Explainer: समुद्र के 6 किमी नीचे क्यों प्रयोगशाला बना रहा भारत, क्या काम करेगी ये लैब

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Explainer: समुद्र के 6 किमी नीचे क्यों प्रयोगशाला बना रहा भारत, क्या काम करेगी ये लैब
समुद्र के नीचे प्रयोगशालाDeep Sea ResearchOcean Technology
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भारत समुद्र के नीचे गहरे में उतर कर एक ऐसी प्रयोगशाला बनाने जा रहा है, जहां वो ना केवल प्रयोग करेगा बल्कि इन संभावनाओं को भी देखेगा कि क्या फ्यूचर में समुद्र के नीचे की स्थितियां मनुष्य के रहने लायक होंगी. हालांकि भारत द्वारा इस लैब को बनाने में अभी समय लगेगा लेकिन इस दिशा में काम शुरू हो चुका है.

भारत अगले 25 सालों में हिंद महासागर में 6 किलोमीटर गहराई पर दुनिया की सबसे गहरी प्रयोगशाला बनाने की तैयारी में लगा हुआ है. पाताल में बनने वाली इस प्रयोगशाला में वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. समुद्री जीवन देखेंगे और इस संभावना का पता लगाएंगे कि क्या मनुष्य समुद्र के नीचे रह सकता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में इस बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. इसके अनुसार चेन्नई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टैक्नॉलॉजी के निदेशक डॉ. बालाजी रामकृष्णन के अनुसार, पहले चरण में 500 मीटर की गहराई पर एक स्टेशन बनाकर तकनीक का प्रदर्शन किया जाएगा. वहां तीन वैज्ञानिक एक दिन या उससे अधिक समय तक रह सकेंगे. इस लैब में एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम होगा और एक डाकिंग सुविधा होगी. जिससे वहां वाहन जा सकें और वहां से आ सकें. ये स्टेशन वैसा ही होगा जैसा अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है. सवाल – क्या दुनिया में ऐसी कोई और भी लैब है जो समुद्र के नीचे काम कर रही है? – हां है. अमेरिका की फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की एक्वेरियस रीफ बेस अभी दुनिया की अकेली अंडरवाटर लैब है लेकिन ये केवल 19 मीटर की गहराई पर है. चीन साउथ चाइना में वर्ष 2030 तक डीप वाटर स्पेस स्टेशन विकसित कर रहा है. सवाल – भारत का प्रस्तावित स्टेशन कितनी गहराई पर होगा? – भारत का प्रस्तावित स्टेशन 6,000 मीटर की गहराई पर होगा यानी ये अब तक का सबसे गहरा समुद्री अनुसंधान केंद्र होगा. इसमें अत्यधिक दबाव झेलने की क्षमता होगी. ये प्रोजेक्ट भारत को न केवल गहरे समुद्र में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिहाज से काफी आगे ले जाएगा बल्कि अंतरिक्ष जैसी एक “अंडरवॉटर स्पेस स्टेशन संस्कृति” की ओर कदम बढ़ाएगा. यह लैब भारत के विजन2047 के रोडमैप का हिस्सा होगी. इसका उद्देश्य समुद्री जीवन, गहरे समुद्र की रासायनिक संरचना और मानव की दीर्घकालिक अंडरवॉटर क्षमता का अध्ययन करना है. सवाल – यह सी लैब कैसी होगी और वहां क्या-क्या होगा? – NIOT के निदेशक डॉ. बालाजी रामकृष्णन के अनुसार, ये इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जैसा होगा. बस ये अंतरिक्ष में नहीं होकर समुद्र में नीचे होगा. इसमें 360-डिग्री पारदर्शी दीवारें होंगी जिनसे वैज्ञानिक समुद्री जीवन को सीधा देख और रिकॉर्ड कर सकेंगे. इसमें एडवांस्ड सपोर्ट सिस्टम, ऑक्सीजन आपूर्ति, तापमान कंट्रोल और एक डॉकिंग सिस्टम होगा. ताकि वहां से वैज्ञानिकों का आना जाना चलना और रहना चाहिए. सवाल – वैज्ञानिक वहां क्या करेंगे? – इस लैब को अंडरवाटर हैबीटेट कहा जाएगा. यानी वैज्ञानिक वहां कुछ समय तक रहकर प्रयोग करेंगे. समुद्री जैवविविधता का अध्ययन करेंगे. रासायनिक और भौतिक नमूनों का विश्लेषण करेंगे. मानव सहनशीलता का परीक्षण करेंगे यानि देखेंगे इंसान कितने समय तक समुद्र की गहराई में सुरक्षित रह सकते हैं. जैव प्रौद्योगिकी, दवाओं की खोज और गहरे समुद्र के माइक्रोब्स पर अध्ययन करने का काम करेंगे. सवाल – इतनी गहराई पर सबसे बड़ी चुनौती क्या है? – समुद्र की 6 किमी गहराई पर दबाव 600 गुना ज्यादा होता है, यानी हर वर्ग इंच पर लगभग 6,000 टन का बल. यह इतना अधिक है कि साधारण धातु या मिश्र धातु तुरंत चकनाचूर हो जाए. इसलिए स्टेशन को टिटेनियम मिश्र धातु, कार्बन कंपोजिट और उच्च दबाव झेल सकने वाली डिजाइन के साथ बनाया जाएगा. संचार इसमें सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि रेडियो तरंगें पानी में नहीं चलतीं. इसके लिए एकोस्टिक सिग्नल सिस्टम और आप्टिकल फाइबर लिंक्स का इस्तेमाल होगा. ऊर्जा आपूर्ति भी कठिन होगी. संभावना है कि सतह से पावर केबल जाएगी. अतिरिक्त बैकअप फ्यूल सेल्स या ओशियन थर्मल एनर्जी सिस्टम से मिलेगा. सवाल – कब तक मनुष्य के समुद्र के नीचे कॉलोनी बनाकर रहने की उम्मीद है? – मनुष्य द्वारा समुद्र के नीचे कॉलोनी बनाकर रहने की कोशिश जारी है लेकिन इसमें समय लगेगा. एक ब्रिटिश स्टार्टअप DEEP इस एरिया में काम कर रहा है लेकिन उसका टारगेट भी 2027 तक समुद्र तल पर स्थायी मानव निवास स्थापित करने है. 2050 तक समुद्र के नीचे पहले मानव के जन्म होने की संभावना है. हालांकि ये इतना आसान नहीं है. इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें भी होंगी.

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समुद्र के नीचे प्रयोगशाला Deep Sea Research Ocean Technology Underwater Habitat Marine Biodiversity Human Underwater Survival Advanced Life Support System

 

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