गोपालगंज के सबेया में एयरपोर्ट बनाने की योजना सीमांकन तक ही सीमित है। भूमि अधिग्रहण में दिक्कतों के कारण परियोजना अटकी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण पूरा होने तक आगे की कार्रवाई संभव नहीं है।
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। सबेया एयरपोर्ट के निर्माण की योजना संचिकाओं में फंसी नजर आ रही है। लंबे प्रयास के बाद भी बात एयरपोर्ट की जमीन के सीमांकन से आगे नहीं बढ़ सकी है। इस एयरपोर्ट के विस्तार की योजना लंबे समय से धरातल पर नहीं उतर सकी है। यह स्थिति तब है जबकि केंद्र की उड़ान योजना में में इसे शामिल किया गया है। इसके तहत छोटे-छोटे शहरों से भी लोगों को हवाई सेवा देने का उद्देश्य शामिल है। हथुआ प्रखंड में स्थित सबेया एयरपोर्ट का निर्माण 1868 में अंग्रेजों ने कराया था। तब चीन के नजदीक होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से यह एयरपोर्ट काफी अहम था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश आर्मी ने सबेया एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया। आजादी के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस हवाई अड्डे को ओवरटेक कर लिया। ओवरटेक किए जाने के बाद रक्षा मंत्रालय के स्तर पर इसे विकसित करने की कवायद नहीं की गई। तब से यह एयरपोर्ट उपेक्षित पड़ा रहा। 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय इस एयरपोर्ट को लेकर कुछ समय तक सुगबुगाहट दिखी। तब एयरपोर्ट के रनवे को दुरुस्त कराया गया तथा कुछ विमान भी यहां उतरे। समय के साथ रक्षा मंत्रालय ने इस एयरपोर्ट को उसके हालत पर छोड़ दिया। एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण का पेच करीब पांच साै एकड़ क्षेत्र में फैले इस सबेया एयरपोर्ट की ओर से रक्षा मंत्रालय की नजर हटने का नतीजा यह रहा कि एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण कारियों का कब्जा हो गया। उड़ान योजना के इस एयरपोर्ट के शामिल होने के बाद अतिक्रमण हटाने की कवायद प्रारंभ की गई। तब आधिकारिक तौर पर कुल 1011 लोगों को अतिक्रमणकारी के रूप में चिह्नित किया गया। रक्षा मंत्रालय अनुसार सबेया हवाई अड्डा की 338 एकड़ जमी पर 1011 लोगों ने अतिक्रमण किया है। इसके बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया। रक्षा संपदा अधिकारी दानापुर की ओर से अतिक्रमण कारियों को नोटिस जारी होने के बाद फिर अतिक्रमण हटाने का मामला सुस्ती में पड़ गया है। प्रशासनिक सुगबुगाहट के बाद हुआ जमीन का सीमांकन रक्षा संपदा अधिकारी दानापुर के दिशानिर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर कुछ समय से यहां सुगबुगाहट दिखी है। इस बीच एयरपोर्ट की कुल जमीन का सीमांकन कार्य कराया गया है। इसके तहत जमीन के चारों ओर कटीले तारों को लगाया गया है। पिछले तीन-चार साल में बदलाव के नाम पर यहां सिर्फ यहीं कार्य हुआ है। उड़ान योजना में शामिल होने के बाद जगी थी विकास की उम्मीद सबेया एयरपोर्ट को ''उड़ान योजना'' में शामिल करने के बाद गोपालगंज और उसके आस-पास के जिलें के लोगों के बीच उम्मीद की नयी किरण जगी थी। दरअसल इस इलाके के करीब डेढ़ लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। ऐसे में अगर एयरपोर्ट शुरू हो जाता है तो इससे लोगों को काफी सहूलियत होगी, साथ ही इलाके में रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही जिले के पर्यटन को भी एक नयी उड़ान मिल सकेगी। 2016 में प्रारंभ की गई थी उड़ान योजना 2016 में केंद्र सरकार ने देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई सेवा देने के उद्देश्य से उड़ान योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत बिहार के आरा, बेगूसराय, बेतिया, कैमूर, भागलपुर, बिहारशरीफ, बिहटा, वीरपुर, बक्सर, छपरा, डेहरी आन सोन, फारबिसगंज, हथुआ , जहानाबाद, जोगबनी, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नरिया, पंचनपुर, रक्सौल, सहरसा और वाल्मीकिनगर को भी रखा गया। इस योजना में हथुआ के सबेया एयरपोर्ट के शामिल होने के बाद भी एयरपोर्ट का कायाकल्प करने की योजना अटकी हुई है। कहीं खेत तो कहीं बने मकान सबेया एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों ने इसके बड़े भू-भाग को कहीं खेत बना दिया है तो कहीं मकान का निर्माण कराया गया है। आज भी एयरपोर्ट की जमीन पर खेती का कार्य अतिक्रमणकारी कर रहे हैं। साथ ही बनाए गए मकान में लोग पूरे परिवार के साथ रहकर कब्जा जमाए हुए हैं। क्या कहते हैं अधिकारी? सबेया एयरपोर्ट की जमीन के सीमांकन का कार्य करीब-करीब पूर्ण करा लिया गया है। जमीन पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में विभागीय निर्देश के आलोक में कार्रवाई की जा रही है। - अभिषेक कुमार चंदन, एसडीओ हथुआ.
