DNA: टैरिफ से तख्तापलट तक ट्रंप का मिशन-2T, कितने देशों में फसाद करवाएंगे US प्रेसिडेंट?

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US Tariff: आजकल पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा किस नाम की चर्चा है? विश्व के किसी भी कोने में ये सवाल

US Tariff: आजकल पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा किस नाम की चर्चा है? विश्व के किसी भी कोने में ये सवाल पूछा जाए तो जवाब शायद एक ही होगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की, जिन्होंने दुनिया में ऐसी हलचल मचाई है कि दुनिया के बड़े बड़े देशों को इससे निपटने की रणनीति बनाने के लिए दिमाग और ताकत दोनों लगानी पड़ रही है.

आप कह सकते हैं इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. दुनिया भर के देशों की टेंशन बढ़ाने या यूं कहें दुनिया के देशों पर अपनी शर्तें थोपने के लिए ट्रंप ने दो प्लान तैयार किए. आज आपको भी ट्रंप की इन दोनों योजनाओं के बारे में जानना चाहिए. जिसे हमने 2टी का नाम दिया है. पहले टैरिफ से मारो न माने तो तख्तापलट करा दो! पहला T है टैरिफ, जिसकी चर्चा हमारे देश में भी बहुत ज्यादा हो रही है. इस हथियार का इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के हर हिस्से पर किया है और दूसरा T है तख्तापलट. जो देश पहले T से काबू में नहीं आ रहे उस पर ट्रंप दूसरे T का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी उन देशों में तख्तापलट की कोशिश की जा रही है. और इस लिस्ट में वेनेजुएला से ब्राजील तक कई देशों के नाम सामने आ रहे हैं. इसके अलावा बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी खबरें आ रही हैं. ट्रंप इन देशों को किस तरह अपने इशारे पर नचा रहे हैं. ये आज आपको भी जानना चाहिए. वेनेजुएला से ब्राजील तक ट्रंप की निगाह सही नहीं है लेकिन ट्रंप ने ऐसा क्या किया कि उन पर दुनिया के देशों में तख्तापलट करवाने का आरोप लग रहा है. आप जानकर हैरान भी हो सकते हैं. ​कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका से लगभग 4700 किलोमीटर दूर मौजूद वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के लिए 50 मिलियन डॉलर यानी 438 करोड़ रुपये के इनाम का एलान कर दिया है. बिल्कुल सही सुना आपने 438 करोड़ रुपये और ये पैसे ट्रंप उसे देंगे जो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की जानकारी देगा और ये इनाम अमेरिका के मोस्ट वांटेड आतंकी ओसामा बिन लादेन के ऊपर घोषित किए गए इनाम 219 करोड़ रुपये से दोगुना है. यानी मादुरो अमेरिका के लिए ओसामा बिन लादेन से भी जरूरी हैं. आज आपको अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी की बात बहुत ध्यान से सुननी चाहिए. किस तरह राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की जानकारी देने पर इनाम का एलान किया जा रहा है. अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बांडी बता रही हैं कि जो भी मादुरो की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देगा. उसे ट्रंप सरकार 50 मिलियन डॉलर यानी438 करोड़ रुपये का इनाम देगी. आज आपको ये भी जानना चाहिए डोनाल्ड ट्रंप क्यों मादुरो को गिरफ्तार करना चाहते हैं. एक देश के चुने हुए राष्ट्रपति को क्यों उनके पद से हटाना चाहते हैं . -डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मादुरो पर नशा-तस्करी के आरोप लगाए हैं. -यानी एक देश के राष्ट्रपति को दुनिया के सबसे बड़े