नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामला: ईडी ने मीडिया में छपी खबरों का किया खंडन, कहा- कोई कोताही नहीं बरती गई
नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामला: ईडी ने मीडिया में छपी खबरों का किया खंडन, कहा- कोई कोताही नहीं बरती गई भाषा March 12, 2019 10:18 PM पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी। ईडी ने मंगलवार को कहा कि वह दो अरब डॉलर के पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण से जुड़े सभी मुद्दों पर ‘‘अति सक्रियता’’ से विचार कर रहा है। एजेंसी ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया कि जब ब्रिटिश जांचकर्ताओं ने मदद का हाथ बढ़ाया तो भारतीय एजेंसियों ने समय से ‘‘जवाब नहीं दिया।’’धन शोधन निरोधक कानून की आपराधिक धाराओं के तहत मोदी की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ने दो पृष्ठों का स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि इस संदर्भ में मीडिया खबरों से ‘‘कल्पनाओं और गलत निष्कर्षों के साथ छेड़छाड़’’ की गई है। ब्रिटेन के एक दैनिक समाचार पत्र ने हाल ही में एक रिपोर्ट और वीडियो जारी की जिसमें मोदी लंदन की सड़कों पर घूमता दिखाई दे रहा है और बताया गया कि भगोड़ा हीरा व्यापारी शहर के वेस्ट एंड में 80 लाख पाउंड के एक अपार्टमेंट में रह रहा है तथा वह हीरे का नया कारोबार भी चला रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा, ‘‘खबरों में यह गलत बताया गया है कि ब्रिटेन एसएफओ ने मार्च 2018 तक भारतीय अधिकारियों को पुष्टि की थी कि नीरव मोदी ब्रिटेन में है। इस संबंध में यह सूचित किया जाता है कि मार्च 2018 तक या उसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों से ईडी का ऐसा कोई औपचारिक या अनौपचारिक संवाद नहीं हुआ जिसमें यह जानकारी दी गई कि नीरव मोदी ब्रिटेन में है।’’ ईडी ने कहा, “इंटरपोल नोटिसों और अन्य देशों के साथ सहयोग से निपटने के लिए ब्रिटेन की नोडल एजेंसी नेशनल सेंट्रल ब्यूरो ऑफ मैनचेस्टर ने इसके बजाय भारतीय एजेंसियों से वह खुफिया सूचनाएं ‘उपलब्ध’ कराने के लिए कहा जिससे पता चलता हो कि मोदी ब्रिटेन में है। ब्रिटेन सरकार का लगातार यह रुख रहा है कि किसी आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट ‘‘प्रत्यर्पण के अनुरोध’’ के जरिए ही दिया जा सकता है ना कि पत्र अनुरोध या परस्पर कानूनी सहयोग संधि के जरिए। इसलिए मोदी के लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध उसके खिलाफ आरोपपत्र दायर करने के बाद ही भेजा जा सकता है जैसा कि एजेंसी ने पिछले साल मई में किया था।” एजेंसी ने कहा कि ईडी ने आरोपपत्र दायर करने के बाद मुंबई की एक अदालत से मोदी के खिलाफ ताजा गैर जमानती वारंट हासिल किया था और उसे इंटरपोल को भेजा था जिसने गत वर्ष 29 जून को भगोड़े हीरा व्यापारी के खिलाफ गिरफ्तारी के लिए ‘‘रेड वारंट’’ दिया। इसके बाद प्रत्यर्पण के लिए ताजा अनुरोध ब्रिटेन सरकार को भेजा गया। ईडी ने कहा कि कहा कि हालिया मीडिया खबरें दिखाती है कि ‘‘कानूनी मुद्दों से जुड़ी समझ तथ्यों और स्थापित अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा प्रक्रियाओं के विपरीत है।’’ ईडी ने कहा, ‘‘इस तरह की गलत खबरें और कल्पनात्मक खबरें जनता पर बड़े पैमाने पर गलत असर पैदा कर सकती है।’’ Also Read Hindi News से जुड़े अपडेट और व्यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.
नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामला: ईडी ने मीडिया में छपी खबरों का किया खंडन, कहा- कोई कोताही नहीं बरती गई भाषा March 12, 2019 10:18 PM पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी। ईडी ने मंगलवार को कहा कि वह दो अरब डॉलर के पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण से जुड़े सभी मुद्दों पर ‘‘अति सक्रियता’’ से विचार कर रहा है। एजेंसी ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया कि जब ब्रिटिश जांचकर्ताओं ने मदद का हाथ बढ़ाया तो भारतीय एजेंसियों ने समय से ‘‘जवाब नहीं दिया।’’धन शोधन निरोधक कानून की आपराधिक धाराओं के तहत मोदी की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ने दो पृष्ठों का स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि इस संदर्भ में मीडिया खबरों से ‘‘कल्पनाओं और गलत निष्कर्षों के साथ छेड़छाड़’’ की गई है। ब्रिटेन के एक दैनिक समाचार पत्र ने हाल ही में एक रिपोर्ट और वीडियो जारी की जिसमें मोदी लंदन की सड़कों पर घूमता दिखाई दे रहा है और बताया गया कि भगोड़ा हीरा व्यापारी शहर के वेस्ट एंड में 80 लाख पाउंड के एक अपार्टमेंट में रह रहा है तथा वह हीरे का नया कारोबार भी चला रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा, ‘‘खबरों में यह गलत बताया गया है कि ब्रिटेन एसएफओ ने मार्च 2018 तक भारतीय अधिकारियों को पुष्टि की थी कि नीरव मोदी ब्रिटेन में है। इस संबंध में यह सूचित किया जाता है कि मार्च 2018 तक या उसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों से ईडी का ऐसा कोई औपचारिक या अनौपचारिक संवाद नहीं हुआ जिसमें यह जानकारी दी गई कि नीरव मोदी ब्रिटेन में है।’’ ईडी ने कहा, “इंटरपोल नोटिसों और अन्य देशों के साथ सहयोग से निपटने के लिए ब्रिटेन की नोडल एजेंसी नेशनल सेंट्रल ब्यूरो ऑफ मैनचेस्टर ने इसके बजाय भारतीय एजेंसियों से वह खुफिया सूचनाएं ‘उपलब्ध’ कराने के लिए कहा जिससे पता चलता हो कि मोदी ब्रिटेन में है। ब्रिटेन सरकार का लगातार यह रुख रहा है कि किसी आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट ‘‘प्रत्यर्पण के अनुरोध’’ के जरिए ही दिया जा सकता है ना कि पत्र अनुरोध या परस्पर कानूनी सहयोग संधि के जरिए। इसलिए मोदी के लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध उसके खिलाफ आरोपपत्र दायर करने के बाद ही भेजा जा सकता है जैसा कि एजेंसी ने पिछले साल मई में किया था।” एजेंसी ने कहा कि ईडी ने आरोपपत्र दायर करने के बाद मुंबई की एक अदालत से मोदी के खिलाफ ताजा गैर जमानती वारंट हासिल किया था और उसे इंटरपोल को भेजा था जिसने गत वर्ष 29 जून को भगोड़े हीरा व्यापारी के खिलाफ गिरफ्तारी के लिए ‘‘रेड वारंट’’ दिया। इसके बाद प्रत्यर्पण के लिए ताजा अनुरोध ब्रिटेन सरकार को भेजा गया। ईडी ने कहा कि कहा कि हालिया मीडिया खबरें दिखाती है कि ‘‘कानूनी मुद्दों से जुड़ी समझ तथ्यों और स्थापित अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा प्रक्रियाओं के विपरीत है।’’ ईडी ने कहा, ‘‘इस तरह की गलत खबरें और कल्पनात्मक खबरें जनता पर बड़े पैमाने पर गलत असर पैदा कर सकती है।’’ Also Read Hindi News से जुड़े अपडेट और व्यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App
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