India-Russia Deal: मिडिल-ईस्ट में टेंशन की वजह से भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात जनवरी 2026 के स्तर से दोगुना होकर कम से कम 40% तक पहुंच सकता है. दोनों देशों में बातचीत चल रही है.
युद्ध ने कई समीकरण बदल दिए हैं, अमेरिकी बैन के कारण भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था. लेकिन अब युद्ध ने मिडिल-ईस्ट से तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है. जिसके बाद भारत अब अधिक से अधिक कच्चा तेल रूस से खरीदने पर विचार कर रहा है, ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो.
और पढ़ेंन्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस संकट ने भारत को एक बार फिर रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने का मौका दे दिया है और भारत ने अपना कदम बढ़ा दिया है.दरअसल, मिडिल-ईस्ट में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रूट बाधित हो गया है. यह मार्ग दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन रास्तों में से एक है, और भारत जैसे देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस संकट के चलते वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे भारत के सामने भी ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. LNG को लेकर रूस से बातचीत शुरू बता दें, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है. लेकिन फिलहाल सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं. ऐसे में भारत अब रूस को एक वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लायर के रूप में देख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस के बीच लिक्विफाइड नैचुरल गैस को लेकर एक बड़ी डील पर बातचीत शुरू हो चुकी है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हो रही है. सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूसी एलएनजी खरीदने के संदर्भ में अमेरिका को जानकारी दे दी है. Advertisement इतना ही नहीं, भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 40% तक ले जाने पर विचार कर रहा है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात जनवरी 2026 के स्तर से दोगुना होकर कम से कम 40% तक पहुंच सकता है. रूस पहले से ही भारत को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता रहा है, जो मौजूदा महंगाई और ऊर्जा संकट के दौर में भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. अमेरिका को चुभ सकता है रूस-भारत का करीब आनागौरतलब है कि रूसी तेल खरीदने को लेकर ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा था, जिसके बाद अमेरिका ने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ थोप दिया था. यही नहीं, जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया तो, उस समय उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसके बाद टैरिफ में छूट दी गई. लेकिन अब में मिडिल-ईस्ट में जिस तरह के हालात हैं, उसे देखते हुए भारत अब अमेरिका से विशेष छूट मांग रहा है, ताकि वह रूस से ऊर्जा खरीद जारी रख सके. इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा भू-राजनीतिक पहलू भी है. क्योंकि भारत और रूस फिर से करीब आने वाला है, जो कि अमेरिका को चुभ सकता है. रूस भी इस अवसर का फायदा उठाते हुए भारत के साथ अपने रिश्ते को और गहरा करने की कोशिश कर रहा है. Advertisement वैसे भी भारत और रूस एनर्जी के अलावा बिजली, एविएशन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार अब रुपये और रूबल में भी किया जा रहा है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश हो रही है.---- समाप्त ----
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