नशा-तस्कर बताया गया है. -अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मादुरो ने नशा तस्करों के साथ मिलकर US में फेंटानिल मिक्स कोकीन की सप्लाई करवाई है. -डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में मादुरो के ऊपर 15 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था. -फिर बाइडेन प्रशासन में इसे 25 मिलियन डॉलर किया गया. -और अब डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से इसे ​बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर यानी438 करोड़ रुपये कर दिया है . लेकिन इस लोकप्रियता से डोनाल्ड ट्रंप को कुछ लेना देना नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप एक अच्छे डीलर हैं. उन्हें सिर्फ मुनाफे से लेना देना है और वो मुनाफा तब कमाएंगे जब वेनेजुएला का तेल उनके कब्जे में आएगा. इसके लिए दबाव बनाना जरूरी है. अब पुरानी दुश्मनी की वजह से दोनों देशों के बीच व्यापार बहुत कम होता है. यानी ट्रंप का टैरिफ वाला हथियार वेनेजुएला पर बेकार है. इसलिए ट्रंप प्रशासन दूसरा T यानी तख्तापलट को आज़मा रहा है. निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के लिए उन पर इनाम बढ़ा दिया गया है. अमेरिका के पास वेनेजुएला पर हमला करके सत्ता परिवर्तन का विकल्प भी है. लेकिन वेनेजुएला के रूस के साथ सैन्य संबंध हैं. इसलिए अमेरिका के लिए सीधे सैन्य हस्तक्षेप इतना आसान नहीं है. निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर इनाम दोगुना करने को वेनेजुएला की सरकार ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का एजेंडा बताया है. इस वजह से वेनेजुएला में ट्रंप सरकार के अधिकारियों का मजाक भी उड़ाया जा रहा है. एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ उनकी कोशिश ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति को जेल से निकालने की है. ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो को नजरबंद कर दिया है और ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत नाराज़ हैं. आप सोच रहे होंगे ब्राजील में एक नेता पर आपराधिक मामला चल रहा है तो ट्रंप क्यों नाराज़ हैं? तो इसका जवाब है डोनाल्ड ट्रंप ऐसे ही हैं, वो दुनिया के हर देश में उस व्यक्ति को सत्ता में देखना चाहते हैं. जिससे उसे मुनाफा हो. इस वक्त पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप के सबसे मुखर विरोधी ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा हैं. जिन्होंने दुनिया में डॉलर के अलावा किसी वैकल्पिक करेंसी से व्यापार का विचार रखा था. जिससे ट्रंप काफी नाराज़ हुए थे यानी ट्रंप, लूला को पसंद नहीं करते. इस नापसंदी की सबसे बड़ी वजह ब्राजील में पूर्व राष्ट्रपति बोलसोनारो के खिलाफ चल रहा मुकदमा भी है. जिसमें ट्रंप जितना दखल दे रहे हैं. बोलसोनारो की मुसीबत उतनी ही बढ़ रही है . - ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के जज एलेक्जेंडर डी मोरेस ने बोलसोनारो के खिलाफ हाउस अरेस्ट का आदेश जारी किया. - ये वही जज हैं जिन्हें पिछले हफ्ते अमेरिकी ट्रेजरी ने प्रतिबंधित कर दिया था और उनकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया था. - बोलसोनारो को नजरबंद करने वाले फैसले में जज ने कहा. बोलसोनारो कोर्ट के उस आदेश को मानने में नाकाम रहे. जिसमें उनसे कहा गया था. वो इस मामले में ट्रंप के हस्तक्षेप को दूर रखें. यानी ट्रंप की बोलसोनारो को बचाने की कोशिश ही उन