सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी और तेज गिरावट का इतिहास रहा है। सोने ने पहले भी रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद भारी गिरावट दर्ज की है। साल 1974-76, 1980 और 1999-2011 के दौरान ऐसा हुआ है। इस आधार पर विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि सोना का भाव 1 लाख रुपये से नीचे जा सकता...
नई दिल्ली। क्या सोने का सुनहरा दौर खत्म हो गया, कीमतें और गिरेंगी? हालिया गिरावट के बाद यह सवाल लगातार लोगों के मन में उठ रहे हैं। दरअसल, पिछले साल 65% रिटर्न देने के बाद सोने ने 2026 की शुरुआत तो तेजी के साथ की, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद से सोने में गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी में सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर 5,602 डॉलर तक पहुंच गई थीं, लेकिन बाद में तीन महीनों में गिरकर 4,495 डॉलर हो गई, जो टॉप से 20% की गिरावट को दर्शाती है। सोने में बड़ी तेजी का सिलसिला अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ। गोल्ड, अक्टूबर 2022 के निचले स्तर 1,500 डॉलर से 275% बढ़कर जनवरी 2026 तक 5,602 डॉलर तक पहुंच गया। क्या सोने की कीमतें और गिर सकती हैं, इस सवाल का जवाब ऐतिहासिक आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। क्योंकि, सोने में तेजी का यह सिलसिला नया नहीं है ऐसा भी पहले हुआ है। आइये आपको गोल्ड के उस हिस्टोरिकल पैटर्न के बारे में बताते हैं जिसमें सोने ने तेजी के बाद जबरदस्त गिरावट दिखाई है। सोने की कीमतों में गिरावट का इतिहास इतिहास में कम से कम तीन बार सोने ने नए शिखर बनाए हैं और उसके बाद भारी गिरावट दर्ज की है। ऐसे में इस कीमती धातु में बड़े उछाल के बाद गहरी गिरावट आना कोई नई बात नहीं है। 1974 से 1976 का दौर सोने की कीमतों में पहली बार भारी गिरावट 1974 से 1976 के बीच देखी गई। अगस्त 1971 से नवंबर 1974 के बीच सोने की कीमतों में 353% की वृद्धि हुई, जिसके बाद नवंबर 1974 से अगस्त 1976 के बीच 43% की गिरावट आई। यह गिरावट मुख्य रूप से मुद्रास्फीति में कमी, ब्याज दरों में वृद्धि, मजबूत आर्थिक विकास और डॉलर के मजबूत होने के कारण हुई। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में तेल संकट के स्थिर होने और वियतनाम युद्ध की समाप्ति के बाद भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी आई थी। 1980 का दौर क्या कहता है? 1980 के दशक में सोने की कीमतों में दूसरी बार बड़ी गिरावट का दौर आया। अगस्त 1976 से सितंबर 1980 के बीच 541% की बड़ी तेजी के बाद, सितंबर 1980 से जून 1982 के बीच सोने कीमतें 52% टूट गईं। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा क्योंकि दूसरी गिरावट के तुरंत बाद सोने की कीमतों में मंदी का एक औप दौर आया, जिसमें जून 1982 के बाद सोने की कीमतों में 57% की वृद्धि हुई, लेकिन जनवरी 1983 से फरवरी 1985 के बीच इसमें 42% की गिरावट दर्ज की गई। क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? 1980 के दशक में सोने की कीमतों में भारी गिरावट की वजह रही ब्याज दरों में बढ़ोतरी। दरअसल, महंगाई में वृद्धि के कारण तत्कालीन फेड चेयरमैन पॉल वोल्कर ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाए। मजबूत डॉलर और उच्च ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए काफी नेगेटिव मानी जाती हैं। 1999 से 2011 का वक्त वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अगस्त 1999 से अगस्त 2011 के बीच सोने की कीमत में 612% की बढ़ोतरी हुई, जो 1971 के बाद से सबसे लंबी तेजी थी। लेकिन इसके बाद अगस्त 2011 के अंत से दिसंबर 2015 तक इसमें 42% की गिरावट आई। 2011 के बाद सोने की कीमतों में गिरावट के खास कारण अमेरिका में आर्थिक मंदी के बाद, केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति में ढील देना शुरू कर दिया, जिससे सोने का मूल्य गिरने लगा। 2011 से सेंट्रल बैंकों के Quantitative Easing Program में कमी आने के कारण, सोने को सुरक्षित निवेश या डिफेंसिव एसेट के रूप में रखने की आवश्यकता कम हो गई। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर मजबूत होने लगा और इकोनॉमिक इंडिकेटर में सुधार ने सोने के आकर्षण को कम कर दिया। अब 2026 में क्या होगा? अगर 2026 में सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई से औसतन 50% तक गिरती है, तो यह लगभग 2,800-3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी। ऐसे में भारतीय रुपयों में सोने की कीमत 85300 से 91400 रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकती है। मार्च से जून 2025 के बीच सोने की कीमत इन्हीं स्तरों पर थी। कई मार्केट एक्सपर्ट 3,600 डॉलर के स्तर की ओर इशारा कर रहे हैं। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तेल की ऊंची कीमतें न केवल अमेरिकी डॉलर को मजबूत कर रही हैं, बल्कि मुद्रास्फीति को भी बढ़ा रही हैं। ऐसे में हो सकता है कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती ना करे और सोने के लिए काफी नेगेटिव होगा।.
