल सिर्फ युद्ध, तेल संकट या सप्लाई में रुकावट आने पर ही किया जाता है। भारत के पास मंगलुरु, पादुर और विशाखापत्तनम में तीन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं, जहां तेल को जमीन के नीचे बनी बड़ी-बड़ी गुफा जैसी टंकियों में जमा करके रखा जाता है।2. कमर्शियल पेट्रोलियम रिजर्वइंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर तेल की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल स्टॉक बनाए रखती हैं। ये स्टॉक रोजाना की खपत के लिए होते हैं। ज्यादातर यह स्ट्रॉक जमीन के ऊपर बनी बड़ी-बड़ी टंकियों में जमा किया जाता है। दावा बनाम सचभारत का कुल स्ट्रैटेजिक रिजर्व 53.3 लाख टन है। देश में हर महीने लगभग 2 करोड़ टन कच्चे तेल की खपत होती है। इसका मतलब है कि रोजाना लगभग 6.7 लाख टन तेल खर्च होता है। इस हिसाब से स्ट्रैटेजिक रिजर्व को आदर्श रूप से लगभग 9 दिन की खपत को पूरा करना चाहिए। लेकिन, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में बताया कि ये भंडार अभी अपनी क्षमता का सिर्फ 64% ही भरे हुए हैं। इसका मतलब है कि भारत के पास अभी लगभग 33.7 लाख टन रणनीतिक कच्चा तेल जमा है, जो लगभग 5-6 दिनों तक चल सकता है।सुरेश गोपी के अनुसार, अगर रणनीतिक और वाणिज्यिक, दोनों तरह के भंडारों को मिला दिया जाए तो भारत कुल 74 दिनों की खपत के बराबर तेल जमा करके रख सकता है। 26 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि भारत के पास अभी करीब 60 दिनों का मिला-जुला स्ट्रैटेजिक और कमर्शियल रिजर्व है। इसमें कच्चे तेल के साथ रिफाइंड पेट्रोल और डीजल भी शामिल है।दूसरे देशों के पास कितने दिनों का पेट्रोलियम रिजर्व है?भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। हालांकि, अमेरिका और चीन जैसे बड़े उपभोक्ताओं की तुलना में इसका रिजर्व काफी कम है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास 27 दिनों का पेट्रोल, 21 दिनों का डीजल और 11 दिनों का कच्चा तेल रिजर्व है। श्रीलंका के पास अभी करीब 25 दिनों का रिजर्व है।क्या पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने का डर है?केंद्र सरकार और IOCL, BPCL और HPCL जैसी तेल कंपनियों ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। सभी 1,00,000 पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।सरकार ने कहा है कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम कर लिया है। सभी रिफाइनरियां अपनी 100% क्षमता पर काम कर रही हैं।पंप पर 'आउट ऑफ स्टॉक' के बोर्ड कैसे?कई पेट्रोल पंपों पर जो 'स्टॉक खत्म' के बोर्ड दिख रहे हैं, उनकी मुख्य वजह घबराहट में ज्यादा खरीदारी और पेमेंट से जुड़ी नीतियों में हुए बदलाव हैं। भारत ने क्या किए हैं भविष्य के इंतजाम?ब्लूमबर्ग के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने अप्रैल के लिए रूस से पहले ही 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद लिया है। HPCL ने अंगोला से भी 20 लाख बैरल तेल खरीदा है। इसकी डिलीवरी मई में होगी।डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर का अनुमान है कि भारतीय कंपनियां अगले महीने वेनेजुएला से 80 लाख बैरल तेल आयात कर सकती हैं। अक्टूबर 2020 के बाद से यह सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, अमेरिका, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से भी तेल मंगाया जा रहा है। ईरान के साथ सौदों की तैयारियां भी चल रही हैं।केप्लर का अनुमान है कि इन खरीदों से एक महीने में भारत की दैनिक तेल उपलब्धता बढ़कर 50 लाख बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह मिडिल ईस्ट से कम हुई सप्लाई की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर पाएगा। लंबे समय में भारत को अपनी तेल खरीद और बढ़ानी होगी।
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