EWS आरक्षण मुद्दे पर MP लोक सेवा आयोग और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस, हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब

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EWS आरक्षण मुद्दे पर MP लोक सेवा आयोग और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस, हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब
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मध्य प्रदेश में EWS आरक्षण से ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग को हटाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। युवतियों का कहना है कि यह असंगत और भेदभावपूर्ण है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर 2024 को तारीख तय की। सरकार और लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा गया...

जबलपुर: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मामला है आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का, जिसमें से इन वर्गों को बाहर रखा गया है। इस मुद्दे को लेकर दो युवतियां, सोमवती पटेल और मीनू कुशवाहा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंची हैं।EWS में 10 प्रतिशत आरक्षणसोमवती और मीनू, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित विज्ञान परीक्षा 2024 की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि EWS आरक्षण में से ओबीसी, एससी और एसटी को हटाना अनुचित है। उन्होंने अपनी याचिका में संविधान के 103वें संशोधन का हवाला दिया है, जिसके तहत EWS को 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।शासकीय वकील ने की याचिका रद्द करने की सिफारिश यह मामला 16 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट के सामने पहली बार पेश हुआ। सरकार की तरफ से शासकीय वकील ने दलील दी कि EWS आरक्षण का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहले ही निपटा चुका है। इसलिए यह याचिका रद्द की जानी चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने सरकार की यह दलील स्वीकार नहीं की। न्यायालय ने 'जनहित अभियान बनाम भारत संघ' मामले के फैसले का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लेने की बात कही।संविधान के अनुच्छेद 16 का हवालाइस मामले की अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने 'जनहित अभियान बनाम भारत संघ 2023' के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण को संविधान सम्मत माना है। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 16 के अनुसार हर वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को EWS आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।याचिकाकर्ताओं का कहना नई नीति गरीबों के साथ भेदभावयाचिकाकर्ताओं के वकील ने आगे तर्क दिया कि मध्य प्रदेश सरकार की नई नीति ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के गरीबों के साथ भेदभाव है। इस पर न्यायालय ने सवाल उठाया कि ओबीसी, एससी और एसटी को पहले से ही आरक्षण मिल रहा है। ऐसे में क्या एक ही व्यक्ति को दो तरह के आरक्षण का लाभ मिल सकता है?एक व्यक्ति को दो तरह का आरक्षणयाचिकाकर्ताओं के वकील ने इसका जवाब देते हुए कहा कि एक व्यक्ति को एक से ज्यादा तरह के आरक्षण का लाभ मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक ओबीसी महिला को ओबीसी आरक्षण और महिला आरक्षण दोनों का लाभ मिल सकता है। अगर वह दिव्यांग भी है तो उसे दिव्यांग आरक्षण का भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा, वकील ने हाईकोर्ट के ही एक अन्य फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, सभी सीटों का नहीं बल्कि केवल अनारक्षित सीटों का 10 प्रतिशत होगा।अगली सुनवाई 11 नवंबर को मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से दो हफ़्ते में जवाब तलब किया है। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की अंतरिम राहत की मांग नहीं मानी। मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर 2024 को होगी।इन वकीलों ने रखीं दलीलइस मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील विनायक प्रसाद शाह, रामेश्वर सिंह ठाकुर, उदय कुमार, पुष्पेंद्र कुमार शाह, जी एस उद्दे और रूप सिंह मरावी ने दलीलें रखीं।.

जबलपुर: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मामला है आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का, जिसमें से इन वर्गों को बाहर रखा गया है। इस मुद्दे को लेकर दो युवतियां, सोमवती पटेल और मीनू कुशवाहा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंची हैं।EWS में 10 प्रतिशत आरक्षणसोमवती और मीनू, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित विज्ञान परीक्षा 2024 की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि EWS आरक्षण में से ओबीसी, एससी और एसटी को हटाना अनुचित है। उन्होंने अपनी याचिका में संविधान के 103वें संशोधन का हवाला दिया है, जिसके तहत EWS को 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।शासकीय वकील ने की याचिका रद्द करने की सिफारिश यह मामला 16 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट के सामने पहली बार पेश हुआ। सरकार की तरफ से शासकीय वकील ने दलील दी कि EWS आरक्षण का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहले ही निपटा चुका है। इसलिए यह याचिका रद्द की जानी चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने सरकार की यह दलील स्वीकार नहीं की। न्यायालय ने 'जनहित अभियान बनाम भारत संघ' मामले के फैसले का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लेने की बात कही।संविधान के अनुच्छेद 16 का हवालाइस मामले की अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने 'जनहित अभियान बनाम भारत संघ 2023' के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण को संविधान सम्मत माना है। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 16 के अनुसार हर वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को EWS आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।याचिकाकर्ताओं का कहना नई नीति गरीबों के साथ भेदभावयाचिकाकर्ताओं के वकील ने आगे तर्क दिया कि मध्य प्रदेश सरकार की नई नीति ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के गरीबों के साथ भेदभाव है। इस पर न्यायालय ने सवाल उठाया कि ओबीसी, एससी और एसटी को पहले से ही आरक्षण मिल रहा है। ऐसे में क्या एक ही व्यक्ति को दो तरह के आरक्षण का लाभ मिल सकता है?एक व्यक्ति को दो तरह का आरक्षणयाचिकाकर्ताओं के वकील ने इसका जवाब देते हुए कहा कि एक व्यक्ति को एक से ज्यादा तरह के आरक्षण का लाभ मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक ओबीसी महिला को ओबीसी आरक्षण और महिला आरक्षण दोनों का लाभ मिल सकता है। अगर वह दिव्यांग भी है तो उसे दिव्यांग आरक्षण का भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा, वकील ने हाईकोर्ट के ही एक अन्य फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, सभी सीटों का नहीं बल्कि केवल अनारक्षित सीटों का 10 प्रतिशत होगा।अगली सुनवाई 11 नवंबर को मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से दो हफ़्ते में जवाब तलब किया है। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की अंतरिम राहत की मांग नहीं मानी। मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर 2024 को होगी।इन वकीलों ने रखीं दलीलइस मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील विनायक प्रसाद शाह, रामेश्वर सिंह ठाकुर, उदय कुमार, पुष्पेंद्र कुमार शाह, जी एस उद्दे और रूप सिंह मरावी ने दलीलें रखीं।

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