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। सबेया एयरपोर्ट के निर्माण की योजना संचिकाओं में फंसी नजर आ रही है। लंबे प्रयास के बाद भी बात एयरपोर्ट की जमीन के सीमांकन से आगे नहीं बढ़ सकी है। इस एयरपोर्ट के विस्तार की योजना लंबे समय से धरातल पर नहीं उतर सकी है। यह स्थिति तब है जबकि केंद्र की उड़ान योजना में में इसे शामिल किया गया है। इसके तहत छोटे-छोटे शहरों से भी लोगों को हवाई सेवा देने का उद्देश्य शामिल है। हथुआ प्रखंड में स्थित सबेया एयरपोर्ट का निर्माण 1868 में अंग्रेजों ने कराया था। तब चीन के नजदीक होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से यह एयरपोर्ट काफी अहम था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश आर्मी ने सबेया एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया। आजादी के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस हवाई अड्डे को ओवरटेक कर लिया। ओवरटेक किए जाने के बाद रक्षा मंत्रालय के स्तर पर इसे विकसित करने की कवायद नहीं की गई। तब से यह एयरपोर्ट उपेक्षित पड़ा रहा। 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय इस एयरपोर्ट को लेकर कुछ समय तक सुगबुगाहट दिखी। तब एयरपोर्ट के रनवे को दुरुस्त कराया गया तथा कुछ विमान भी यहां उतरे। समय के साथ रक्षा मंत्रालय ने इस एयरपोर्ट को उसके हालत पर छोड़ दिया। एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण का पेच करीब पांच साै एकड़ क्षेत्र में फैले इस सबेया एयरपोर्ट की ओर से रक्षा मंत्रालय की नजर हटने का नतीजा यह रहा कि एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण कारियों का कब्जा हो गया। उड़ान योजना के इस एयरपोर्ट के शामिल होने के बाद अतिक्रमण हटाने की कवायद प्रारंभ की गई। तब आधिकारिक तौर पर कुल 1011 लोगों को अतिक्रमणकारी के रूप में चिह्नित किया गया। रक्षा मंत्रालय अनुसार सबेया हवाई अड्डा की 338 एकड़ जमी पर 1011 लोगों ने अतिक्रमण किया है। इसके बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया। रक्षा संपदा अधिकारी दानापुर की ओर से अतिक्रमण कारियों को नोटिस जारी होने के बाद फिर अतिक्रमण हटाने का मामला सुस्ती में पड़ गया है। प्रशासनिक सुगबुगाहट के बाद हुआ जमीन का सीमांकन रक्षा संपदा अधिकारी दानापुर के दिशानिर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर कुछ समय से यहां सुगबुगाहट दिखी है। इस बीच एयरपोर्ट की कुल जमीन का सीमांकन कार्य कराया गया है। इसके तहत जमीन के चारों ओर कटीले तारों को लगाया गया है। पिछले तीन-चार साल में बदलाव के नाम पर यहां सिर्फ यहीं कार्य हुआ है। उड़ान योजना में शामिल होने के बाद जगी थी विकास की उम्मीद सबेया एयरपोर्ट को ''उड़ान योजना'' में शामिल करने के बाद गोपालगंज और उसके आस-पास के जिलें के लोगों के बीच उम्मीद की नयी किरण जगी थी। दरअसल इस इलाके के करीब डेढ़ लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। ऐसे में अगर एयरपोर्ट शुरू हो जाता है तो इससे लोगों को काफी सहूलियत होगी, साथ ही इलाके में रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही जिले के पर्यटन को भी एक नयी उड़ान मिल सकेगी। 2016 में प्रारंभ की गई थी उड़ान योजना 2016 में केंद्र सरकार ने देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई सेवा देने के उद्देश्य से उड़ान योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत बिहार के आरा, बेगूसराय, बेतिया, कैमूर, भागलपुर, बिहारशरीफ, बिहटा, वीरपुर, बक्सर, छपरा, डेहरी आन सोन, फारबिसगंज, हथुआ , जहानाबाद, जोगबनी, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नरिया, पंचनपुर, रक्सौल, सहरसा और वाल्मीकिनगर को भी रखा गया। इस योजना में हथुआ के सबेया एयरपोर्ट के शामिल होने के बाद भी एयरपोर्ट का कायाकल्प करने की योजना अटकी हुई है। कहीं खेत तो कहीं बने मकान सबेया एयरपोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों ने इसके बड़े भू-भाग को कहीं खेत बना दिया है तो कहीं मकान का निर्माण कराया गया है। आज भी एयरपोर्ट की जमीन पर खेती का कार्य अतिक्रमणकारी कर रहे हैं। साथ ही बनाए गए मकान में लोग पूरे परिवार के साथ रहकर कब्जा जमाए हुए हैं। क्या कहते हैं अधिकारी? सबेया एयरपोर्ट की जमीन के सीमांकन का कार्य करीब-करीब पूर्ण करा लिया गया है। जमीन पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में विभागीय निर्देश के आलोक में कार्रवाई की जा रही है। - अभिषेक कुमार चंदन, एसडीओ हथुआ
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