पर भारी पड़ गई. ट्रंप और बोलसोनारो अच्छे दोस्त रहे हैं. ट्रंप के पहले कार्यकाल में बोलसोनारो ने व्हाइट हाउस में जाकर उनसे मुलाकात की थी और चुनाव हारने के बाद बोलसोनारो पर भी वैसे ही आरोप लगे. जैसे डोनाल्ड ट्रंप पर लगे थे. बोलसोनारो पर ब्राजील में तख्तापलट की कोशिश के आरोप में मुकदमा चल रहा है. बोलसोनारो पर आरोप है कि उन्होंने 2022 के चुनाव में वामपंथी राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा से मिली हार को पलटने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची थी. जनवरी 2023 में बोलसोनारो हजारों समर्थकों के साथ सरकारी इमारतों पर चढ़ गए थे. इस दौरान हुए दंगों ने राजधानी ब्रासीलिया को हिलाकर रख दिया था. ब्राजील में हुए दंगों की तुलना ट्रंप की 2020 की चुनावी हार के बाद यूएस कैपिटल में जनवरी 2021 को हुए दंगों से की गई. दंगों को लेकर ट्रंप के खिलाफ जो आपराधिक मामले शुरू हुए. वो अभी रुके हुए हैं और इस बीच वो दोबारा राष्ट्रपति चुनकर भी आ गए. लेकिन बोलसोनारो के मामले में ऐसा नहीं हुआ वो अब हाउस अरेस्ट हैं. बोलसोनारो पर इस मुकदमे को लेकर ट्रंप बेहद नाराज हैं. #DNAWithRahulSinha | टैरिफ से तख्तापलट..ट्रंप का मिशन-2T, कितने देशों में तख्तापलट करवाएंगे ट्रंप?#DNA #DonaldTrump #UnitedStates #USTariffWar @RahulSinhaTV pic.twitter.comEfFKD8Qmqt — Zee News August 8, 2025 ट्रंप इस मामले को Witch Hunt यानी राजनीति से प्रेरित गलत आरोप लगाकर बोलसोनारो को बदनाम करने की साजिश बताया है. ब्राजील पर हाई टैरिफ की एक वजह बोलसोनारो भी हैं, जिन्हें ट्रंप जेल से बाहर निकालना चाहते हैं. लेकिन क्या बात सिर्फ इतनी सी है क्या मादुरो से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी सिर्फ ड्रग्स तस्करी के आरोपों तक सीमित है. आज आपको ये भी जानना चाहिए. अमेरिका और वेनेजुएला की दुश्मनी काफी पुरानी है, जब से वेनेजुएला में तेल का पता चला तब से अमेरिका की निगाहें उस पर टिकी हैं. 1960 के बाद से अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उद्योग पर दबदबा बनाकर रखा. यानीअमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला से तेल निकालती रहीं. लेकिन 1998 में वेनेजुएला में हुगो चावेज़ के उदय के साथ अमेरिका के साथ संघर्ष शुरू हो गया. हुगो चावेज़ की कम्युनिष्ट विचारधारा अमेरिका से अलग और रूस और चीन जैसे देशों के करीब थी. चावेज़ के प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल उद्योग को राष्ट्रीयकरण किया और अमेरिकी कंपनियों को देश से बाहर कर किया. 2013 में चावेज की मौत के बाद उनके दिखाए रास्ते पर चलने के वादे के साथ सत्ता विदेश मंत्री रहे निकोलस मादुरो के पास आ गई. वेनेजुएला की अमेरिका विरोधी नीतियां बरकरार रहीं. मादुरो तभी से अमेरिका की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं. मई 2025 में हुए चुनाव में मादुरो ने फिर से जीत दर्ज की. लेकिन ट्रंप की सरकार वेनेजुएला के चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगा रही है. ट्रंप ने मादुरो के बजाय विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो और एडमंडो गोंजालेज जैसे विपक्षी नेताओं के गठबंधन को विजयी माना है . डोनाल्ड ट्रंप ने निकोलस मादुरो पर तानाशाही और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं. अब उन पर ईनाम की रकम को दोगुना कर दिया गया है. यानी ट्रंप निकोलस मादुरो को वेनेजुएला की सत्ता से हटाना चाहते