CJI सूर्यकांत बोले- न्याय बेसुरी आवाज जैसा नहीं चाहिए: इसमें एक रिदम हो, आवाज और भाषा भले अलग लेकिन सुर एक ...

CJI Surya Kant Said – Justice Should Not Be Like A News

CJI सूर्यकांत बोले- न्याय बेसुरी आवाज जैसा नहीं चाहिए: इसमें एक रिदम हो, आवाज और भाषा भले अलग लेकिन सुर एक ...
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CJI Surya Kant said – Justice should not be like a tuneless voiceभारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने बुधवार को देश में नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी की वकालत की। ताकि देशभर की हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिए जाने वाले फैसलों में समानता दिखे। CJI ने इसे एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि न्याय ऐसे...

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार को देश में नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी की वकालत की। ताकि देशभर की हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिए जाने वाले फैसलों में समानता दिखे। CJI ने इसे एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि न्याय ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स के सेट जैसा नहीं हो सकता जिसे अन्य इंस्ट्रूमेंट्स के बिना बजाने से सुरीली आवाज निकले। लेकिन जब साथ में बजाया जाए तो उसमें बेसुरी आवाज निकल आए। हमें एक ऐसे रिदम की जरूरत है जिसमें आवाज और भाषा भले अलग हो जाए लेकिन संवैधानिक सुर एक जैसा निकलना चाहिए। सूर्यकांत ने ये बातें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से आयोजित संविधान दिवस समारोह में कहीं। जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज जस्टिस विक्रम नाथ, लॉ मिनिस्टर अर्जुन राम मेघवाल और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी मौजूद थे।विदेशी चीफ जस्टिस भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

..ने कहा- उनका देश भारतीय न्याय व्यवस्था से गाइड होता है। कानून को पढ़ने और समझने में भी हम भारतीय अदालतों के हिसाब से चलते हैं। मैं दूसरे जजों के साथ भारत के नए चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत को बधाई देता हूं। यह बहुत दिलचस्प सेशन रहा है।कहा- हम आपकी सफलता की कामना करते हैं ताकि हम साथ मिलकर काम करते रहें और न सिर्फ भारत में बल्कि सभी कॉमन लॉ देशों में भी कानून के राज को बनाए रखें।ने कहा- आपके पास सबसे बड़ा लैंड एरिया है जो नेचुरल रिसोर्स से भरपूर है। आपके संविधान में 106 अमेंडमेंट हुए हैं। जब मैं CLC-दिल्ली में था, तब 91 अमेंडमेंट हुए थे। और संविधान का बेसिक स्ट्रक्चर वैसा ही है। हम भारत का बहुत सम्मान करते हैं। मैं इस कोर्ट में इतने वकील देखता हूं, जितने मेरे शहर में नहीं दिखते।संसद के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 150 वां संविधान दिवस मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान को 9 नई भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी किया। राष्ट्रपति ने कहा- संसद ने तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई को खत्म कर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। GST आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, जिसने देश की आर्थिक एकता को मजबूत किया है। राष्ट्रपति ने बताया- अनुच्छेद 370 हटाने से देश की राजनीतिक एकता में आ रही बाधा दूर हुई। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई शुरुआत करेगा। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी। दरअसल 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल रहे।संविधान सभा ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान एडॉप्ट किया था। हालांकि, कानूनी रूप से इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जिस दिन हम सब रिपब्लिक डे मनाते हैं। भारत के संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी में 1 लाख 17 हजार 369 शब्द हैं। जिसमें 444 आर्टिकल, 22 भाग और 12 अनुसूचियां हैं। 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने देश की पूर्ण आजादी का नारा दिया था। इसी की याद में संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया। 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई थी। उस अधिवेशन में अंग्रेज सरकार से मांग की गई थी कि भारत को 26 जनवरी, 1930 तक संप्रभु दर्जा दे दिया जाए। फिर 26 जनवरी, 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इसके बाद 15 अगस्त, 1947 तक यानी अगले 17 सालों तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इस दिन के महत्व की वजह से 1950 में 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। प्रेम बिहारी संविधान की मूल कॉपी को लिखते हुए। वे उस वक्त देश के सबसे बड़े कैलीग्राफी आर्टिस्ट माने जाते थे।भास्कर एक्सप्लेनर- संविधान लिखने में 432 निब घिस गईं: मूल कॉपी का वजन 13 किलो, नाइट्रोजन चैंबर में क्यों रखा गया है क्या आप जानते हैं कि हमारा संविधान किसने लिखा? कुछ लोगों के मन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम आएगा, जबकि इस इस सवाल का सही जवाब प्रेम बिहारी नारायण रायजादा हैं। डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है, मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी। इस काम में उन्हें 6 महीने लगे और कुल 432 निब घिस गईं।BJP के यौन शोषण के आरोपों से घिरे विधायक से मांगा इस्तीफा; विपक्ष ने काम रोको प्रस्तावअंजली की मैरिज में परिवार-मेहमान गवाह बने, धर्मशाला में एक मंडप दो देशों की परंपराएंVIT में दूसरे दिन भी बवाल, बस और बाइकें जलीं, तोड़फोड़; कैंपस में पैरामिलिट्री तैनातसीताफल एक्सीलेंस सेंटर में मौसम खराब, फिर भी बढ़िया पैदावारजयपुर सहित कई जिलों में कल से बारिश का अलर्टचित्तौड़गढ़ में बादलों और हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरनपंजाब-चंडीगढ़ में ठंड बढ़ीनर्मदापुरम में मौसम बदला, बादल छाए

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