नई दिल्ली। क्या सोने का सुनहरा दौर खत्म हो गया, कीमतें और गिरेंगी? हालिया गिरावट के बाद यह सवाल लगातार लोगों के मन में उठ रहे हैं। दरअसल, पिछले साल 65% रिटर्न देने के बाद सोने ने 2026 की शुरुआत तो तेजी के साथ की, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद से सोने में गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी में सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर 5,602 डॉलर तक पहुंच गई थीं, लेकिन बाद में तीन महीनों में गिरकर 4,495 डॉलर हो गई, जो टॉप से 20% की गिरावट को दर्शाती है। सोने में बड़ी तेजी का सिलसिला अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ। गोल्ड, अक्टूबर 2022 के निचले स्तर 1,500 डॉलर से 275% बढ़कर जनवरी 2026 तक 5,602 डॉलर तक पहुंच गया। क्या सोने की कीमतें और गिर सकती हैं, इस सवाल का जवाब ऐतिहासिक आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। क्योंकि, सोने में तेजी का यह सिलसिला नया नहीं है ऐसा भी पहले हुआ है। आइये आपको गोल्ड के उस हिस्टोरिकल पैटर्न के बारे में बताते हैं जिसमें सोने ने तेजी के बाद जबरदस्त गिरावट दिखाई है। सोने की कीमतों में गिरावट का इतिहास इतिहास में कम से कम तीन बार सोने ने नए शिखर बनाए हैं और उसके बाद भारी गिरावट दर्ज की है। ऐसे में इस कीमती धातु में बड़े उछाल के बाद गहरी गिरावट आना कोई नई बात नहीं है। 1974 से 1976 का दौर सोने की कीमतों में पहली बार भारी गिरावट 1974 से 1976 के बीच देखी गई। अगस्त 1971 से नवंबर 1974 के बीच सोने की कीमतों में 353% की वृद्धि हुई, जिसके बाद नवंबर 1974 से अगस्त 1976 के बीच 43% की गिरावट आई। यह गिरावट मुख्य रूप से मुद्रास्फीति में कमी, ब्याज दरों में वृद्धि, मजबूत आर्थिक विकास और डॉलर के मजबूत होने के कारण हुई। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में तेल संकट के स्थिर होने और वियतनाम युद्ध की समाप्ति के बाद भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी आई थी। 1980 का दौर क्या कहता है? 1980 के दशक में सोने की कीमतों में दूसरी बार बड़ी गिरावट का दौर आया। अगस्त 1976 से सितंबर 1980 के बीच 541% की बड़ी तेजी के बाद, सितंबर 1980 से जून 1982 के बीच सोने कीमतें 52% टूट गईं। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा क्योंकि दूसरी गिरावट के तुरंत बाद सोने की कीमतों में मंदी का एक औप दौर आया, जिसमें जून 1982 के बाद सोने की कीमतों में 57% की वृद्धि हुई, लेकिन जनवरी 1983 से फरवरी 1985 के बीच इसमें 42% की गिरावट दर्ज की गई। क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? 1980 के दशक में सोने की कीमतों में भारी गिरावट की वजह रही ब्याज दरों में बढ़ोतरी। दरअसल, महंगाई में वृद्धि के कारण तत्कालीन फेड चेयरमैन पॉल वोल्कर ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाए। मजबूत डॉलर और उच्च ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए काफी नेगेटिव मानी जाती हैं। 1999 से 2011 का वक्त वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अगस्त 1999 से अगस्त 2011 के बीच सोने की कीमत में 612% की बढ़ोतरी हुई, जो 1971 के बाद से सबसे लंबी तेजी थी। लेकिन इसके बाद अगस्त 2011 के अंत से दिसंबर 2015 तक इसमें 42% की गिरावट आई। 2011 के बाद सोने की कीमतों में गिरावट के खास कारण अमेरिका में आर्थिक मंदी के बाद, केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति में ढील देना शुरू कर दिया, जिससे सोने का मूल्य गिरने लगा। 2011 से सेंट्रल बैंकों के Quantitative Easing Program में कमी आने के कारण, सोने को सुरक्षित निवेश या डिफेंसिव एसेट के रूप में रखने की आवश्यकता कम हो गई। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर मजबूत होने लगा और इकोनॉमिक इंडिकेटर में सुधार ने सोने के आकर्षण को कम कर दिया। अब 2026 में क्या होगा? अगर 2026 में सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई से औसतन 50% तक गिरती है, तो यह लगभग 2,800-3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी। ऐसे में भारतीय रुपयों में सोने की कीमत 85300 से 91400 रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकती है। मार्च से जून 2025 के बीच सोने की कीमत इन्हीं स्तरों पर थी। कई मार्केट एक्सपर्ट 3,600 डॉलर के स्तर की ओर इशारा कर रहे हैं। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तेल की ऊंची कीमतें न केवल अमेरिकी डॉलर को मजबूत कर रही हैं, बल्कि मुद्रास्फीति को भी बढ़ा रही हैं। ऐसे में हो सकता है कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती ना करे और सोने के लिए काफी नेगेटिव होगा।
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