Explainer: भारत का एकमात्र शहर, जहां नल का साफ पानी सीधे पीने योग्य है! ये गजब की क्रांति आखिर कैसे हुई? सम...

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Explainer: भारत का एकमात्र शहर, जहां नल का साफ पानी सीधे पीने योग्य है! ये गजब की क्रांति आखिर कैसे हुई? सम...
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भारत में किस शहर के नल का पानी सीधे पीने योग्य है? क्या पूरे भारत में ऐसी कोई भी जगह नहीं है, जहां साफ पानी के लिए किसी भी फिल्टर का प्रयोग ना करना पड़े? डायरेक्ट नल से ही पीने का साफ पानी उपलब्ध हो सके? तो इसका जवाब है- हां. एक ऐसा शहर है, जहां का पानी BIS यानी कि भारतीय मानक ब्यूरो के हर पैमाने को पूरा करता हो.

गंदा पानी पीने से मौत हो जाना आज 21वीं सदी में भी एक कड़वी सच्चाई बना हुआ है. यह हकीकत सामने भी मध्य प्रदेश के इंदौर से आई है, जिसे देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा हासिल है. बीते दिनों यहां के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से करीब 11 लोगों की मौत हो गई.

हालांकि सरकार ने चार मौत होने का दावा किया है. सवाल मौत होने या बीमार होने के आंकड़ों का नहीं है, बल्कि यह है कि साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी मुहैया क्यों नहीं है? और क्या पूरे भारत में ऐसी कोई भी जगह नहीं है, जहां साफ पानी के लिए किसी भी फिल्टर का प्रयोग ना करना पड़े? डायरेक्ट नल से ही पीने का साफ पानी उपलब्ध हो सके? तो इसका जवाब है- हां. एक ऐसा शहर है, जहां का पानी BIS यानी कि भारतीय मानक ब्यूरो के हर पैमाने को पूरा करता हो. भारत में आमतौर पर नल का पानी उबालकर या फिल्टर करके पीने की सलाह दी जाती है. अब हर घर में RO फिल्टर पानी मशीन आम बात है. लेकिन अब यह धारणा बदल रही है. ओडिशा का पुरी शहर भारत का पहला ऐसा शहर बन चुका है, जहाँ नल से आने वाला पानी सीधे ही पीया जा सकता है, वो भी बिना उबाले और बिना RO फिल्टर किए ही. यह उपलब्धि केवल तकनीकी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और शहरी प्रशासन के लिहाज़ से एक बड़ी क्रांति मानी जा रही है. इसे भी पढ़ें: क्यों अब भारत में ज्यादातर जगहों पर नलों में आने लगा दूषित पानी, घरों में लगे RO पुरी ने कैसे हासिल की यह उपलब्धि? ओडिशा सरकार ने सुजल योजना यानी कि ‘ड्रिंक-फ्रॉम-टैप ’ मिशन की शुरुआत की. इसका उद्देश्य था कि हर घर को चौबीसों घंटे अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए. पुरी में लगभग 25 हजार से अधिक घरों को सीधे पीने योग्य नल और जल की सप्लाई कराई. पानी की गुणवत्ता WHO के मानकों के अनुरूप है. हर नागरिक को प्रतिदिन 24 घंटे सुरक्षित पानी मिलेगा. पुरी में नल का पानी इतना शुद्ध कैसे बनाया जाता है? पुरी की जल प्रणाली को सामान्य शहरों से बिल्कुल अलग तरीके से विकसित किया गया है. ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ प्रक्रिया आखिर क्या है? ड्रिंक फ्रॉम टैप मिशन के तहत नलों से मिलने वाले पानी में क्लोरीनीकरण और ओजोनीकरण होता है. इससे बैक्टीरिया और वायरस को मारने के लिए बेहतर टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है. पानी की क्वालिटी की रियल-टाइम जांच के लिए सेंसर भी लगे होते हैं. बाहरी गंदगी को अंदर आने से रोकने के लिए हाई-प्रेशर पाइपलाइन सिस्टम का उपयोग हो. अत्याधुनिक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में कच्चे पानी को कई चरणों में शुद्ध किया जाता है. Sedimentation , Filtration , Disinfection की मल्टी-लेयर प्रक्रिया