हैं और ​अमेरिका समर्थक विपक्षी नेताओं को सत्ता में बिठाना चाहते हैं. जबकि मादुरो की जीत बताती है. विपक्षी पा​र्टियों और अमेरिका के विरोध के बावजूद वो वेनेजुएला के लोगों में लोकप्रिय हैं. बोलसोनारो मामले को लेकर ट्रंप ने ब्राजील पर 50% का टैरिफ लगा दिया है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है. अगर बोलसोनारो के खिलाफ मामला खत्म नहीं किया जाता. यानी उनको जेल से बाहर नहीं निकाला जाता तो वो ब्राजील के खिलाफ और प्रतिबंध लगाएंगे. लेकिन अगर बोलसोनारो पर आरोप साबित हो गए तो उनको 40 साल की जेल हो सकती है. बोलसोनारो के कुछ समर्थक ये भी मान रहे हैं. ट्रंप की रणनीति ब्राजील में उल्टी पड़ सकती है. यानी ट्रंप की वजह से बोलसोनारो की परेशानी बढ़ सकती है और ट्रंप के बयानों से लूला की वामपंथी सरकार के लिए जनता का समर्थन बढ़ रहा है. शायद ये ही वजह है ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने कहा है अब वो टैरिफ पर ट्रंप से बात नहीं करेंगे. लूला ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करके दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने का एलान किया है. अब ब्राजील में भले ही ट्रंप का दबाव काम ना आ रहा हो लेकिन बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देश ट्रंप के इशारों पर नाच रहे हैं. अपनी अलग सत्ता चला रहे ट्रंप? बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार बनने के बाद अमेरिकी अधिकारी इस देश को व्हाट्सएप पर चला रहे हैं. बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वो पूरी तरह अमेरिका के नियंत्रण में है. अमेरिका से बांग्लादेश के प्रमुख सलाहकारों को वॉट्सएप पर सीधे संदेश भेजकर सरकारी नीतियों और फैसलों पर निर्देश दिए जा रहे हैं. ये कैसे हो रहा है आज आपको भी जानना चाहिए . -एक अमेरिकी राजनयिक ने बांग्लादेश सरकार के एक सलाहकार को 298 शब्दों का संदेश भेजा, जिसमें बांग्लादेश को ट्रेड डील और टैरिफ ढांचे पर दिशा-निर्देश दिए गए थे. -इसके अलावा अमेरिका के राजनयिक ने बांग्लादेश सरकार को निर्देश दिए कि वे रिवर्सिबल टैरिफ ढांचे को स्वीकार करें. रिवर्सिबल टैरिफ ढांचे को व्यापारिक परिस्थितियों के आधार पर कभी भी बदला जा सकता है. -अमेरिकी अधिकारियों ने संदेश दिया था. बांग्लादेश को इससे व्यापारिक लाभ मिलेगा नहीं तो उनको 37% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. -बांग्लादेश ने फौरन इन निर्देशों को मान लिया. इसी वजह से बांग्लादेश को टैरिफ से छूट मिल गई -अमेरिकी राजनयिक सरकार के अलावा अदालत के फैसलों में भी हस्तक्षेप कर रहे हैं. -एक अमेरिकी राजनयिक ने बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के जज से मुलाकात की. जिसके बाद जमात-ए-इस्लामी के बड़े नेता को रिहा कर दिया. जमात ए इस्लामी ने बांग्लादेश में हसीना सरकार के तख्तापलट में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बदले बांग्लादेश पर अमेरिका ने सिर्फ 20 प्रतिशत टैरिफ लगाया. बांग्लादेश के अलावा पाकिस्तान में भी ट्रंप का सिक्का चल रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर कंट्रोल के लिए सेना प्रमुख आसिम मुनीर को चुना है. आसिम मुनीर को ट्रंप सीधे व्हाइट हाउस बुलाकर निर्देश देते हैं. आसिम मुनीर इस वक्त भी अमेरिका में मौजूद हैं. जहां पर एक मिलिट्री प्रोग्राम के बाद ट्रंप और मुनीर की मुलाकात हो सकती है.

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