चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है, इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर इस तिथि पर हनुमान जन्मोत्सव बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार यह पर्व आज मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर भक्त हनुमान जी विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं। बजरंगबली की साधना करने से जीवन में आ रहे दुख-दर्द दूर होते हैं और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप भी हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पूजा के दौरान विधिपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें। इस चालीसा का पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। आइए पढ़ते हैं हनुमान चालीसा। ।।हनुमान चालीसा का पाठ।। ।। दोहा।।श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।। बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ।। ।। चौपाई ।।जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।। राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।। महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।। कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।। हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । कांधे मूंज जनेउ साजै ।। शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवंदन ।। बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ।। भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचन्द्र के काज संवारे ।। लाय सजीवन लखन जियाए । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते । कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ।। तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ।। जुग सहस्त्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।। दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।। राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।। आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक तै कांपै ।। भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावै ।। नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।। संकट तै हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।। सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।। और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ।। चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।। साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ।। राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।। सनातन शास्त्रों में हनुमान पूजा का विशेष उल्लेख देखने को मिलता है। तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।। अंतकाल रघुवरपुर जाई । जहां जन्म हरिभक्त कहाई ।। और देवता चित्त ना धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।। संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।। जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।। जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।। तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मह डेरा ।। ।। दोहा ।।पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।। यह भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव आज, नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और बजरंगबली के मंत्र यह भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026 Wishes: अपने प्रियजनों को इन शुभ संदेशों से दें हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।.
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर इस तिथि पर हनुमान जन्मोत्सव बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार यह पर्व आज मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर भक्त हनुमान जी विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं। बजरंगबली की साधना करने से जीवन में आ रहे दुख-दर्द दूर होते हैं और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप भी हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पूजा के दौरान विधिपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें। इस चालीसा का पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। आइए पढ़ते हैं हनुमान चालीसा। ।।हनुमान चालीसा का पाठ।। ।। दोहा।।श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।। बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ।। ।। चौपाई ।।जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।। राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।। महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।। कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।। हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । कांधे मूंज जनेउ साजै ।। शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवंदन ।। बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ।। भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचन्द्र के काज संवारे ।। लाय सजीवन लखन जियाए । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते । कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ।। तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ।। जुग सहस्त्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।। दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।। राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।। आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक तै कांपै ।। भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावै ।। नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।। संकट तै हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।। सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।। और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ।। चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।। साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ।। राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।। सनातन शास्त्रों में हनुमान पूजा का विशेष उल्लेख देखने को मिलता है। तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।। अंतकाल रघुवरपुर जाई । जहां जन्म हरिभक्त कहाई ।। और देवता चित्त ना धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।। संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।। जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।। जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।। तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मह डेरा ।। ।। दोहा ।।पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।। यह भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव आज, नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और बजरंगबली के मंत्र यह भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026 Wishes: अपने प्रियजनों को इन शुभ संदेशों से दें हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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