अपनाई जाती है. इसके बाद नंबर आता है अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन और क्लोरीनेशन का. बैक्टीरिया, वायरस और भारी धातुओं को हटाने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग होता है. इसमें नियंत्रित मात्रा में क्लोरीन का प्रयोग होता है, जिससे कि पानी सुरक्षित भी रहे और स्वाद भी खराब ना हो. डिजिटल निगरानी में आएंगे देश भर के हथियार! ये डेटाबेस आखिर है क्या, जिससे पुलिस बनेगी सुपर पॉवर? गौर करने लायक बात यह भी है कि इस प्रक्रिया में पूरी तरह नई पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें पुराने, जंग लगे पाइप हटाकर फूड ग्रेड पाइपलाइन का इस्तेमाल होता है. लीकेज और बाहरी गंदगी के प्रवेश की संभावना लगभग शून्य हो जाती है. रियल-टाइम वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग की जाती है. सेंसर और लैब टेस्टिंग के जरिए रोजाना सैंपल की जांच होती है. अगर कहीं गुणवत्ता में गिरावट, तो तुरंत सप्लाई रोकी जाती है. 24×7 निरंतर जलापूर्ति के लिए पानी का दबाव हमेशा बना रहता है. इससे गंदा पानी पाइप में घुसने की संभावना नहीं रहती है. क्या पुरी का नल का पानी सच में सुरक्षित है? हां, पुरी में पानी की गुणवत्ता की जांच में यह पाया गया कि यहां का पानी सुरक्षित है, जिसे पीने के प्रयोग में लाया जा सकता है. इससे E. coli के साथ ही अन्य हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पाई जाती. TDS, pH और क्लोरीन लेवल नियंत्रित होता है. बच्चों, बुज़ुर्गों और पर्यटकों के लिए भी सुरक्षित है. इसी वजह से स्थानीय लोग अब सीधे नल से पानी पी रहे हैं और बोतलबंद पानी पर निर्भरता घट गई है. इस मॉडल से क्या फायदे हुए? शुद्ध पानी के इस मॉडल से पर्यावरण को भी लाभ है. प्लास्टिक बोतलों की खपत में भारी कमी आई है. RO से निकलने वाला वेस्ट वॉटर खत्म हो गया है. स्वास्थ्य लाभ भी है और जल से होने वाली बीमारियों में कमी भी आई है. गरीब परिवारों को पानी का फिल्टर खरीदने की ज़रूरत नहीं है. इसके साथ ही आर्थिक लाभ भी है. हर परिवार के हजारों रुपये सालाना की बचत हो जाती है. नगर प्रशासन पर मेडिकल बोझ कम पड़ता है. पुरी के बाद किन शहरों में शुद्ध पानी की तैयारी? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरी में नल का पानी भारतीय मानकों को पूरा करता है. यहां लोगों को अब RO या वॉटर फिल्टर की जरूरत नहीं पड़ती. यहां के हर घर और सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों से 24 घंटे पीने योग्य शुद्ध पानी उपलब्ध रहता है. पुरी की सफलता के बाद ओडिशा के अन्य शहरों जैसे भुवनेश्वर और कटक में भी इस मिशन को तेजी से लागू किया गया है. BIS यानि भारतीय मानक ब्यूरो की पिछली रिपोर्टों और 2025 के डेटा के अनुसार, कुछ अन्य शहरों ने भी नल के पानी की शुद्धता में उच्च स्कोर हासिल किया है. क्या पूरे भारत में यह मॉडल लागू हो सकता है? पुरी का मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुका है.पुरी ने यह साबित कर दिया है कि भारत में भी नल का पानी सीधे पीने योग्य बनाया जा सकता है. यह सिर्फ एक शहर की सफलता नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की झलक है, जहाँ सुरक्षित पानी कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि बुनियादी अधिकार होगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा तकनीकी रूप से संभव है. लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, निवेश और पारदर्शी प्रशासन ज़रूरी है.

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